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श्री केदारनाथ
भोपाल से वेरुल तक की यात्रा
भोपाल से वेरुल तक की यात्रा

संस्कृति की विपुल निधि, भाषायी मिठास, धरोहरों की विरासत और आध्यात्म के रंग से सराबोर देश ‘भारत’ कितना कुछ अपने में समेटे हुए है। जिधर निकल जाईये रंगों का अनूठा संसार ही पाइयेगा। इन्हीं रंगों को समेटकर आप तक पहुंचाने का प्रयत्न किया है।
आप सोचेगें-रोड ही क्यों। इसलिए कि रोड से सफर करने से दिखता बहुत है और जो करीब से दिखता है उसी से तो तादात्म्य स्थापित करना आसान होता है।
दूरियों को पाटकर बीच-बीच में यूरोप की सड़क यात्राओं का उल्लेख कर निखालिस यूरोपियन संस्कृति से भी आपको रूबरू करायेंगे। फिलहाल पढ़ें और प्रतिक्रियाएं भेजें क्योंकि संवाद का क्रम बने रहना चाहिए…

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