श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग :शिव का छठवाँ दिव्य धाम

श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग :शिव का छठवाँ दिव्य धाम

भगवान भीमाशंकर का दिव्यधाम
अब हमारे सामने भूतभावन, निर्विकार, निराकार, अचिंत्य, पूर्णतम पुरूषोत्तम भगवान भीमाशंकर का दिव्यधाम था। पांच सीढ़ियां और उतरने पर गर्भगृह में चंहु ओर चिन्मयीं सुवास के बीच परमानंद अनुभूत शिव के पूर्वाभिमुख ज्योर्तिमय स्वरूप के सम्य्क साक्षात्कार से हम पूर्णतः कृतार्थ हो गए। निंरतर गुंजायमान षडाक्षर मंत्रों का जाप, अपार आसक्‍ति और सर्वत्र व्याप्त शिवत्व एक शिवोपासक को भला और क्या चाहिए। शिव की प्रेरणासहयोगिनी पार्वती भी यहीं विराजीं हैं। सामने सभामण्डप में स्थितप्रज्ञ, संयमी और यत्नशील बनने की प्रेरणा देते कूर्म और नंदी हैं। प्रवेशद्वार के दोनों ओर क्रमशः गणेश और कालभैरव हैं इन्हीं द्वारपालों की परीक्षाओं में उत्तीर्ण होकर ही साधक के लिए शिवरूपी आत्मा की प्राप्ति संभव है यही तो शैवदर्शन है।

श्री भीमाशंकर का शाश्वत धाम,प्रवेशद्वार- श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग :शिव का छठवाँ दिव्य धाम
श्री भीमाशंकर का शाश्वत धाम,प्रवेशद्वार- श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग :शिव का छठवाँ दिव्य धाम

यहीं हमारी भेंट मंदिर के उपाध्ये रत्नाकर रघुनाथ कोडिलकर जी से हुई जिनकी तेरहवीं पीढ़ी भीमाशंकर मंदिर में पौरोहित्य और अनुष्ठान कर्म का निष्कामभाव से दायित्व निभा रही हैं। उनके अनुसार ऋग्वेद में डाकिन्यां पर्वत शिखर पर रूद्रदेव की उपासना और डांकिनी देवी की अराधना का  उल्लेख मिलता है। पौराणिक कथाओं में त्रिपुरासुर वध का संबंध इसी डाकिनी देवी अरण्य क्षेत्र से होने के प्रमाण मिलते हैं। बताया जाता है कि दैत्य त्रिपरासुर के उन्मत्त उन्माद से त्रस्त और व्याकुल देवताओं तथा ऋषिगणों ने आशुतोष शिव से दुष्ट दैत्य से परित्राण हेतु प्रार्थना की। कृपासिंधु शिव ने ब्रम्हा और इन्द्र देव को भीमाशंकर पहाड़ी पर अवस्थित आदिशक्ति की कमल पुष्पों से अराधना का मार्ग सुझाया। भीमाशंकर मंदिर के नैकट्य स्थित कमलजादेवी को स्थानीय जनमानस इसी कथा के साथ जोड़कर देखता है। आदिशक्ति की सहायता से भीमकाय स्वरूप धारण कर स्वयं शिव ने विष्णु के बाण और वासुकी के धनुष से त्रिपुरासुर का अंत किया। जनश्रुति है कि इस घमासान युद्ध के पश्चात् विश्राम कर रहे शिव के पसीने से सहस्त्र जल धाराओं की उत्पत्ति हुई जिनसे भीमा नदी का उद्गम हुआ। सदाशिव के विजयोत्सव को यहां के लोग त्रिपुरी पूर्णिमा अथवा कार्तिक पूर्णिमा के दिन हर्षोल्लास के साथ परंपरागत रूप से मनाते हैं। इस दिन आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी, कोली, महादेव कोली समाज के असंख्य परिवार यहां एकत्रित होते हैं और सच्चिदानंद परमेश्वर भीमाशंकर को खीर अथवा अन्य नैवेद्य लगाकर कृतज्ञता ज्ञापन करते है। इस दिन मंदिर प्रांगण की दीपमालाएं प्रज्वलित की जाती हैं और शिव के ज्योतिर्लिंग स्वरुप व शिवालय का सुरुचिपूर्ण श्रृंगार किया जाता है।

Comments

  1. Vipin Vishwakarma says:

    आपका ब्लॉग पढ़ा यात्रा तो सच-मुच जोरदार थी…पर मेरी हिंदी इतनी अच्छी न होने के कारण कुछ वाक्यो का अर्थ पूरी तरह नहीं समझ पाया जैसे की…

    कुशलक्षेम, वैशिष्ट्य, स्थितप्रज्ञ, यत्नशील, नैवेद्य, रक्तरंजित, हितार्थ, शिल्पोत्कीर्णन, सभाण्डप, कतिपय, लोलक, धर्मप्राण, पुलकेशी, सलिला, स्वयंभू, प्रदक्षिणा

    पहली बार ये शब्द देखे और सुने………मुझे तो लगता था की सिर्फ इंग्लिश ही बहुत कठिन है

    1. Disha Avinash says:

      विपिन धन्यवाद,कोई भी भाषा कठिन नहीं है ,बस कुछ शब्द ऐसे होतें हैं हर भाषा में जिन्हें हम कम प्रयोग में लाते हैं तो वे ज़ुबान से ग़ायब हो जाते हैं हमारे साथ बने रहिए भाषा सुधर जाएगी बहरहाल आपने जानना चाहा है कुछ शब्दों का अर्थ मसलन हितार्थ-फ़ायदे के लिए,यत्नशील-मेहनती,रक्तरंजित-ख़ून से लथपथ,पुलकेशी-चाणक्य वंश का राजा,प्रदक्षिणा -चक्कर लगाना,नैवेध-देवता का भोग,स्वयंभू-अपने आप उत्तपन्न,कतिपय-कुछ लोगों ने,धर्मप्राण-धर्म से जुड़ा हुआ,सलिला-नदी,वैशिष्टय -विशेषताओं से भरा हुआ,स्थितप्रज्ञ-शान्त,कुशलक्षेम-ख़ैरियत जानना,लोलक-घण्टे का लटकन,शिल्पोत्कीर्णन-हाथ से उकेरी गई मूर्तिकला,सभामण्डप-मंदिर का हिस्सा
      इसी तरह जुड़े रहिए,

  2. Swati says:

    Disha Very well described as usual ?

    1. Disha Avinash says:

      स्वाति तुमने आलेख की प्रशंसा की,धन्यवाद
      देश से बाहर रहने वाला जब लेख से जुड़ाव महसूस करता है तो और भी ख़ुशी मिलती है

    1. Disha Avinash says:

      मनोज तुम स्वयं ज्योतिलिंगों की यात्रा कर रहे हो तुम संतुष्ट तो हम प्रसन्न

  3. Rajendra kumar malviya says:

    Bahut hi adbhut akalpaniy yatra vrittant. Bhagwan shri Bhima Shankar ke aloukik darshan.
    Jai mahakal, jai Bhima Shankar.

    1. Disha Avinash says:

      राजेन्द्र जी,आप को आलेख पठनीय लगा ,धन्यवाद,जय भीमाशंकर?

  4. Ankita dubey says:

    आपने पिछले ब्लॉग में ज्योतिर्लिंगो के दर्शन अपने आपकी लेखनी से कराये …… भगवान शिव का छठवाँ धाम श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन आपके माध्यम से हुए इसमे अपने हमें पौराणिक कथाओं के वारे जैसे त्रिपुरासुर वध तथा सहस्त्र जल धाराओं की उत्पत्ति के साथ- साथ एक और जानकारी हमें प्राप्त हुई कुम्भकर्ण और कर्कटी के वारे में , रथनुमा पहाड़ी और मंदिर के निर्माण की जानकारी जिस में हमें विनायक राव ,राधोबाबा दादा पेशवा , महारानी अहिल्या बाई होल्कर चिमणजी अंता जी भिडे द्वारा इन के वारे में जानकारी दी ……… श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के परिसर में स्थित शनि मंदिर का विशालकाय घंटा ,विनायक मंदिर , मोक्ष कुण्ड तथा भीमा नदी की व्युपत्ति कैसे हुई इसके वारे में हमें अवगत कराया अगली लेखनी का इंतजार रहेगा

    1. Disha Avinash says:

      अंकिता तुमने आलेख को बहुत ध्यान से पढ़ा ,एकोएक वाक्य पर चिन्तन किया ,मन प्रफुल्लित कर दिया ?

  5. nitya dubey says:

    आपके माध्यम से हमें भगवन शिव के ज्योतिर्लिंगो के दर्शन हो रहे है

    1. Disha Avinash says:

      नित्या तुम हमारे साथ जुड़ी रहो इसी तरह,धन्यवाद

  6. JAY DUBEY says:

    भीमा शंकर के मंदिर के दर्शन और उसका विवरण पढ़ कर बहुत ही अच्छा लगा अगली लेखनी का इंतजार रहेगा

    1. Disha Avinash says:

      जय तुमने लेख को पढ़ा और सराहा,धन्यवाद

  7. विनय मिश्रा says:

    दिशा एक बार फिर शानदार लेखन

    1. Disha Avinash says:

      विनय तुमको आलेख ने प्रभावित किया तुमने प्रतिक्रिया लिखी बहुत धन्यवाद

  8. deepak sharma says:

    भगवान भीमाशँकर से साक्षातकार.. आप की आँखो से।

    1. Disha Avinash says:

      दीपक जी प्रतिक्रिया लिखने के लिए शुक्रिया

  9. Mahesh Chouksey says:

    भगवान शिव के छटवे दिव्यधाम भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग यात्रा वृतांत का अद्भुत वर्णन सराहनीय है । आपके शब्द विश्वआत्मा – परमात्मा की वैधुतिक ऊर्जा से झँकृत हैं ! वे महाकाल के भाल पर आगामी मन्वंतरों के अक्षर उकेर रहे हैं, वे मंत्राक्षर, बीजाक्षर है और इस ऊर्जा को संसार की कोई शक्ति अवरुद्ध नहीं कर सकती । आपके जैसा दार्शनिक, विचारक, चिंतक, साहित्यकार, व्याख्याता दुर्लभ है । जिसने अपनी तीछण किरणों से विश्व के अंधकार की छाती पर अपने सुनहरे हस्ताक्षर किए हैं । पुनः धन्यवाद आपका जो इस संक्षिप्त विवरण में आपने इतना कुछ कर दिखाया जिसकी तुलना शब्दों में असंभव है । शिव के दिव्य धामों की आगे की यात्रा व्रतांत के लिए प्रतीक्षारत…

    1. Disha Avinash says:

      महेश तुम्हारी हिन्दी इतनी अच्छी है यह मालूम नहीं था ,तुम लिख भी अच्छा लेते हो ,भोलेनाथ की हम सभी पर कृपा बनी रहे ,तुम भी तो ज्योतिर्लिंगों की यात्रा कर रहे हो उम्मीद करती हूँ द रोड डायरीज़ तुम्हारे सफ़र में मददगार साबित हो प्रतिक्रिया लिखने के लिए बहुत धन्यवाद

  10. Varsha says:

    दिशा तुम्हारी लेखनी सराहनीय हे.भिमाशंकर का बहुत बढिया वर्णन.

  11. Varsha says:

    Disha tumhari lekhni sarahniy he.bhimashankar jyotirling ka bahut hi achha varnan kiya he

    1. Varsha says:

      दिशा तुम्हारी लेखनी सराहनीय हे.भिमाशंकर का बहुत उम्दा वर्णन किया हे

      1. Disha Avinash says:

        वर्षा तुमने अपने तीन संदेशों में ब्लाग की जो प्रशंसा की है उसने दिल जीत लिया ,हमसे हमेशा जुड़े रहना और इतनी ही स्नेह वर्षा करते रहना धन्यवाद

  12. Shyam says:

    मेरी प्यारी माँ पता नहीं क्या जादू हे तेरे पेरो में जितना में झुकता हूँ उतना ऊपर जाता हूँ दीदी आप के लिऐ आपको प्रणाम करताँ हूँ। ऐसे ही लिखते रहिए ☺
    Shyam babu yadav

    1. Disha Avinash says:

      श्याम तुम्हारी धार्मिक प्रवृत्ति दर्शाती भावुकता भरी प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से धन्यवाद

  13. मयुरेश says:

    बहुत ही अच्छी जानकारी है. भीमाशंकर का महत्व ज्यादा से ज्यादा लोगों तक आपके इस ब्लॉग से पहुंच रहा है इसलिए धन्यवाद ???? फ़ोटो भी अच्छी है! || जय भीमाशंकर||
    मयुरेश रत्नाकर कोडिलकर ,भीमाशंकर मंदिर महाराष्ट्र

    1. Disha Avinash says:

      मयुरेश जी,अतिशय धन्यवाद,आपके सहयोग के बिना यह संभव नहीं था ,ईश्वर की कृपा हम सब पर बनी रहे जय श्री भीमाशंकर ?

  14. श्री राजेन्द्र कौशिके says:

    आपका ब्लाग पढ़ा ,आपकी जिह्वा पर माँ सरस्वती की कृपा है,आपकी लेखन शैली भाषा पर आपकी पकड़ और विषय की सटीक जानकारी ब्लाग को पठनीय बनाती है जिस प्रकार नमस्कार ,प्रणाम,नमस्कारम बोलने के प्रकार होते हैं उसी तरह आप संस्कृत निष्ठ हिन्दी के क्लिष्ट शब्दों का प्रयोग बहुत ही सरलता से कर लेतीं हैं जो आजकल कम दिखाई देता है ऐसे ही लिखते रहिए
    श्री राजेन्द्र कौशिके,वरिष्ठ उपाध्ये,घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर,महाराष्ट्र

    1. Disha Avinash says:

      आदरणीय राजेन्द्र जी,यह आपकी अति उदारता है ,हम तो निमित्त मात्र हैं आप जैसे गुणीजनों के ज्ञान को धर्मप्राण जनता तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं बस,आपका आर्शीवाद चाहिए।

  15. रत्नाकर रघुनाथ कोडिलकर says:

    अद्भुत,वर्णन भीमाशंकर जी के संबंध में सम्पूर्ण जानकारियाँ समेटे हुए,आपके शब्दों का चयन,फ़ोटोग्राफ़ी सभी उत्तम है ,जय श्री भीमाशंकर
    रत्नाकर रघुनाथ कोडिलकर
    वरिष्ठ उपाध्ये ,भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर महाराष्ट्र

    1. Disha Avinash says:

      रत्नाकर जी, आप जैसे सज्जन पुरोहित मिल गए ईश्वर की दया से ,इतनी सारी जानकारियाँ साझा कीं और आलेख पठनीय हो गया,ऐसे ही जुड़े रहिएगा
      अनेकानेक धन्यवाद

  16. Bhanu Mishra says:

    दिशा जी आपके द्वारा ब्लाग पर धार्मिक यात्राओं का सचित्र चित्रण वास्तव में इस विकसित संचार माध्यम सही उपयोग है। मैं आपका आभारी हू आपने ज्योर्तिलिंग यात्रा विवरण के साथ मंदिरों में होने वाली आरती पूजन के समय को भी शामिल किया ।

    1. Disha Avinash says:

      भानु जी आप की तो धार्मिक लेखन में अच्छी पकड़ है आपके द्वारा की गई प्रशंसा मेरे लिए मायने रखती है ,इस बार आरती की समय सारणी दी है विशेष रूप से आपके सुझाव को ध्यान में रखकर,अतिशय धन्यवाद

  17. pratishrut awasthy says:

    It make us proud to see that you are showing us our heritage and tradition,in todays world.Thank you for giving us oppurtunity to read our mother tongue after such long time.May God bless you.

    1. Disha Avinash says:

      प्रतिशुत तुम आस्ट्रेलिया में बैठकर शिव धामों की दिव्यता को ब्लाग के माध्यम से महसूस कर पा रहे हो मन प्रसन्न हो गया यही तो शाश्वत शिवस्थलों का महात्म्य है जय श्री भीमाशंकर?

  18. sagar says:

    नमस्कार मयुरेश मस्त माहिती आहे खुप सुंदर आहे.

    1. Disha Avinash says:

      सागर आपने भीमाशंकर जी के महात्म्य को रूचिकर बताया बहुत धन्यवाद

  19. Shilpa.gaur says:

    अद्भुत लेखन और बहुत सुंदर चित्रों द्वारा आपने भीमाशंकर धाम का दर्शन कराया।आपके ब्लॉग से हमे अपने देश के धार्मिक स्थलों के बारे में और अपनी संस्कृति की जानकारी प्राप्त होती है।आपकी लेखनी सराहनीय है जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है।आपके द्वारा हम लोगों ने भी साक्षात् दर्शन कर लिए ।आप का धन्यवाद ।

    1. Disha Avinash says:

      शिल्पा तुमने प्रतिक्रिया लिखी धन्यवाद,इसी तरह ब्लाग से जुड़कर द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन हो जाएँगें जो विदेश में रहकर संभव नहीं हैं

  20. Archana Tiwari says:

    Disha bahut badiya har bar ki tarah is bar bhi tumhari lekhani ne bahut prabhavit kiya tumhare dwara likhe gaye yatra vratant me tumhari mehnat najar aati hai jis tarah se tum ne bhimashanksr jyotirling ka varnan kiya uska itihas likha bhima nadi shani mandir ghante ke bare me jo bhi bataya us jankari tak mera pahuchna to sambhav hi nahi tha itni gud jankari dene ke liye bahut bahut dhanyawad next yatra ka intezaar rahega

    1. Disha Avinash says:

      अर्चना तुम्हारे पत्र से लगता है तुमने बहुत शान्ति के साथ बैठकर ब्लाग को पढ़ा फिर लिखा है बहुत धन्यवाद,मेरी कोशिश रहेगी हमेशा कि अपने पाठकों को सतही जानकारी न देकर बल्कि विषय को तफ़सील से प्रस्तुत करूँ ,तुम एेसे ही साथ में बने रहना।

  21. Rajendra kumar malviya says:

    बहुत ही सुंदर मानोहारी अमृतमय वर्णन हैं भगवान श्री भीमाशंकर जी का, अतुलयनीय, अकल्पनीय और एकदम अद्भुत शुखकारी एवं शुभंकर दर्शन..जय श्री भीमाशंकर जी…दीदी आपको द्वादश ज्योतिरलिंगो के समय समय पर इतने मानोहारी दर्शन और सजीव यात्रा कराने के लिये कोटी कोटी धन्यवाद..आशा हैं अाप हमे इसी तरह आगे भी बाकी सारे ज्योतिरलींगो के अमृतमय दर्शन और सजीव यात्रा कराती रहेंगी..

    1. Disha Avinash says:

      राजेन्द्र जी आपका प्रशंसा भरा विस्तारित पत्र पाकर दिल ख़ुश हो गया आप तो शुरू से रोड डायरीज़ परिवार का हिस्सा रहे हैं आगे भी जुड़े रहिएगा बहुत धन्यवाद

  22. Sandeep Gour says:

    Bahot sunder , adhbhut varnan, jai bheema shankar ji ki,,,,

    1. Disha Avinash says:

      संदीप तमाम व्यवधानों के बाद भी आप प्रतिक्रिया लिख पाए ह्रदय से धन्यवाद

  23. Suresh Awasthi says:

    दिशा , तुम एक श्रेष्ठ डायरी लेखिका हो। भगवान शंकर के तमाम ज्योतिर्लिंगों का भ्रमण तुम तो करती ही हो, हम भी घर बैठे आभासी यात्रा के माध्यम से उन पवित्र तीर्थस्थानों की यात्रा कर पूण्य सन्चय कर लेते हैं। तुम्हारा विवरण होता ही इतना सजीव और सुन्दर होता है। तुम्हारी दृष्टि और स्मृति भी बहुत सराहनीय है। पूरी यात्रा में छोटे छोटे से डिटेल्स भी तुम्हारी लेखनी की पकड़ में आने से बच नहीं पाते।
    बस भाषा थोड़ी और सरल एवं सुबोध हो तो मध्यप्रदेश के अलावा अन्य राज्यो के पाठक भी पूरा रस ले सकेंगे।
    चित्र भी अति सुंदर।
    पावन और सुन्दर यात्रा विवरण के लिए बधाई। लिखती रहो।

    1. Disha Avinash says:

      अवस्थी सर,आपकी प्रतिक्रिया मेरा मनोबल बढ़ाने वाली,विषय में और गहरे पैठने की समझ देने वाली है आपको फ़ोटोग्राफ़,डायरी की सूक्ष्म से सूक्ष्मतर वर्णन ने प्रभावित किया यह जानकर संतोष हुआ ,भाषा सरल करने का प्रयास जारी है धन्यवाद

  24. Santosh paithankar says:

    दिशा जी वेरूळ से संतोष पैठणकर
    नमस्कार .
    आपका भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के बारे में ब्लॉग पढा. ब्लॉग पढकर मैं अचंबभित हो गया आप के शब्दों की रचना मन को प्रसन्न कर देती है . आप का शब्द संकलन अद्वितीय है. भीमाशंकर के साथ राळेगणसिद्ध के बारे में पढकर और अच्छा लगा.
    भविष्य में पूरे भारतवर्ष के तीर्थों के बारे में आप ब्लॉग लिखें और तीर्थ क्षेत्र के प्रति लोगों की रुचि बढ़े यह मनोकामना घृष्णेश्वर महादेवजी के चरणों में रखकर अपनी छोटीसी प्रतिक्रिया संपन्न करता हूँ ….

    1. Disha Avinash says:

      पैठनकर जी आपके सहयोग के लिए बहुत सारा धन्यवाद,आपने ब्लाग को श्रेष्ठ बताकर प्रसन्नचित्त कर दिया,

  25. Vivekanand says:

    दिशा जी हर बार की तरह ही बहुत सुंदर विवरण प्रस्तुत किया है । पढ़ के लगता है वास्तव में हमने भी दर्शन और यात्रा का अनुभव कर लिया । धन्यवाद

    1. Disha Avinash says:

      विवेकानंद आपका सात समुन्दर पार से आध्यात्मिक यात्रा को पसंद करना हमें बेहद रास आता है धन्यवाद

  26. Yogesh joshi says:

    दिशाजी, आपका लेखन सुंदर है। लक्ष विनायक जैसे दुर्लक्षित मंदिर का आपने किया वर्णन अच्छा है। भीमाशंकर यात्रा आपने हमे घरबैठे करवायी मॅडम प्रत्येक विषयवस्तु पर आपकी संशोधन वृत्ती प्रसंशनिय है| तथा लेख सभी विषय को छुता है| आपको शुभ कामनाये।

    1. Disha Avinash says:

      योगेश जी अनेकानेक धन्यवाद,लक्ष्यविनायक गणपति जी की जानकारी आपको बेहतर लगी यह जानकर मन हर्षित है आप से निवेदन है पुजारी जी तक ब्लाग पहुँचा दें बड़ी मेहरबानी होगी,हमारी आध्यात्मिक यात्रा से जुड़े रहिए ,एलोरा के सम्बन्ध में आपका सुझाव मेरे ध्यान में है

  27. Shailesh Tripathi says:

    पुनः एक बार परपक्व लेखनी से निकले शब्दों में वर्णित भगवान भीमशंकर के यात्रा का आनंद लिये। जैसा कि पिछले वृतान्तों के बारे में कहा वैसा ही अनुभव इस बार भी हुआ। आपके भाषा शैली से वो रस टपकता है जो हम जैसे साहित्य प्रेमियों के अंतर्मन को सराबोर कर देता है। आप अपनी इसी भाषा का प्रयोग हमेशा जारी रखें।

    1. Disha Avinash says:

      ह्रदय से धन्यवाद,मनोबल बढ़ाने के लिए,हिन्दी के विद्वान जब भाषा के उचित प्रयोग की प्रशंसा करते हैं न तो मन बल्लियों उछलने लगता है ,हम संशय की स्थिति में रहते हैं कि कहीं साहित्त्यिक हिन्दी का अतिरेक हो गया तो ब्लाग पढ़ने वाले साथ न छोड़ दें पर आपने बनारस में बैठकर भाषा की मिठास का आनंद ले लिया तो हम समझते हैं कि हम सही दिशा में जा रहे हैं।

  28. संजय श्रीवास्तव says:

    दिशा जी जैसे ही आपके ब्लॉग पर दृष्टि डालता हूँ, नज़रें ठहर जाती हैं । इतने सुन्दर और मनोहारी चित्र,स्थल विशेष की विस्तृत जानकारी,सब कुछ प्रशंसनीय है और मन में लंबे समय तक उसकी स्मृतियाँ अंकित रहती हैं । भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग अपने आप में इतनी सारी विशेषताओं को समाहित किये है,पता नहीं था, परिचय कराने के लिए बहुत धन्यवाद। वृत्तांत में प्रयुक्त शब्दों एवं उदाहरणों का उपयोग सटीक है। बहुत शुभकामनाएं आपको।

    1. Disha Avinash says:

      बहुत धन्यवाद,तुम्हारे पत्र को पढ़ ही रही थी कि तुम्हारे साथ श्री महाकालेश्वर उज्जैन की फ़िल्म के लिए किए गए परिश्रम की यादें ताज़ा हो आईं,शब्दों का चयन ,फ़ोटोग्राफ़ी ने तुम्हें प्रभावित किया यह सब भोलेनाथ की दया का प्रतिफल है ।साथ रहना अभी सफ़र लम्बा है

  29. Ira mishra says:

    Aisi gahen aur vistrit vyakhya ek mushkil kaam, kintu apki lekhni ka pravaah prashansniya hai, ishver apko swasth rakhey yatra kertey rahiye……

    1. Disha Avinash says:

      अतिशय धन्यवाद,आप यात्रा के हर पड़ाव का आनंद ले रहीं हैं मन इसी से संतुष्ट हो गया ,आगे भी इसी प्रकार जुड़े रहिए बल्कि जो साथ आना चाहें मुसाफ़िर उन्हें भी यात्रा में शरीक कर लें सब साथ होंगे तो सफ़र आराम से तय हो जायेगा

  30. पूनम, इंदौर says:

    दिशा बेन,जय भोलेनाथ की।? बेन सबका पेले तो आपके खूब सारी बधाई दई दाँ भीमा शंकर यात्रा की। तमने वां पोंचने का रस्ता,होटल ,खानो सब बात न की खूब अच्छी जानकारी दई दी बेन।। सबसे जरुरी वां की पोराणिक,ऐतिहासिक ओर धार्मिक बातां खूब अच्छा सी बतई। वां को जनजीवन ,खेती सबका बारा में बतायो।शिव की महिमा को असि भाषा में बखान कियो बेन कि हम भी उकी दिव्य छाया में थोड़ी देर बेठी के उका सिमरन में खोई गया। तमारे यात्रा की घणी सारी बधई ओर बेन अगला पड़ाव को इंतजार रेहगो।जै भोलेनाथ!!!?
    पूनम,इंदौर

    1. Disha Avinash says:

      उज्जैन की धरती से मालवी भाषा की मिठास से पगी तुम्हारी पाती ने मन ख़ुश कर दिया इतने सालों बाद तमने कालेज दिनारी याद दिला दी, वसीच बोली,वसइच पूर्णिमा,जय महाकाल?

  31. NISHANT VYAS says:

    हर- हर महादेव
    भगवान श्री भीमाशंकर के दर्शन का सौभाग्य एक बार मुझे भी प्राप्त हो चुका है .संस्मरण पढ़कर पुनः उसी सौभाग्य की अनुभूति हुई.

    1. Disha Avinash says:

      निशान्त तुमने श्री भीमाशंकर स्थान की यात्रा की है तो तुम लेख और फ़ोटो से ज़्यादा बेहतर तरीक़े से स्वयं को जोड़ सकते हो प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

  32. Bahut hi adbhut Disha…………… Bahut hi adbhut yatra thi aisa lagta h jese hum tumhare saath hi h…. Bahut achha lagta h tumhari yatra ko padkr……….

  33. I really appreciate you god bless u dear u done such a beautiful job……… Its really very impressive .I would like to read more…….
    Ur emotions and feelings.always impressive ….keep it up ……I’m waiting for next one

    1. Disha Avinash says:

      कल्पना तुम्हारी दो प्रतिक्रियाओं में दिल से की गई तारीफ़ झलकती है ,तुम अभी सफ़र में साथ ही बने रहना सभी १२ दिव्य शिव धामों के दर्शन हमारे साथ ही करना।पत्र लिखने और उत्साह बढ़ाने के लिए दिल से शुक्रिया

  34. Ashok Tiwari says:

    हर लेख की तरह इसमें भी सर्वांगनीयता ,बधाई दिशा।शीर्षक से लगता था कि केवल मंदिर या अधीकाधिक उस तीर्थ का विवरण होगा,किन्तु रास्ते का सौंदर्य,स्थानों के सन्दर्भ,भूगर्भीय ज्ञान के साथ ही निसर्ग,रास्ते की सुविधा,असुविधा,पारंपरिक और पारस्परिक सौहार्द्र सब भी इसमें समाहित हैं।मंदिर की संरचना का ज़िक्र करते जहां दिशा के शब्दों में वास्तुविद या पुरातत्त्ववेत्ता समा जाता है वहीँ उसकी गाथा लिखते समय एक इतिहासकार या कथावाचक पौराणिक और ग्रंथो को संदर्भित करते समय एक विषय विशेषज्ञ शोधकर्ता।रोचक शैली,सुन्दर शब्द चयन और पाठक को जिज्ञासा में बांधे रखकर अंत तक पढ़ने को प्रेरित करती लेखन शैली ,ये सब दिशा की प्राचीन विशेषता हैं।प्राचीन इसलिए लिखा क्योंकि अचानक एक दशक तक उसके कलम मौन रहे और अब जब फिर चलने लगा तो उसी पुरानी भव्यता के साथ।सचमुच यात्रा वृतांत में क्या क्या शामिल होना चाहिए यह इस लेख को पढ़कर लगता है।शीर्षक तो मात्र एक लक्ष्य बिंदु होता और बराए नाम कितनी कहानियाँ पाठक को रूबरू होती हैं।बार अनिवारयीय रास्ते के ढाबों से लेकर रामा इंटर्नेसनल तक की सुख सुविधा और चटकारे दार भोजन भी शामिल है जो कहती है अरे यार पूजा पाठ,मंदिर देवाला,तीरथ बरत ,प्रकृति पुरातत्व ,सैर सपाटा किसी में भी मन नहीं लगता हो तो एक बार मराठी देसज खाने का आनंद लेने हे निकल पड़ो, भीमाशंकर की और।
    सुन्दर सुचना आगार का पट खोलने मेरी ढेर सारी बधाइयां।
    अशोक तिवारी
    संस्कृति सलाहकार, छत्तीसगढ़

    1. Disha Avinash says:

      अशोक जी आप कितना भावपूर्ण लिखते हैं शब्दों के पीछे के भाव मन के भीतर तक उतर जाते हैं पत्रकार दिशा को पुन:लेखन क्षेत्र में लाने ,मनोबल बढ़ाने ,लम्बे समय तक टिके रहने के लिए एेसी ही उत्साहवर्धक प्रतिक्रियाओं की आवश्यकता है यूँ ही जुड़े रहियेगा बहुत धन्यवाद

  35. पण्डित अखिलेश दीक्षित says:

    भगवान शिव के छटवे दिव्यधाम भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग यात्रा वृतांत का अद्भुत वर्णन सराहनीय है फ़ोटोग्राफ़ी बहुत उच्चस्तरीय है jai omkareshwar ji
    पण्डित अखिलेश दीक्षित
    वरिष्ठ पुरोहित ओंकारेश्वर ज्योतिलिंग,म.प्र

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम पण्डित जी आपको ब्लाग की सामग्री पठनीय लगी चित्र आकर्षक लगे यह जानकर मन प्रफुल्लित हो गया,अत्यन्त धन्यवाद

  36. ओ पी मिश्रा says:

    दिशा आपके ब्लाग को पढ़ा सही मायने में ब्लाग संस्कृति से मैं दूर रहता हूँ पर यह पहला जीवन का मेरा ब्लाग है जिससे मैं प्रभावित हुआ हूँ भाषा की दृष्टि से उत्तम,सामग्री के नज़रिए से उत्कृष्ट ,पठनीय,दैनिक भास्कर वाली दिशा की लेखनी याद आ गई मेरी शुभकामनाएँ
    ओ पी मिश्रा,वरिष्ठ पुरातत्व वेदत्ता,सलाहकार पर्यटन विभाग ,मध्यप्रदेश

    1. Disha Avinash says:

      मिश्रा जी ब्लाग परिवार में आपका स्वागत है आपने पठनयोग्य कह दिया आलेख को तो मन संतुष्ट हो गया इस बात से कि दिशा की दिशा एकदम सही है बहुत धन्यवाद

  37. Bhavana Newaskar says:

    दिशा. वाकई मे सही व उपयोगी जानकारी दी है

    1. Disha Avinash says:

      भावना तुम्हारा रोड डायरीज़ परिवार में स्वागत है ,तुमने दिल से प्रतिक्रिया लिखी है तुमने इसलिए दिल को भाई है धन्यवाद,जय श्री भीमाशंकर

  38. ऐसे वक़्त जब नोट तक जड़ हो गये और चलने की हैसियत खो बैठे,आप चल रही हैं दिशाजी क़ाबिले तारीफ़ है…
    भीमाशंकर की वादियों में मनोरम दृष्यविन्यास क्रम मानवविकास के दस्तावेज़ीकरण जैसे टंके हुए से नज़र आते हैं…रालेगणसिद्धि को संज्ञा रूप यहीं के जीवनसंस्कारों संग मिला…प्रकृति का रौद्ररूप पिछले वर्ष यहीं क़रीब एक गॉंव के सर से गुज़र गया था…..इस यात्रा वृतांत में बहुत कुछ ऐसा भी है अनकहा जो सुनने लायक है..बहुत कुछ ऐसा भी है अनलिखा जो पढ़ने लायक है… भीमाशंकर तक पहुँचने के लिए सीढीयॉं उतरते मलिनमन शिवमना हो उस अदृष्य शक्ति के समक्ष नत होता है जहॉं पग पग उतरते कुछ और ऊपर उठने का संताष मिलता है…रोडडायरी पढ़ते पढ़ते यात्रा को जीना अप्रतिम अनुभव है…सुन्दर भाषा और सहज प्रवाह सुखद है…कृपया सुन्दर सिलसिला बनाए रखें…

    1. Disha Avinash says:

      पद्म विलम्ब से लिखा लेकिन लिखा बहुत अच्छा,सधा हुआ,सफ़रनामे का करिश्मा ही एेसा होता है कि मोड़ दर मोड़ आप नये परिवेश से जुड़ते जाते हैं मेरी कोशिश यही रहती है कि मैं सब कुछ समेट लूँ तुम्हें लगता है कि मैं यह कार्य कर पा रही हूँ तो मुझे बेहद तसल्ली हुई इसी तरह साथ देते रहना,धन्यवाद

  39. Sapna gupta says:

    Adbhut warnan….Mazaa aa gaya padhkar……Kathin hindi ki wajah se kuch shabdon ka matlab Samajh nahin aaya……bahut badhiya Disha Aage badhte chalo…darshan karwate chalo..

    1. Disha Avinash says:

      सपना तुम्हें ब्लाग पसंद आया जानकर प्रसन्नता हुई,हिन्दी के जो शब्द कठिन लगे उन्हें साझा करो आगे भी हम सब मिलकर ज्योतिर्लिंगों की यात्रा और दर्शन का लाभ लेते रहेंगे भविष्य में भी इसी तरह जुड़कर अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराते रहना।

  40. पण्डित आनंद शंकर व्यास says:

    दिशा तुमने तो मुझे साक्षात् दर्शन करा दिए श्री भीमाशंकर जी के,अव्वल दर्जे का वर्णन ,पहले से ज़्यादा तराशा हुआ ,प्रकृति का सुन्दर चित्रण,खिल्लारी बैल,बार वाली चर्चा,वहाँ के पुजारियों से जो जानकारी हासिल की,शनि मंदिर डाकिनी-शाकिनी का उल्लेख सब कुछ अद्वितीय लगा ।१७ वें गणेश प्रधान क्षेत्र के दर्शन कराने के लिए भी तुम्हें बहुत धन्यवाद और आशीर्वाद

    पण्डित आनंद शंकर व्यास
    ज्योर्तिविद्,पंचांगकर्ता ,उज्जैन

    1. Disha Avinash says:

      अनेकानेक धन्यवाद,पण्डित जी,ये आपके आर्शीवाद और सदाशिव की भक्ति का परिणाम है।पिछली बार आपने प्रकृति चित्रण करने के लिए कहा था इसलिए इस बार पूरी लगन के साथ किया है आपने पूरी तन्मयता से आलेख को पढ़ा और उतनी ही शिद्दत से लिखा क्या कहूँ शब्द नहीं हैं ……

  41. Sangeeta Tripathi says:

    दिशा…
    बड़ा सराहनीय वर्णन एवं लेखन प्रस्तुति। इतना विस्तृत वर्णन तो हमें वहाँ जाकर भी नहीं मिलता । हम घर बैठे ही ज्योतिर्लिंगों की यात्रा कर रहे हैं।
    धन्यवाद……

    1. Disha Avinash says:

      संगीता तुम सही लिख रही हो घर बैठे द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन संभव हो पा रहे हैं यह मुझे और कुछ और नयापन लाने की ऊर्जा देता है ह्रदय से धन्यवाद

  42. brajeshrajputbhopal@gmail.com says:

    अद्भुत भाषा और सुंदर विवरण के साथ ऐसा यात्रा वृतांत लिखना मुश्किल काम है, इतना वैविध्यपूर्ण लिखा जाना अब तकरीबन ख़त्म सा हो गया है। दिशा आपका ये प्रयास बेहद सराहनीय है। एक ही वृतांत में रास्ते की बातें, सामाजिक विन्यास, पहनावा, ख़ानदान और भक्ति के साथ जिस पुरातत्व को भी आप साध रहीं है वो तारीफ के क़ाबिल है। लेख की लंबाई खटकती है। इसे कैसे कम किया जा सकता है ये देखना होगा। बडी होटल के अलावा दूसरे ठहरने के स्थान के बारे में बताओगी तो और उपयोगी होगा। अगले यात्रा वृतांत का बेसब्री से इंतजार है।

    1. Disha Avinash says:

      बहुत सारा धन्यवाद,तुम्हें लेख अच्छा लगा यह जानकर मुझे संतुष्टि हुई,तुम लेख छोटा करने के पक्षधर हो और हम सब कुछ समेट लेने के हामी।कुछ करेंगे ज़रूर,असल में लिखते समय कोई पक्ष छूट न जाए यही चिन्ता रहती है ,जैसे भीमाशंकर जी पर लिख रही थी तो सोचा अब वेरूल पर कब लिखना हो गणेश जी भी लिख ही लें वे शिव परिवार का हिस्सा हैं उन पर अलग से लिखूँगी फिर यात्रा वृत्तान्त कहाँ से शुरू करूँगी ,पर सुझाव अच्छा है होटलोंवाला भी सही है इस पर अमल करेंगे ,आगे भी जुड़े रहना

  43. Riya Malviya says:

    आपने हमें अपने माध्यम से भगवान शिव के छठवें ज्योतिर्लिंग भीमाशकंर के दर्शन करवाये हैं,उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद। हर बार की तरह इस बार भी वर्णन बहुत ही अच्छा किया हैं ।ईश्वर इसी तरह आपकी सारी यात्रा सफल करे।

    1. Disha Avinash says:

      रिया तुम्हारी प्रतिक्रिया इस बार विलम्ब से आई पर उसमें मेरे ब्लाग की तारीफ देखकर अच्छा लगा तुम यात्राओं का ऐसे ही आनंद लेती रहो,पत्र लिखती रहो

  44. Mridula Awasthi says:

    Bahut hi achcha varnan kiya..bheema shankar jane ki ikchha ho rahi hai hum sabki..mauka mila to jarur jayenge..filhaal tumhare madhyam se ghar baithe baithe humne bhi ghum liya hai..

    1. Disha Avinash says:

      मृदुला जी,आपकी प्रतिक्रिया से यह लग रहा है कि आप धार्मिक प्रवृत्ति की हैं आप यदि आलेख पसंद कर रहीं हैं और शिवधामों की यात्रा करना चाह रहीं हैं तो मन में यह विश्वास हो गया कि हम ठीकठाक काम कर रहे हैं इसी तरह जुड़े रहिएगा

  45. Neeta Deo harne says:

    Wa disha hamesha ki tarah bahut hi sundar aur sajiv varnan kiya hai.

    1. Disha Avinash says:

      नीता गुजरात की धरती से तुम श्री भीमाशंकर जी के दर्शन और वर्णन से प्रभावित हुई हो यह जानकर बेहद ख़ुशी मिली धन्यवाद

  46. Shailesh Pujari says:

    Hello Diana Hi,
    आप का सर्वप्रथम मै धन्यवाद देना चाहूँगा की आप दीर्घ कालीन मंदिरो को , सब के सामने और उन धार्मिक स्थलों का महत्व, सरल भाषा मे बता राहे हो।। ये बहुत अच्छी बात है कि आज कल की युवा पीढ़ी को अपने धर्म की पहचान हो और उसके प्रति अभिमान हो।

    श्री .शशिकांत पुजारी
    लक्ष विनायक गणपती मंदिर एल्लोरा।।।

    1. Disha Avinash says:

      आदरणीय पुजारी जी आपका प्रशंसा भरा पत्र मिला मेरी मेहनत सफल हो गई,आप गुणीजनों का स्नेह और आर्शीवाद मिलता रहे बस सारे उद्देश्य परिपूर्ण हो जाएँगे, धन्यवाद

  47. कमल दुबे says:

    भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग यात्रा वृतांत का अद्भुत वर्णन किया है पढकर बहुत अच्छा लगा

    1. Disha Avinash says:

      कमल जी प्रतिक्रिया लिखकर तारीफ करने के लिए ह्रदय से आभार

  48. Anil Sharma says:

    Disha Ji aap ka Bhimashankar Jyotirlinga par likha (BLOG) aalekh vaastava mai asmarniya hai. Aap ki vishesh lekhni ne Bhagwaan Bhimashankar ke vistaar poorvak vivran mai char chand laga diye. Sab se prashansniya baat ye hai ki aap ne sadak yaatra ka itna sajeev citran kiya hai ki padte waqhat aisa lag raha tha ki har chitra aankh ke samne se gujar raha hai. Aaj ke daur mai jaha hinglish ka jamana hai aise samay mai aisi lekni padte waqhat aaschraya bhi hota hai, par dil aur dimaag Jo santusti pradan karti hai wo akalpniya hai. Jab bhi kabhi bhagwan shankar ne bulaya tau yakinan mujhe darshan karney mai aap ka alekh jaroor yaad ayega jo Bhimashankar Bhagwan ke itihaas say paripurna hai. Aap ko ek baar phir badhai aur shubkamna ye sab aashirwaad sahit hai. Agle alekh ka intzaar rhehaga.

    1. Disha Avinash says:

      अनिल जी, ब्लाग की प्रशंसा करने और उसकी ब्योरेवार सकारात्मक विवेचना करने के लिए ह्रदय से धन्यवाद,आप श्री भीमाशंकर जी की यात्रा करें स्वार्गिक सुख की अनुभूति का आनंद लें अवश्य,बल्कि महाराष्ट्र के सभी ज्योर्तिलिंगों के दर्शन कर आइये

  49. Birendrakumarsingh says:

    आप का अगला नया ब्लाग भगवान भीमाशंकर पर पढ़कर मन अति प्रसन्न हुआ और उससे भी अधिक प्रसन्नता उस पर अपनी प्रतिक्रिया लिखते समय हो रही है क्योंकि क्योंकि प्रतिक्रिया लिखना तकनीकी रूप से बड़ा कठिन होता है ख़ास करके हम जैसे लोगों के जिनको कि इस तकनीक का कखग भी नहीँ पता ।परन्तु फिर भी आपका भगवान भीमा शंकर जो कि ज्योर्तिलिंग मे छठवे स्थान पर आते है के बारे बहुत सी ऐसी बातें पता चली जिनके बारे मे कम से कम मै तो पूरे विश्वास के साथ और बिना किसी संकोच के साथ कह सकता हूँ कि कम से कम मुझे तो भगवान भीमाशंकर के बारे मे बिल्कुल जानकारी नहीँ थी आपका ये आलेख पढ़कर आज मेरा ञान और बढ़ गया ।

    1. Disha Avinash says:

      वीरेन्द्र जी इतनी बाधाओं और तकनीकी विवशताओं के बावजूद भी आप जैसे पाठक ब्लाग के प्रति अपना लगाव बनाए रख पाते हैं ,प्रशंसा भी करते हैं यह प्रतिक्रियाएं ही तो मेरा
      उत्साह बढ़ाती हैं अतिशय धन्यवाद

  50. Prabhat Kumar Tiwari says:

    अद्भुत।
    बहुत ही सुंदर वर्णन।

    जय शिव।

    1. Disha Avinash says:

      प्रभात जी कानपुर से आपकी प्रतिक्रिया मिली धन्यवाद,श्री भीमाशंकर जी की कृपा हम सभी पर बनी रहे यही प्रार्थना है

  51. Smriti Tiwari says:

    Amazing.
    Unexpectedly live.

    May Lord Shiva bless you.

    1. Disha Avinash says:

      स्मृति जी आलेख की प्रशंसा के लिए ह्रदय से आभार

  52. पूरब त्रिवेदी says:

    दिशा जी,आपके आलेख की प्रस्तावना ही इतनी प्रभावित करती है कि पूरा लेख पढ़ने का मन करता है मैंने दो बार पढ़ा ,आपकी भाषा,विस्तृत वर्णन,गहराई से विषय में उतरने की उत्कंठा प्रभावित करती है मैं श्री सोमनाथ जी से प्रार्थना करता हूँ कि वे सदैव आपके कारज सिद्ध करें जय श्री सोमनाथ ?
    पूरब त्रिवेदी श्री सोमनाथ मंदिर,गुजरात

    1. Disha Avinash says:

      जय श्री सोमनाथ?बहुत-बहुत धन्यवाद,आप सभी की प्रतिक्रियाएँ ही तो मेरा मनोबल बढ़ाती हैं,आपसे अनुरोध है कि एेसे ही जुड़े रहिएगा

  53. Chitrendra Swarup Rajan says:

    दिशा जी आपकी लेखनी का तो मैं आपनी आकाशवाणी की नौकरी के समय से ही प्रशंसक रहा हूं .मुझे बेहद प्रसन्नता है की आप साहित्य और लेखन से.सतत जुड़ी हुई है .आपका लेख पढ़ा बेहद सार्थक और जानकारी से भरपूर है
    बधाई

    1. Disha Avinash says:

      राजन जी ,इतने वर्षों बाद आपका पत्र पाकर आनंद आ गया आकाशवाणी के सुनहरे रचनात्मक दिनों की यादें ताज़ा हो गईं बहुत -बहुत धन्यवाद,रचना की प्रशंसा के लिए ,एेसे ही जुड़े रहिएगा

  54. Preeti Tripathi says:

    Very nice information Disha!!!waiting for more such blogs….

    1. Disha Avinash says:

      प्रीती,मन प्रसन्न हो गया ,द रोड डायरीज़ परिवार में आपका स्वागत है ,ह्रदय से अभिनंदन

  55. गौरव विजय काण्णव says:

    Aapka Lakhani hua blog bhi padha har jotirlingoki tarah bhimashankar jotirligka varnan bhi bahot sundar kiya hai aapne

    1. Disha Avinash says:

      गौरव जी ,श्री त्र्यंबकेश्वर जी के दिव्य धाम से आर्शीवाद स्वरूप आपके प्रशंसा भरे पत्र के लिए धन्यवाद?

  56. Amit Sinha says:

    दिशा जी आपकी भाषा की प्रांजलता,शिव की भव्यता, नौवारी साडिया,रास्तों की महक, बैलगाडियों की रुनझुन के बीच…शिव की आध्यात्मिकता की तलाश, आप जैसे बिरले ही निवर्हण कर सकते हैं। साधुवाद। खूब लिक्खाड़ हैं आप।

    1. Disha Avinash says:

      अमित जी देश की राजधानी से प्रतिक्रिया भेज कर आपने पत्रकारिता के पुराने दिनों की यादें ताज़ा करा दीं ,बहुत धन्यवाद,ऐसे ही जुड़े रहिए

  57. देवेन्द्र दुबे says:

    Bhagwan shiv ki Kripa se aaserbad se he aase yatra ko aap logo tak pahucha PA rahi he bhagwan shiv sab par Kirpa kare
    देवेन्द्र दुबे

    1. Disha Avinash says:

      देवेन्द्र जी “द रोड डायरीज़ ” परिवार में आपका स्वागत है अतिशय धन्यवाद,प्रतिक्रिया लिखने के लिए ,शिव जी की कृपा से ही तो यह सब संभव हो पा रहा है

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