पश्चिम बंगाल की लोक नाट्य शैली “भवानी जात्रा” में महिषासुरमर्दिनी

उनके अनुसार प्रकाश व्यवस्था का जात्रा में विशेष स्थान रहा है। पूर्व में श्वेत प्रकाश व्यवस्था को भक-भक हाथों के प्रभाव से उत्पन्न किया जाता था। आज तो ‘फ्लिकर्स’ आ गये हैं। जात्रा का पर्याय ही था साज-सिंगार का आधिक्य, घर के रंग रोगन वाले पेंट से चेहरा रंग ने, काले रंग के लिए पहले दियासिलाई जलाने के बाद की कजली से निर्मित काले रंग का प्रयोग करने, लाल रंग के लिए बंगाली पान का बीड़ा मुंह में रख ने का प्रयोजन  किया जाता था जिससे मुंह, होंठ और जीभ सब लालिमा से रंग जाते थे। राजा महराजा के मुकुट, राजसी वैभव पर विशेष ध्यान दिया जाता था। पूर्वनिर्धारित संवादों के स्थान पर मंच पर ही तत्कालिक संवादों की निर्मिति होती थी। जिन्हें ‘टोन्शा’ (बंगाली में) कहा जाता था।आज शुभोजीत के अनुसार  मंगल काव्यों वाली जात्रा भी अन्य लोकनाट्य कलाओं की भांति अपने अस्तित्व के लिए संघर्षषील है। अब 24 उत्तर परगना में 3 मिदनापुर में 2, बीरभूम में 3 और पुरूलिया में 5 ऐसी मण्डलियां रह गयी हैं जो जात्रा आयोजित करती हैं। अधिकांषतः लोकनाट्यों में पुरूषों द्वारा स्त्रीपात्रों का अभिनय किये जाने पर शुभोजीत बताते हैं बंगाल में  कई स्थानों पर नवरात्रि महालया के अवसर पर आज भी पुरूषों द्वारा देवी चित्रण की परंपरा है।

पारंपरिक और संस्कारवान शुभोजीत बताते हैं कि उन्हें ‘जात्रा’ करने से आत्मिक संतुष्टि मिलती है अनेक गत्यावरोधों के बीच भी वे येनकेन प्रकारेण आपनी इस कला को अक्षुण्ण रखना चाहते हैं बल्कि इसे और प्रचारित और प्रसारित भी करना चाहते हैं। बहुव्यापक  शब्द माता के जननी, जनित्री, जनयित्री और प्रसू पर्याय हैं। कुल मिलाकर भवानी जात्रा मातृ देवो भवः का सन्देश देकर हमारे स्मृति पुराण श्रुति और नीति ग्रंथों में निहित माता की महिमा को भली-भांति समझाने में सफल रही।

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Comments

  1. डॉ शैल श्रीवास्तव ,गीतांजलि कॉलेज,भोपाल says:

    दिशा जी आपके द्वारा लिखा गया ये ब्लॉग बहुत ही बढ़िया हे एकदम सटीक। आपको धन्यवाद की आपने हम सबको पश्चिम बंगाल के इस लोक नाट्य शैली “भवानी जत्रा” से परिचित कराया।
    वीडियो देखने पर आपकी लेखनी उसके साथ चलती नजर आईं। भाषा में तारतम्य कहीं भी टूटता नहीं हे। मां महिषासुर मर्दिनी के क्रोध का संपूर्ण वर्णन बहुत ही सुंदर किया गया हे। अंत में ,
    एक संदेश भी प्रतीत होता है कि सब रिश्तों में मां का स्थान सबसे ऊंचा हे।

  2. शुभोजीत हलदर says:

    Thank u so much ma’am…
    Bahot accha laga…
    Bahot i accha lika ma’am
    Thank u ma’am thank u so much….🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻💐

  3. राम जूनागढ़ says:

    Cભવાની જાત્રા કા પરિચય સુંદર તરીકે સે કરવાને કે લિએ ધન્યવાદ. લોકકલાઓકે બારેમે આપને પુખ્તા જાનકારી પ્રાપ્ત કરકે પીરસી હૈ.
    યા શકિત સર્વ ભૂતેષુ માતૃરુપેણ સંસ્થિતા,
    નમ : તસ્યૈ , નમ : તસ્યૈ , નમ : તસ્યૈ.