लोकमतः राजा विक्रमादित्य का शनि प्रकोप चम्पावती (चकल्दी) में शांत

चकल्दी गांव की नामवरी के लोकगीत और चम्पावती की आस्था की नदी कौशल्या की महिमा महिलाओं के कंठ से निःसृत

हम जितनी गलियों में घूमते गए चंपापुर नगरी अथवा चंपावती नगर  के निकट वन में घोड़े के देह त्यागने, सेठानी का हार चोरी होने, धनपत तेली के सेवक चौरंगा (विक्रमादित्य) पर चोरी का आरोप लगने , चौरंगा को  घाने पर बैठाने  हांकत-हाकत दिन काटने , विक्रमादित्य के दीपक राग गाने  से राज कन्या का प्रभावित होने, हाथ पग से अपंग विक्रम से विवाहातुर राजकन्या के ब्याहने, ब्याह के बाद विक्रमादित्य का उज्जैनी में पुनरागमन होने , शनि दशा का अंत और शनि से  विक्रमादित्य की  याचना जैसे मुझे  दुःख दिए किसी अन्य को न देना जैसे लोकविश्वास सामने आते गए इसीलिए तो लोकमानस की आत्मीयता से पगी लोकधारणाएँ मन को छूती हैं।

यही नहीं गाँव की गलियाँ नापते समय चकल्दी गांव की नामवरी के लोकगीत और चम्पावती की आस्था की नदी कौशल्या की महिमा महिलाओं के कंठ से निःसृत होती रही। ऐसा लगा मानो लोक मन में विराजी गंगा रूपी कौशल्या का नीर निर्झरित हो रहा हो।  101 वर्ष की रामकुमारी विश्वकर्मा और शशि विश्वकर्मा द्वारा सुनाये गये गीत में हमें  कौशल्या नदी के पवित्र जल  का वर्णन सविस्तार  मिला। यह कोलार नदी का अपभ्रंश है यह सुनकर तो हम हक्का बक्का से रह गए। यहाँ आने तक हम इस सत्य से अनभिज्ञ थे कि कौशल्या नदी का बिगड़ा हुआ नाम कोलारनदी  है। चंपावती नगरी जब बिगड़े स्वरूप में लोकसहज प्रवृत्ति के अनुरूप चकल्दी हो सकती है तो कौशल्या कोलार क्यों नहीं  हो सकती है। यह अनचीन्हा सत्य हमें 85 वर्षीय नन्नू लाल साहू के उद्गारों से भली-भांति समझ आ गया था।

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Comments

  1. Rajendra Kumar Malviya says:

    दीदी सादर चरणस्पर्श, दीदी आपने महाराजा विक्रमादित्य से जुड़ी प्राचीन चम्पावती नगरी और आधुनिक चकल्दी शहर को इतिहास के पन्नो से लाकर एक बार फिर पुनर्जीवित कर दिया। आपके इस प्रयास के लिए मेरे पास आपकी तारीफ के लिए शब्द नही है आदरणीय दीदी। मैं हमेशा आपके लेख की प्रतीक्षा करता हूँ।