राजस्थान की लोकनाट्य कुचामणि ख्याल शैली और महाराष्ट्र का लावणी नृत्य

लोग संवादों और गायकी की इस सम्मिश्रित देहाती व्यवस्था में रूचि लेकर आनंद उठा रहे थे लेकिन आज स्थिति ठीक उसके उलट है, बंशीलाल जी को यही बात सालती है। वे ख्याल परंपराओं के मंचन में युवा प्रतिभाओं की अनुपस्थिति को लेकर भी क्षुब्ध दिखाई देते हैं। कभी मुक्ताकाशी मंचों पर पशु मेलों की चहल-पहल रहे कुचामणी ख्यालों के प्रति गाँवो में भी  उदासीनता दिखती है, बदली मनः स्थितियों में तख्वतोड़ पद संचालन और जोशीले संवादों वाली कुचामणी ख्याल नाट्य परंपरा को मूल स्वरूप में सहेजना उनके लिए भी कठिन हो रहा है। दोहा, कवित्त, शेर, सोरठा, छप्पय ठंडी, टेरे रंगतों का जमाव, और दोहों में चन्द्रायणी व तिल्लाणी पर ईनाम देने वाले रसिकों की कमी उन्हें अखरती है। हमने पाया कि टूटी-फूटी अंग्रेजी में गिटर-पिटर कर हंसाने वाला हलकारा हो या पारंपरिक कांचली कुर्ती लुगड़ा राजस्थानी पहरावा पहने मुरदारसिंगी सूखा हिंगुल और काजल से सजे संवरे पुरूष स्त्री भूमिकाओं में हों सभी अपनी ओर से श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे थे, अंततः हम यह कह सकते हैं कि  एक हाथ में रूमाल और दूसरे में तलवार लिये ये लोककलाकार वीर रस से ओत प्रोत सरस गीतों और अपनी अगिंक चेष्टाओं के बल पर वीरता व अखण्डता के लिए प्रसिद्ध मरु भूमि के रेतीले धौरों के बीच दर्शकों को ले जा पाने में पूर्णतः सफल रहे।  धार्मिक पुट लिए संवाद और श्रृंगारपूर्ण प्रभावक अभिनय के गुंथाव वाली यह प्रस्तुति मन को तंरगित कर गयी। हमने बंशी लाल जी के पुत्र जो मकराना का संगमरमरी व्यवसाय छोड़कर इस विधा से जुड़ चुके हैं,  शौकत से भी बात की उन्होंने बताया कि वर्तमान में परंपरागत विषयों के साथ-साथ साक्षरता नशाबंदी, बाल विवाह रोकथाम, सामाजिक कुरीतियों के प्रति सचेत करते जन जागृति परक मारवाड़ी खेलों को  संरक्षित करने के बंशीलाल के प्रयासों में वे कंधों से कंधा मिलाकर चल रहे हैं, वे अपने पुरखों की कलामयी रचनाओं को भविष्य में भी जारी रखने के हामी हैं। इन लोककलाओं को आप जैसे सुधि दर्शकों से भी अपार आत्मीय लगाव की अपेक्षा है।

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Comments

  1. राम जूनागढ़ says:

    લોકનૃત્ય કે બારે મે આપ બહુત બઢીયા કામ કર રહી હૈ.
    આપકી લેખનશૈલી ભી બહતે જલ કી તરહ નિરાલી ઔર લાવણી નૃત્ય જૈસી લાવણ્યમય હૈ.
    મેરા સુઝાવ હૈ કી આપ સભી કલાનૃત્ય કે બારે મે એક બુક પ્રકાશિત કરે.
    બહુત સુંદર શૈલી મે આપ મોતી જૈસા કાર્ય કર રહી હો.
    ધન્યવાદ.