राजस्थान की लोकनाट्य कुचामणि ख्याल शैली और महाराष्ट्र का लावणी नृत्य

अमृता शास्त्रीय नृत्य कत्थक की चमक, आंगिक लचक, कदमों की आवृत्ति और तत्कार तक ही सीमित नहीं रहीं बल्कि वे राजस्थानी, लावणी और सूफी नृत्य को भी अपनी कलाकारिता में सम्मिलित कर कलानिधियों में अभिवृद्धि करती गयीं। जिसने उनकी कलायात्रा को और ऊंचाई बक्शी। उनकी कलाभिरूचि ने मायानगरी मुंबई की बाॅलीवुड संस्कृति से उन्हें जोड़ दिया। अनगिनत पुरस्कारों से पुरस्कृत अमृता ने भोपाल में अपनी एकल प्रस्तुति या राव जी और सामूहिक नताली पीताम्बर, नताली तुमचा साथी जैसी आठ अबाधित प्रस्तुतियों से सोलापुर, कोल्हापुर, औरंगाबाद और पुणे में लोकप्रिय रही तमाशा परंपरा में झलकती महाराष्ट्रीय संस्कृति को ज्यों का त्यों उतार दिया। निःसंदेह अमृता की अद्वितीय कला साधना मध्यप्रदेश के लिए गौरवान्वित करने वाली है। नयी प्रतिभाओं को नृत्य प्रदर्शन का मंच प्रदान करने की प्रबल पक्षधर अमृता के साथ मंच साझा करने वाले नवोदित कलाकरों का भी योगदान सराहनीय रहा।

5 / 5आगे

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

2 × two =

Comments

  1. राम जूनागढ़ says:

    લોકનૃત્ય કે બારે મે આપ બહુત બઢીયા કામ કર રહી હૈ.
    આપકી લેખનશૈલી ભી બહતે જલ કી તરહ નિરાલી ઔર લાવણી નૃત્ય જૈસી લાવણ્યમય હૈ.
    મેરા સુઝાવ હૈ કી આપ સભી કલાનૃત્ય કે બારે મે એક બુક પ્રકાશિત કરે.
    બહુત સુંદર શૈલી મે આપ મોતી જૈસા કાર્ય કર રહી હો.
    ધન્યવાદ.