राजस्थान की लोकनाट्य कुचामणि ख्याल शैली और महाराष्ट्र का लावणी नृत्य

महाराष्ट्र प्रान्त के लोकनाट्य तमाशा का अभिन्न अंग रही लावण्यमयी लावणी

महाराष्ट्र प्रान्त के लोकनाट्य तमाशा का अभिन्न अंग रही लावण्यमयी लावणी की भाव भंगिमाएं लिए मध्यप्रदेश शासन के नृत्यश्री सम्मान से सम्मानित कृथक नृत्यागंना अमृता जोशी की प्रस्तुति ने दर्शकों को रसविभोर कर दिया। जनजातीय संग्रहालय के खचाखच भरे सभागार में पारंपरिक लावणी की भक्ति व श्रृंगार प्रधान गेयता वाली चटपटी शब्द रचना के साथ अंगों की मनोहारी चेष्टाओं की ठसक वाली अमृता की बैठी व खड़ी लावणियों ने देखने वालों को थिरकने पर विवश कर दिया। मध्यप्रदेश के धार नगर के सुयोग्य नृत्यगुरू बद्रीलाल मालवीय से कत्थक नृत्य का प्रशिक्षण लेने वाली अमृता की विज्ञान विषय में स्नातक तक शिक्षा धार में ही सम्पन्न हुई है, उन्होंने मालवा में कथक के अग्रणी रहे गुरू पुरु दधीच से नृत्य की बारीकियां सीखीं हैं। मुंबई के गंधर्व विश्वविद्यालय से कथक से विशारद अमृता ने अनके प्रतिष्ठित अन्तर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के मंचों से कत्थक के भाव व तकनीकी पक्ष के प्रस्तुतीकरण द्वारा  खूब वाहवाही बटोरी है । इन्दौर में जन्मी अमृता ने पांच वर्ष की अल्पायु से नृत्य के प्रति अपने असीम रूझान के चलते मंचीय प्रस्तुतियों से नृत्य कौशल का परिचय देना प्रारंभ कर दिया था। कत्थक गुरू उमा डोगरा  और मनीषा साठे जैसी अग्रणी कत्थक नृत्यांगनाओं से मार्ग दर्शन प्राप्त कर उन्होंने निरंतर अपनी कला को निखारा और नृत्यसंयोजन के क्षेत्र में पदापर्ण कर अपनी नृत्य प्रवीणता से सबको अवगत करवाया।

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Comments

  1. राम जूनागढ़ says:

    લોકનૃત્ય કે બારે મે આપ બહુત બઢીયા કામ કર રહી હૈ.
    આપકી લેખનશૈલી ભી બહતે જલ કી તરહ નિરાલી ઔર લાવણી નૃત્ય જૈસી લાવણ્યમય હૈ.
    મેરા સુઝાવ હૈ કી આપ સભી કલાનૃત્ય કે બારે મે એક બુક પ્રકાશિત કરે.
    બહુત સુંદર શૈલી મે આપ મોતી જૈસા કાર્ય કર રહી હો.
    ધન્યવાદ.