धाम, ज्योतिर्लिंग, सिद्ध तीर्थ, हरिहर क्षेत्र: श्री रामेश्वरम्

कन्या कुमारी मार्ग पर संजीवनी पर्वत क्षेत्र मारूड वाड़ वडैय और वडगम वडैय, बंगाल की खाड़ी, अरब समुद्र और हिन्द महासागर का संगम स्थल, विवेकानंदपुरम् के दर्शन
श्रद्धालुओं के उमड़ते सैलाव के उन्नाद को पीछे छोड़ हमने कन्याकुमारी की ओर रूख कर लिया। कोई 20 मिनट के सफर में सुरम्य वातावरण में धूप का उज्जवलन अखरने लगा था। समूचा समुद्र देह पर स्वानुभूत किया जा सकता था। गांव लगता था कहीं सहमकर बैठ गया है। सर्र-सर्र हवाएं आग की सासें भर लग रही थीं। शूचिन्द्रम और कन्या कुमारी मार्ग पर संजीवनी पर्वत क्षेत्र मारूड वाड़ वडैय (बड़ा पहाड़) और वडगम वडैय (छोटा पहाड़) दिखाई देते हैं। हम भारत के उस भूभाग की ओर अग्रसर थे जहां विशाल अथाह सागर संगम है जहां बंगाल की खाड़ी, अरब समुद्र और हिन्द महासागर की उत्ताल लहरें निरन्तर भारत माता के चरणों में अर्ध चढ़ाती हैं।

भारत के थल सीमान्त भूमि का प्रारम्भिक बिन्दु भी यही है अंत और आरम्भ का सापेक्ष दर्शन स्थल, कन्याकुमारी मंदिर, भद्र काली मंदिर, विवेकानंद धाम, तिरूवल्लुवर प्रतिमा
भारत के थल सीमान्त भूमि का प्रारम्भिक बिन्दु, अंत और आरम्भ का सापेक्ष दर्शन स्थल, कन्याकुमारी मंदिर, भद्र काली मंदिर, विवेकानंद धाम, तमिल संत तिरूवल्लुवर प्रतिमा

भारत के थल सीमान्त भूमि का प्रारम्भिक बिन्दु भी यही है। अभिप्राय यह कि अंत और आरम्भ का सापेक्ष दर्शन स्थल, सूर्योदय तथा सूर्यास्त और चन्द्रोदय एक ही स्थान पर, पूर्वी और पश्चिमी घाट का आलंभन, जहां होता हो उस स्थान की विलक्षणता तो अप्रतिम होगी ही। कुमारीपुरा (कैपकैमोरियन) द्वीप के नन्हें से गांव में विराट सागर द्वारा निष्पादित अनिल फूलों, सीपियों, शंखों और मोतियों के साथ-साथ हिन्द महासागर की नीलमणि, बंगाल की खाड़ी की किंचित श्वेतमणि तथा अरब सागर की मरकतकणि बालुओं के सम्मिश्रण के अधीर विक्रेताओं के बीच से निकलकर हम विवेकानंदपुरम् और श्री पादमण्डपम्, नाव पर आरूढ़ होकर पहुंच गये थे। धवल फेनिल लहरें एक दूसरे को ठेलती हुई तटबंधों से टकराकर गर्जना के साथ टूटती हुईं, छितराकर गीलापन पीछे छोड़ती हुईं, हमें यह सोचने को विवश करती हुई कि पानी देश का जीवन है, प्रत्येक व्यक्ति की लाचारी है कि एक पानी की छोटी धारा बने, प्रत्येक धारा की एक लाचारी है कि एक बड़ी धारा का अंग बने, बड़ी धारा की लाचारी है कि वह अनंत से मिले… और अनंत की भी लाचारी है कि वह हर प्रकाश से तपे बिंदु-बिंदु खींचे कभी भाप बने, भाप बन कर बादल बन जाए। पानी होने का अर्थ ही दूसरे के लिए होना है, वरिष्ठ साहित्यजीवी श्री विद्यानिवास मिश्र की लेखबद्ध पंक्तियां स्मरण हो आईं। इसी बोधि अथवा श्रीपाद शिला पर 1892 में भारत की आत्मा के दर्शनापेक्षी तरूण सन्यासी स्वामी विवेकानंद ने शाश्वत सत्य की दुंदुभि बजाई थी। 75 एकड़ में विस्तारित, एक करोड़ 18 लाख रू. की लागत से निर्मित, पुण्य विवेकानंद धाम में स्थापित स्वामी जी की विशाल कांस्य प्रतिमा, ओम ध्वज की ओर उन्मुख होती हुई, चरैवति-चरैवति का संदेश देती दिखायी दे रही थी। यहीं श्रीपादमण्डपम् में देवी कन्याकुमारी के श्री पादपद्य के दर्शनोपरान्त 133 फीट उंची, 7000 टन ग्रेनाइट शिलाखण्डों से निर्मित, संत तिरूवल्लूवर की विशालकाय प्रतिमा, ध्यानाकर्षण की विषयवस्तु बन गयी। विश्वबंधुत्व की भावना को प्रतिपादित करने वाले इस तमिल कवि ने लिखा है ‘‘विद्वजन प्रति देश नगर को माना करते हैं अपना ही’’ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः वाली भारतीय संस्कृति में मानवतावाद के पक्षधर तिरूवल्लुवर की तिरूक्कुरल कृति तमिल साहित्य की गौरव निधि रही है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

5 × 2 =

Comments

  1. Vinay says:

    शानदार लेख

    1. Disha Avinash says:

      विनय, लेख की तारीफ करने के लिए बहुत धन्यवाद

  2. Mahendra says:

    आपकी आध्यात्मिक रामेश्वरम यात्रा का यह रोचक अंक आरंभ से अंत तक मन को यथार्थ यात्रा की और खीच ले जाता है। धन्यवाद

    1. Disha Avinash says:

      महेन्द्र, आलेख को रूचिकर बताने के लिए ढेर सारा धन्यवाद

  3. Arcana tiwari says:

    दिशा भोपाल से हैदराबाद नागरकोइल कन्याकुमारी रामेश्वरम के मार्गों का स्थान विशेष का महत्व बताते हुए जो विवरण तुमने दिया है वह इस यात्रा को और भी खास बनादेता हैनागरकोइल का मंदिर कन्याकुमारी शुचिन्द्रम मीनाक्षी मंदिर तथा शिवधाम रामेश्वरम के मंदिरों की स्थापत्य कला की जो गूढ़ जानकारी तुमने जुटाई है वह अलौकिक है इस रोड डायरीज का एक एक शब्द तुम्हारी मेहनत को प्रदर्शित करता है या पावन यात्रा में शाब्दिक एवं मानसिक सहयात्री बनाने के लिए तुम्हे बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Disha Avinash says:

      अर्चना, तुमने मन लगाकर पढ़ा तुम्हें आलेख बहुत अच्छा लगा, सारे बिन्दुओं को तुमने रूचि लेकर पढ़ा यह जानकर मुझे बेहद संतुष्टि मिली, ह्रदय से धन्यवाद

  4. Rahul says:

    Bhut khub or mn ko shanti dene vala lekh h aisa lgta h jese mene khud darshan labh apni aankho se lia ho

    1. Disha Avinash says:

      राहुल, ब्लाग को बेहतर बताने के लिए बहुत धन्यवाद


  5. दिशा जी अपने जो यात्रा का विवरण जो दर्शाया है एवं कन्याकुमारी रामेश्वरम के मार्गों का स्थान विशेष का महत्व बताते हुए जो विवरण तुमने दिया है वह इस यात्रा को और भी खास बनादेता है और शिव मंदिर एवं देवी मंदिरों का विवरण दिया है| आत्मिक रूप से ऐसा लगता है की मानो दर्शन आत्मिक रूप से कर लिए हो| और भगवान शंकर जी की कृपा आप पर बनी रहे इसी आशा के साथ आपकी अगली लेखनी का इंतजार रहेगा |
    || जय शिव शंकर ||
    || जय माँ नर्मदे ||

    1. Disha Avinash says:

      कमल जी आपका पूरा परिवार मेरा ब्लाग पढ़ता भी है और जवाब भी लिखता है बहुत अच्छे संस्कार दिये हैं आपने अपने बच्चों को ,आपको बहुत धन्यवाद आपने शिद्दत के साथ पढ़कर पत्र लिखा है

  6. jay dubey says:

    आपकी यात्रा का विवरण पढ़कर अत्यंत खुशी हुई एवं ऐसा लगा की शिव मंदिर एवं देवी मंदिर के दर्शन आत्मिक रूप से कर लिए हो इसी आशा के साथ अगली लेखनी का इंतजार रहेगा |

    || हर हर महादेव ||
    || नमामि देवी नर्मदे ||

    1. Disha Avinash says:

      जय ,तुम्हारे जैसे युवा लोग ब्लाग से जुड़ते हैं तो बहुत ख़ुशी मिलती है ,मन लगा कर पढ़ना और फिर समय निकालकर अपने माँ पिता को दक्षिण के मंदिरों की यात्रा कराना

  7. ANKITA DUBEY says:

    यात्रा का उल्लेख अत्यधिक रोचक है मानो ऐसा लगता है की सारे दृश्य हमारी दृष्टि के सामने हो हिमालय राज की पुत्री माता पर्वती अर्थात् देवी कन्याकुमारी के प्राकट्य के बारे में बताया तथा इसमे बाणासुर वध की कथा का उल्लेख किया गया है देवी के ३३ वे शक्ति पीठ शूलधारिणी देवी के मंदिर का रोचक विवरण अपने अपनी लेखनी के माध्यम से किया तथा आदि अनादी भगवान शिव जो रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थित है जिसका वर्णन अत्यंत रोचक है साथ ही साथ देवी मीनाक्षी मंदिर तथा स्थापत्य कला और भगवान नटराज की प्रतिमा का वर्णन बहुत ही सुन्दर है , ऐसा लग रहा रहा है हम भी आपकी यात्रा में शामिल है…. आपके अगले ज्योतिर्लिंग की यात्रा की प्रतीक्षा रहेगी …….

    1. Disha Avinash says:

      अंकिता बिटिया ,तुम ने पूरा पढ़ा ,मन लगाकर पढ़ा और उतनी ही गहराई से पत्र भी लिखा दक्षिण के मंदिरों की अनुभूति तुम तक शब्दों के ज़रिए सही मायने में पहुँची है स्नेहमयी धन्यवाद ?

  8. सुनील कुमार says:

    अति सुन्दर व अति विस्तृत वर्णन।
    जानकारियों से परिपूर्ण।
    बधाई! मैम।
    सुनील कुमार,देवघर,झारखण्ड

    1. Disha Avinash says:

      सुनील जी, आपको वर्णन प्रशंसायेग्य लगा यह जानकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई, धन्यवाद

  9. श्री अरूणाचलम says:

    श्री मीनाक्षी ,नागराज,और रामेश्वरम वाला पढ़ा मैंने, बहुत सुंधर
    श्री अरूणाचलम भोपाल

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम पण्डित जी, आपके सहयोग के बिना तो हम लिख भी नहीं पाते इसलिए आपको बहुत धन्यवाद, आलेख की प्रशंसा करने के लिए आभार

  10. रोली कंचन says:

    बहुत विस्तार पूर्वक अति सुंदर विश्लेषण
    रोली कंचन बड़ौदा

    1. Disha Avinash says:

      रोली दी, किन शब्दों में आपका धन्यवाद करूँ, आपकी वजह से ही भूगोल को गहराई से समझ पा रही हूँ

  11. सीमा साकल्ले says:

    Pura pada?Badiya kitne jyotirling ho gaye
    सीमा साकल्ले

    1. Disha Avinash says:

      सीमा तुमने पढ़ा और सराहा, धन्यवाद

  12. दर्शन पाठक ,औंढा says:

    आपने बहुत विस्तृत वर्णन लिखा है लेकिन लिखा व्यापक विश्लेषण के उपरान्त,श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के बारे में श्री दशपुतरे जी से जानकारी लेकर आपने विधि विधानों की अच्छी जानकारी दी है यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी रहेंगी,तीर्थों और धाम के संबंध में इससे ज़्यादा ज्ञानवर्धक जानकारी मिलना संभव नहीं है आपके प्रयासों की जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है ,मीनाक्षी मंदिर ,कन्याकुमारी जी,और नारायणी जी के बारे में भी पढ़कर अच्छा लगा ,एेसे ही लिखते रहिए , श्री नागेश्वर जी की आप पर कृपा बनी रहे

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम आपने बिलकुल सही लिखा है भाषा के अवरोध के कारण दक्षिण के मंदिरों के बारे में बहुत लोगों को जानकारी नहीं मिल पातीं दूसर पंडा जी जैसे मर्मज्ञ नहीं मिल पाते तो जो ज्ञान मिलता भी है वह आधा अधूरा ,मैं आने वाली पीढ़ी को ध्यान में रखकर ही लिख रही हूँ इसीलिए यह ब्लाग हिन्दी अंग्रेज़ी दोनों में है आपको मीनाक्षी और नारायणी अम्मन मंदिरों ने भी प्रभावित किया है ,यह जानकर अच्छा लगा बहुत धन्यवाद,जय श्री नागेश्वर

  13. रवीन्द्र दशपुतरे पंडा जी रामेश्वरम धाम says:

    हमने स्थल पुराण से जो भी आपको बताया आपने सही लिखा है,तीर्थ धाम,सिद्ध भूमि के बारे में भी एकदम स्थल पुराण माफ़िक़ लिखा है,आपके लिखने से नार्थ वाले भक्तों को लाभ होगा जो भाषा की दिक़्क़त के कारण तीर्थों की कहानी नहीं जान पाते अभी उनको मदद मिलेगी
    जय रामेश्वरम

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम पंडित जी
      जय रामेश्वरम ,आपके सहयोग के बिना पंडित जी मेरे लिए आलेख लिख पाना असंभव था ,भाषायी व्यवधानों को आपके माध्यम से दूर कर जो ज्ञानार्जन और लेखन कार्य मैं कर पाई उसके लिए मैं ह्रदय से आपकी आभारी हूँ ,स्थल पुराण की मदद से आपने अनजाने सत्य को हम सभी के सामने ला दिया वाक़ई आप ने तमिल की कई किताबों को समझने बांचने में मेरा भरपूर सहयोग किया

  14. राजेश दीक्षित says:

    अद्भुत,मैं हैरान हूँ आपने बहुत ही सुन्दर लिखा ,इसमें बहुत सी जानकारियाँ तो मुझे भी नहीं थीं विशेषकर रामेश्वरम के तीर्थों के संबंध में ,मीनाक्षी मंदिर मैं गया हूँ पर यह एक शक्तिपीठ है जानकारी नहीं थी ,रामेश्वरम के बारे में पंडा जी के सहयोग से जो आपने जानकारी दी है वह तो कहीं किसी किताब में भी नहीं मिलेगी आप जो काम कर रही हैं वह अपने आप में अनूठा है मैं जानता हूँ इसमें बहुत परिश्रम करना पड़ता है पर आगे की पीढ़ी के लिए यह कारगर सिद्ध होगा

    1. Disha Avinash says:

      राजेश जी ,आप से तो हमेशा से ही मैं प्रेरणा लेती रही हूँ आपको आलेख ने संतुष्ट किया है तो मुझे तसल्ली है इस बात की कि मैं सही दिशा में जा रही हूँ अपनी लेखनी के साथ न्याय कर पा रही हूँ ,पंडा जी से बहुत से अनछुए पहलुओं पर बात हुई पर सबको ब्लाग में समेट पाना मुश्किल है कुछ बातों को अब किताब में देंगें एेसा सोचा है।

      1. राजेश दीक्षित says:

        सार सूष्टु मितं मधु

  15. O P Mishra says:

    I have read the road dairies. Seriously this is a unique opportunity to work with the references. Then one can have an idea of the dwadas jyotirliga. North Indian speaking person will like, when they visit rameshwar, dwarika, traimbkeshwar, etc. Places. Once I would request you to bring the complete work after Ujjaini, omkareswar and other remaining like Nepal.. Many thanks for the first project in indology. I will update you after the study all valuable road dairies of south India rameshwar jyotirliga. Der se but informative and historical good monumental study. Thanks for your afford to make long road journey. You have cover the forest, rivers, religious, rituals, nagraj importance, you have study the south Indian temple architecture and sculptures. Mythology also you have study through the local community and pundits, heritage hotels, restaurants and the food quality. Once again thank you very much.

    1. Disha Avinash says:

      सर आपके आत्मीयता भरे पत्र को पाकर मन प्रफुल्लित हो गया ,आप जैसे पुरातत्व वेदत्ता आलेख को हर पहलु से सही पाते हों तो मुझे बेहद संतुष्टि मिलती है ,आपने हर बार मेरा उत्साहवर्धन किया है ,बहुत कुछ सीखने को मिला है आपसे ,यह क्रम आज भी जारी है विस्तार ज़रूर हुआ है पर आप भी इससे सहमत होंगे कि दक्षिण के मंदिरों के विराट स्वरूप को छोटे दायरे में समेट पाना मुश्किल था आपने कितना रस लेकर एकोएक बिन्दु पर ग़ौर किया है आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहती है इसलिए भी कि मंदिरों की शैली ,पुरातात्विक महत्व को आप से अच्छा कौन जान सकता हैअनेकानेक धन्यवाद ,एेसे ही प्रोत्साहित करते रहिए लक्ष्य आसान होता जाएगा ?

  16. देवेन्द्र दुबे says:

    Aap ka rameshwaram barnan padke swayam jake aa gaya hoo aasa anubhab hota he bhagban aap par krapa kare jay sankar jay shri ram
    देवेन्द्र दुबे

    1. Disha Avinash says:

      दुबे जी ,प्रणाम आप दक्षिण के मंदिरों के सौन्दर्य और शिल्प के साथ सात्विकता से प्रभावित हुए बगैर नहीं रह पाए्ंगे आप ज़रूर जाइए और लौटकर बताइये भी कि आपकी यात्रा कैसी रही ,बहुत धन्यवाद

  17. एक यात्रा का समापन ही दूसरी यात्रा का समारम्भ है। ..कितना सही कहा है आपने . मैं जानता हूँ कि लिखने से पहले काफी पढ़ना भी पढ़ता है .आपके लेख को देख कर मैं अंदाजा लगा सकता हूँ इसके पीछे कितनी मेहनत की गयी है . शब्दों का चयन और व्याकरण पर व्यापक पकड़ ने इस लेख को विशिष्ठ दर्जे पर ला दिया है . लेकिन लेख काफी लम्बा हो गया है जिससे तर्मयता टूट जाती है . इसी को आप एक से अधिक भागों में लिख सकते थे . बाकि जो है सो है ..जय भोले नाथ की …………
    https://nareshsehgal.blogspot.in/

    1. Disha Avinash says:

      नरेश जी ,धन्यवाद आलेख की विशिष्टता के विश्लेषण के लिए ,भाषा आपको उपयुक्त लगी यह भी अच्छा लगा पर लम्बाई ने कष्ट दिया,असल में यह विषय ही इतना व्यापक था कि मन नहीं मान रहा था और क़लम थमने का नाम ही नहीं ले रही थी पता नहीं टुकड़ों में देने से लोग उससे स्वयं को जोड़ पाते या नहीं …..
      ख़ैर आप ने पत्र लिखा धन्यवाद ,जय भोले नाथ

  18. मृदुला अवस्थी says:

    हमने तुम्हारे ब्लाग के ज़रिए दक्षिण के मंदिरों की यात्रा कर ली ,बहुत आनंद आया ,वहाँ के देवी मंदिरों के बारे में नहीं पता था वह भी मालूम पड़ा ,मंदिर के शिल्प और पूजा वग़ैरह के बारे में भी बहुत बढ़िया जानकारी मिली ,अब हम भी जाएँगे
    मृदुला अवस्थी
    होशंगाबाद

    1. Disha Avinash says:

      मृदुला जी ,आपको ब्लाग ने यात्रा पर जाने के लिए प्रेरित किया तो मेरा उद्देश्य पूरा हुआ ,देखकर आइए

  19. बी एम राम says:

    आपकी रोड डायरी रामेश्वरम धाम की सुरम्य और ढेर सारी माहिती का ख़ज़ाना है,भोपाल,नागरकोइल,कन्याकुमारी ,भद्रकाली ,विवेकानंद धाम,संत तिरुवल्लूवर आदि स्थानों की सूक्ष्म और सुन्दर जानकारी पढ़कर मन तृप्त होता है प्राकृतिक,सामाजिक,सांस्कृतिक परिवेश से भरी भरी रामेश्वरम तक विस्तारित है तब तक जब तक कि पढ़ने वाला शिव स्वरूप हो जाता है ,बहन जी मुझे तो यह रोड डायरी से ज़्यादा शिव डायरी लग रही है ,शिव को केन्द्र में रखकर आप विभिन्न स्थानों की यात्रा शब्दश: करतीं हैं ।एक बात और मुझे आपकी पानी की लाचारी ……पानी होने का अर्थ ही दूसरे के लिए होना है वाली बात बहुत अच्छी लगी ।
    आपकी यात्रा निरंतर चलती रहेऔर शिव कृपा आप पर बनी रहे एेसी अभ्यर्थना है

    || जय रामेश्वर महादेव ||

    बी एम राम,जूनागढ़.

    1. Disha Avinash says:

      राम जी आपकी प्रतिक्रिया बहुत अच्छी लगी ,आपने हिन्दी में लिखा पत्र यह और भी अच्छा लगा ,शिव डायरी नाम बढ़िया है ,आपने कितनी तन्मयता के साथ पढ़ा है यह पत्र इस बात की गवाही दे रहा है ,आप लोगों की शुभ कामनाएँ ही मुझे अच्छा लिखने को प्रेरित करतीं हैं बहुत धन्यवाद

  20. अदभुत!आपने जो लिखा है न उससे स्थान का महत्व सही मायनों में पता चलता है हम जो स्नान कर रहे हैं या हम किस आगम पद्धति से पूजा कर रहे हैं या फिर रामेश्वरम धाम और काशी यात्रा का क्या जुड़ाव है यह ब्लाग पढ़ने से ही पता चलता है नागरकोइल ,कन्याकुमारी और नारायणी देवी के बारे में भी बहुत सी जानकारियाँ पहली बार प्रकाश में आईं ,हमारी आने वाली पीढ़ी के कौन यह सब बतायेगा बल्कि हम लोग भी जो कर रहे हैं कितना सही है या ग़लत यह भी आपके ब्लाग से पढ़कर जाना जा सकता है,धार्मिक जानकारियों की इतनी प्रभावी प्रस्तुति देखकर मैं तो बहुत ही उत्साहित हूँ कि चलो अपने जानने वालों में से ही कोई यह नेक काम कर रहा है।

    1. Disha Avinash says:

      दीपक जी आपने अपने पत्रों में ब्लाग की प्रशंसा की ,नयी पीढ़ी के लिए इसमें दी सामग्री को उपयोगी बताया,भाषा को सराहा ,दक्षिण के शिल्प शास्त्र और पूजा विधान में दिलचस्पी ली ,और आख़िर में इसे किताब की शक्ल में निकालने का सुझाव भी दिया बहुत धन्यवाद ,दो पत्रों के लिए ढेर सारा धन्यवाद ।

  21. अदभूत यात्रा विश्लेषण
    समस्त ज्योतिर्लिंगों के दर्शन आपकी शब्द यात्रा द्वारा
    साथ ही अन्य तीर्थों का भी दर्शन लाभ
    ऐसा लगा मानो आपके शव्दो द्वारा सभी कुण्डों स्नान कर लिया

  22. पंडित पंकज द्विवेदी says:

    आपके आलेख की जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है ,बहुत ही परिश्रम से लिखा गया लेख ,सविस्तार विधि विधानों की चर्चा,पढ़कर बहुत सी नयी जानकारी मिलीं ,शक्तिपीठों और शिव धाम का विस्तृत वर्णन पढ़कर वहाँ जाने का कार्यक्रम बना लिया है
    जय माँ विंध्यवासिनी, पंडित पंकज द्विवेदी

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम,आपने आलेख की तारीफ कर मुझे संतुष्ट कर दिया ,आप अवश्य जाएें दक्षिण के शक्तिपीठों और रामेश्वरम हरिहर क्षेत्र की यात्रा में रोड डायरी आपकी कितनी सहायक सिद्ध हुई यह अवश्य बताइएगा, जय माँ विंध्यवासिनी बहुत धन्यवाद?

  23. अमर उपाध्याय says:

    आपका आलेख बहुत बढ़िया है फ़ोटोग्राफ़ भी उच्चस्तरीय हैं ठाकुर जी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे धार्मिक स्थलों के संबंध में आप जो जानकारियाँ तीर्थ पुरोहितों और विद्वानों से एकत्र कर लोगों तक पहुँचा रहीं हैं वह अति उत्तम सेवा है श्री द्वारकाधीश आपके मनोरथ सिद्ध करें आपकी यात्रा सफल करें
    अमर उपाध्याय ,द्वारका

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम, आप सभी तीर्थ पुरोहितों के आर्शीवाद के कारण ही हम यह कार्य कर पा रहे हैं जय द्वारिकाधीश, बहुत धन्यवाद ?

  24. पं अखिलेश दीक्षित says:

    बहुत अच्छा दिशा जी ,प्रस्तुतीकरण भी बढ़िया है आपने द्रविड़ और आर्य संस्कृति के समन्वय की बड़ी सुन्दर व्याख्या की है,भाषा और व्याकरण की दृष्टि से भी बढ़िया है ,जय श्री ओंकारेश्वर
    पं अखिलेश दीक्षित

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम ,बहुत धन्यवाद ,आपको प्रस्तुति ने प्रभावित किया यह जानकर प्रसन्नता हुई जय ओंकारेश्वर ?

  25. Kalpana says:

    Bohot badiya Disha.
    Tunhari adbhut yatra ka sundar chitran sunkr bohot aanand aata hai..
    Tum bohot hi achha chitran krti ho tumhari yatra Ka varnan padkr aisa lagta hai ki hum khud hi is yatra ko kr rhe hai.

    1. Disha Avinash says:

      कल्पना ,तुमने ब्लाग पढ़कर प्रतिक्रिया लिखी दिल से बहुत अच्छा लगा,इसी तरह जुड़े रहना और अपनी राय भी बताते रहना ?

  26. Amit sinha says:

    आपका सफरनामा गजब है। आप इतना सारा लिखती हैं और हम इत्तु से में सब कह दें। आप तो जब भी सफर करती हैं अपने साथ साथ हमें तो ले ही चलती हैं.. साथ चलते हैं… गाछ, पेड़, नदिया, नाले, गांव के राजवैद नीम, आम, सुपारी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा… धान की सुनहरी ढेरियां आपको लुभाती हैं। आपकी अनंत कीगाथा… लाजवाब है…
    आप जिस प्रकार हमें दक्षिण के शिवाध्यात्म से अवगत कराती हैं वह हरेक नहीं करा सकता। अनेक नयी जानकारियों से ओतप्रोत है… कथाओं की बारिकियां…. शब्दों की सटीकता… आपको नमन करने का मन कर रहा है।यह आलेख सजीव चित्रण से और भी अद्भुत बन गया है।
    आपको इस यात्रा पर मुझे ले चलने के लिए आभार।

    1. Disha Avinash says:

      अमित जी ,पत्रकारिता के दिन याद दिला दिएे ,जब हम सभी मिलकर विभिन्न विषयों पर तफ़सील ये चर्चा करते थे ,दिल्ली के फ़ीचर लेखन वाले दिन ….और फिर जो आलेख मुक्कमिल शक्ल अख़्तियार करता था बस वैसा ही कुछ करने की कोशिश की है मेहनत आपको रंग लाती दिख रही है यह जानकर बहुत तसल्ली हुई शब्दों का चयन आपको पसंद आया यह भी अच्छा लगा इसी तरह हौसला बढ़ाते रहिए बहुत धन्यवाद

  27. Suresh Awasthi says:

    दिशा रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की तुम्हारी यात्रा का विवरण अद्भुत है। तुम्हारी दृष्टि और सोच को सलाम इतनी लंबी यात्रा का विवरण इतनी सहज एयर सरल शैली में प्रस्तुत करना केवल तुम्हारे ही बूते की बात है। मार्ग में पड़ने वाले सभी राज्यों, वन प्रांतरो ,पर्वत शृंखलाओं, हरीतिमा, वनवासी, उनके जीवन और संस्कृति से जुड़ी हर वस्तु का इस ब्लॉग में सटीक परिचय मिलता है।
    मंदिरों का इतिहास, पूजा पाठ और उनके पुजारियों की कार्यविधि का भी बोध कराता है यह सुंदर आलेख।
    तुमने मदुरै के बहाने अपनी माता श्री को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उनको नमन।
    सच ही कहा है तुमने कि जहां काशी के दर्शन और यात्रा से मरणोपरांत मुक्ति मिलती है रामेश्वरम के दर्शन मात्र से ही मुक्ति मिल जाती है।
    बहुत ही सुंदर है यह ब्लॉग। बधाई और साधुवाद।

    1. Disha Avinash says:

      सर,यह मेरे लिए सिर्फ़ प्रतिक्रिया नहीं है आपका आर्शीवाद है ,सुबह की ताज़ी हवा का झोंका है आपने ब्लाग पढ़कर पत्र लिखा यह भी मेरे लिए चौंकाने वाली बात थी ,माँ की बात लिखकर तो आपने द्रवित ही कर दिया ,सर आपके निर्देशन में काम सीखने के कारण ही तो हम दृश्यपरक लेखन कर पाए हैं ,किन शब्दों में आपको धन्यवाद कहूँ बस एेसे ही स्नेहवर्षा करते रहिएगा ,अतिशय धन्यवाद ,दिल्ली में अपने व्यस्त रचनात्मक जीवन से आप मेरे लिए कुछ समय निकाल पाए ?

  28. भानू मिश्रा says:

    विस्तृत शोध विषयक की प्रस्तुती, शब्दों के बन्धन ने इस ब्लॉग की उपयोगिता को नामानुसार सिद्ध किया है। भानू मिश्रा ,वाराणसी

    1. Disha Avinash says:

      भानू जी ,बनारस से आई आपकी प्रतिक्रिया में आलेख की सराहना और शब्दों के चयन वाली बात बहुत ही अच्छी लगी आप ने भक्तिरस में डूबकर आलेख पढ़ा ,बहुत धन्यवाद

  29. Sandeep gour says:

    आपने अपने ब्लॉग के द्वारा सच्चिदानंद शिव और महाविष्णु के हरिहर क्षेत्र और ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग श्री रामेश्वरम शाश्वत धाम ,शक्तिपीठ श्री कन्याकुमारी देवी,श्री मीनाक्षी देवी ,श्री मुन्न उदिता नांन्गई देवी ,नागदेवता के दिव्य स्थान नागरकोईल और शूचिन्द्रम के दर्शन करने का अवसर दिया,,,
    बहुत प्रशंसनीय एवं धन्यवाद,,,

    1. Disha Avinash says:

      संदीप ,बहुत धन्यवाद,रूचि लेकर ब्लाग पढ़ने और प्रशंसा करने के लिए ,आप ब्लाग से शुरूआत से ही जुड़े हैं और हमेशा अपनी राय से अवगत भी कराते रहते हैं यह बात भली लगती है।

  30. Mahesh Chouksey says:

    जिस तरह अच्छा संगीत वातावरण में उर्जा भर देता है ! अनुप्राणित कर देता है ! उसी तरह आपके द्वारा लिखित यात्रा वृतांत का वर्णन एवं आपके द्वारा लिखित शब्द शांत मन को प्रफुल्ल एवं आनंदित कर उत्सव मनाते हुए से प्रतीत होते हैं ! जो व्यक्ति की चेतना पर दस्तक देकर महाविराट में महत् में ले जाते हैं ! जो निराशा की निशा की मूकता को प्रथम कलरव का नवल स्वर प्रदान करते हैं ! तिमिर में अनजान खोई मनुजता को नया लोचन एवं नई पहचान देते हैं ! जीवन एवं स्वयं के अस्तित्व से संबंधित मूल प्रश्नों को स्पर्श करना एक लंबी यात्रा के बाद ही संभव हो पाता है ! जिस घड़ी आपके कदम यात्रा पर बढ़ते हैं वही प्रकाश परिपूर्ण सुबह है ! आपकी शिव की तरफ यात्रा तमिस्रा के क्षणों का अंत करके ज्योति के अरुणा में क्षण प्रकट करती है ! जिससे हम शिवमय हो जाते हैं ! पुनः धन्यवाद आपका इतना सुंदर व्रतांत हम से सांझा करने के लिए आगे के यात्रा वृतांत के लिए प्रतीक्षारत !!

    1. Disha Avinash says:

      महेश, तुमने तो बहुत ही अच्छी व्याख्या की है शिवमय होकर तुमने आलेख को रूच -रूच कर पढ़ा ,शिवासक्त होकर प्रतिक्रिया लिखी ,सभी पक्षों को आत्मसात करते हुए हरिहर क्षेत्र के महात्म्य को पूर्णरूपेण समझा,मुझे बेहद ख़ुशी हुई ,दिल से धन्यवाद ,एेसे ही लिखते रहना ।

  31. Vivekanand Gaur says:

    इतना सुंदर वर्णन, बहुत मनभावन, और इतनी अनूठी हिंदी भाषा में .. अतिविशेष!!

    1. Disha Avinash says:

      विवेक जी ,सात समन्दर पार से हिन्दी की प्रशंसा पढ़कर मन संतृप्त हो गया ,बहुत अच्छा लगता है जब आप अपने व्यस्त समय में से कुछ वक़्त रचनात्मक कार्यों के लिए भी निकाल पाते हैं ह्रदय से आभार

  32. Shilpa.gaur says:

    बहुत ही सुन्दर और अद्भुत वर्णन ।आपका लेख बहुत ही सूक्ष्म जानकारियों से परिपूण॔ और मन को आनंदित करने वाला होता है ।साथ ही साथ यह भी अनुभव देता है कि हम भी आपके साथ साक्षात् दर्शन का लाभ उठा रहे हैं ।सारे धामों का वर्णन अतुलनीय है ।आपकी लेखनी की जितनी तारीफ़ की जाए कम है ।पता लगता है कि इस शोध काय॔ में आपकी कितनी मेहनत और लगन है ।गर्व होता है आपकी लेखनी पर और अपने भारत के इतिहास पर।धन्यवाद दीदी इतनी सुन्दर यात्रा के लिए ।

    1. Disha Avinash says:

      शिल्पा ,तुम जैसे अच्छे पाठक मिलते हैं तो बेहतर लिखने की प्रेरणा मिलती रहती है तुमने बहुत अच्छा पत्र लिखा है रूचि लेकर पढ़ा भी है ,बहुत धन्यवाद,ब्लाग से एेसे ही जुड़े रहना ?

  33. अभिनव says:

    हर बार की तरह अप्रतिम ब्लाग
    अगर आपके ब्लाग पढकर किसीने द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा कर ली, तो भी वो बहुत बहुत सफल हो जायेगी इसमे कोई संदेह नही।
    अभिनव , पुणे

    1. Disha Avinash says:

      अभिनव जी ,आप स्वयं शोधपरक लेख लिखते हैं आपके द्वारा प्रशंसा किए जाने से बहुत अच्छा लगा अनेक धन्यवाद

  34. पंडित राजेन्द्र कौशिके,वेरूल says:

    सराहनीय कार्य,शोधपरक,मैं तो कहूँगा आप डॉक्टर हो गए हैं ,यानि विषय के विशेषज्ञ ,शब्दों के चयन से मध्यप्रदेश के आदिवासी गाँव ,तेलंगाना का प्रकृति चित्रण और तमिलनाडु के मंदिरों की पूजा पद्धति का वर्णन आपने बहुत ही बढ़िया अंदाज में किया है ,पढ़ते समय एेसा लग रहा था मानो हम आपके साथ -साथ यात्रा कर रहे हों ,श्री घृष्णेश्वर जी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम ,आप सभी गुणीजनों से सीखा है,,हम तो बस माध्यम हैं पंडित जी ,आप लोगों का आर्शीवाद मिलता रहता है तो उत्साह और भी बढ़ जाता है,अतिशय धन्यवाद,जय श्री घृष्णेश्वर

  35. Chitrendra Swarup Rajan says:

    हमेशा की तरह श्रीमती दिशा द्वारा अपनी हस्त सिद्ध लेखनी से अत्यधिक पूजनीय है श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का घर बैठे ही दर्शन करा दिया है इसके लिए मैं उनका कृतज्ञ हो रहा हूं
    है नागरकोइल का मंदिर ,कन्याकुमारी सुचिंद्रम मीनाक्षी मंदिर तथा शिव धाम रामेश्वरम के मंदिरों की पावन यात्रा इन सबके लिए दिशा धन्यवाद की पात्र हैं
    इतनी विस्तृत जानकारी देना वह भी अपने अल्प प्रवास में केवल वोही संभव कर सकती हैं
    धन्यवाद
    राजन के प्रणाम सहित

    1. Disha Avinash says:

      सर बहुत धन्यवाद ,आपका पत्र मुझे दिली सुकून देता है साथ ही तसल्ली भी देता है कि हम जो कर पा रहे हैं उसे आप जैसे विद्वानों की सराहना मिल रही है आपके एकोएक शब्द मेरे लिए अहमियत रखता है इसलिए भी कि फ़ीचर लेखन के गुर तो मैंने आपसे ही सीखे हैं आपके इन्हीं आर्शीवचनों की तो मुझे प्रतीक्षा रहती है

  36. brajeshrajputbhopal@gmail.com says:

    अद्भुत, अलौकिक और अवर्णनीय इस यात्रा वर्णन को पढने के बाद यही कुछ शब्द याद रह जाते है। इतना विशद, विवरणात्मक, जानकारीप्रद और रोचक वर्णन इन दिनों पढने नहीं मिलता। तुम्हारी मेहनत लगन धीरज और जिज्ञासु प्रवृत्ति को प्रणाम। इतनी शिद्दत से लिखना दुश्कर कर्म है जिसे तुम बहुत बेहतर तरीके से अंजाम दे कहीं हों। भोपाल से रामेश्वर की यात्रा की थकान पढने के बाद अब हमें भी महसूस होने लगी है। इस रोचक यात्रा पर साथ ले जाने का शुक्रिया दिशा..

    1. Disha Avinash says:

      ब्रजेश,आशा है तुम्हारी थकान अब उतर गई होगी,तुमने कितनी पते की बात लिखी है कि इतना खोज परक आध्यात्मिक लेखन अब पढ़ने को नहीं मिलता ,क्योंकि हम अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं ,मेरे लिए भी वाक़ई सब कुछ बहुत आसान नहीं है पर तुम जैसे पढ़ने लिखने वाले आला दर्जे के कलमनवीस जब तारीफ करते हैं तो हौसला दूना हो जाता है और रास्ते आसान हो जाते हैं ,तुमने अपने अति व्यस्त समय में से समय निकाला और मेरा उत्साहवर्धन किया ,ह्रदय से धन्यवाद?

  37. Priti kotak says:

    Disha, I m very much pleased to read your blog. You have described your journey and experience so minutely and beautifully that I am not unknown to this place anymore.

    Thank you..
    Priti

    1. Disha Avinash says:

      प्रीती बेन,तुम्हारे पत्र की राह तक रही थी ,इतना सुन्दर और सटीक पत्र लिखने के लिए दिल से शुक्रिया ,चलो अब रामेश्वरम से तुम क़तई नावाक़िफ़ नहीं हो,यह जानकर बहुत अच्छा लगा ,एेसे ही मेरे संग-संग घूमो,दर्शन करो और अपनी राय ज़ाहिर करती रहो?

  38. पंडित संतोष पैठनकर says:

    अद्वितीय ,आपने पूरी लगन और मेहनत से इस बार का आलेख तैयार किया है पढ़कर नई जानकारियाँ मिलीं ,एेसे ही लिखती रहें श्री घृष्णेश्वर जी की कृपा आप पर बनी रहे और आप अपने उद्देश्य में सफल हों।
    पंडित संतोष पैठनकर ,वेरूल

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम,आपको अतिशय धन्यवाद,आपने अपने विचारों से हमें अवगत कराया,जय श्री घृष्णेश्वर?

  39. सौ.ललिता शिन्दे says:

    दिशा जी आपकी शब्द रचना बहुत ही प्रभावशाली है एेसी कि पढ़ते साथ ही साक्षात् भगवान के दर्शन हो जाते हैं और हम शाश्वत धाम की दिव्यता का अनुभव कर लेते हैं आप सही मायने में सनातन संस्कृति का प्रसार कर रहीं हैं श्री त्र्यम्बकेश्वर जी वाले आलेख की तरह यह भी बहुत मेहनत से लिखा है,मैं चाहती हूँ ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक यह पहुँचे
    सौ.ललिता शिन्दे
    न्यासी,त्र्यम्बकेश्वर संस्थान

    1. Disha Avinash says:

      ललिता ताई ह्रदय से धन्यवाद ,आपकी प्रतिक्रिया पाकर मैं बहुत प्रसन्न हूँ कि लेख के माध्यम से मैं आपको ईश्वर के साक्षात् दर्शन करा पायी ,मेरा उद्देश्य भी यही है,अधिक से अधिक पाठकों को ब्लाग से जोड़ सकूँ ,इसी में ब्लाग की सार्थकता निहित है आप भी मेरे इन प्रयासों में सहभागी बनिए यही विनम्र निवेदन है,मेरे ब्लाग का लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिले यही कामना है ?

  40. पंडित मंगेश चांदवड़कर says:

    हरिओम,बहुत ही बढ़िया,अबकी बार आपने बहुत रिसर्च करके लिखा है कितनी पुरानी पुस्तकों का आपने अध्ययन किया होगा मैं यहाँ बैठकर अंदाज़ा लगा सकता हूँ ,रामेश्वरम तीर्थ का वर्णन इतने विस्तार से नहीं पढ़ने में आता ,साथ ही आपने मीनाक्षी मंदिर ,कन्याकुमारी ,नागरकोइल का वर्णन लिखा है वो भी बहुत सारी नई जानकारियाँ लिए हुए है फ़ोटोग्राफ़ी कमाल की है मार्ग का विवरण तो ब्लाग को रूचिकर बनाता ही है और आप जिस तरह से
    सजातीं हैं उससे ब्लाग बढ़िया लगने लगता है
    पंडित मंगेश चांदवड़कर

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम, अनेक धन्यवाद,आप श्री त्र्यम्बकेश्वर जी के दिव्य धाम से श्री रामेश्वरम धाम के दर्शन और तीर्थों का आनंद ले पाये ,मीनाक्षी अम्मन और नागराज जी के बारे में जान पाए यह जानना मेरे लिए बहुत ही सुखदायी रहा ,लिखने के लिए पढ़ा बहुत ,पौराणिक महत्व की पुरानी पुस्तकों को खंगाला यह भी सच है ,फ़ोटोग्राफ़ी और ब्लाग की सज्जा भी आपको बेहतर लगी यह जानकर प्रसन्नचित हूँ । जय श्री त्र्यम्बकेश्वर ?

  41. निशांत व्यास says:

    जितना व्रहद् व्रत्तांत, उतना ही अधिक रूचिकर भी.
    श्री रामेश्वरम् के महात्म्य के साथ ही मार्ग मे पड़ने वाले प्रत्येक धार्मिक पड़ाव के नैसर्ग, मान्यताओं, परंपराओं, शिल्प, सोंदर्य एवं किवंदतियों का भी विस्त्रत उल्लेख आपके अथक परिश्रम एवं श्रंखला के प्रति आपके असीम उत्साह को प्रदर्शित करता है.
    जय श्री रामेश्वरम्

    1. Disha Avinash says:

      निशान्त ,तुम्हारा पत्र इस बार देर से आया ,लेकिन तुमने मन लगाकर पढ़ा और लिखा भी बहुत मन से,तुम मेरे परिश्रम को आलेख में महसूस कर पा रहे हो यह भी बहुत सुखकर लगा इसी तरह ब्लाग से जुड़कर अपनी राय से हमें परिचित कराते रहना,बहुत सारा धन्यवाद

  42. Sapna Gupta says:

    Adbhud varnan…..bahut achcha varnan Disha… Apke lekh padhne se humari Hindi sudhar jayegi…..

    1. Disha Avinash says:

      सपना ,पत्र लिखकर अपने सुविचारों से अवगत कराने के लिए तुम्हें पत्र के माध्यम से स्नेह सहित बहुत सारा धन्यवाद पहुँचा रही हूँ ,तुम्हारी संवाद क्षमता और हिन्दी तो वैसे ही बहुत अच्छी है हम सभी तो एक दूसरे से कुछ न कुछ सीखते हैं ,तुम जो नेक समाज सेवा का काम कर रही हो वह अपने आप प्रेरणादायी है

  43. I hv read 3 time of your Rameshwaram Jyotirlinga road daerie nd now I can say 1 St time i hv read too good discription with Geographical nd Mythologycal of Rameshwarm .I never ever read with all religions nd religious tamil nd Kannad words with meaningful relationships with subject .when I was read i feel I m also in this trip with full of visualisation.I m thankful to you that you give me this a apporchunity in this life that I get MOKSH with this yatra
    God bless you realy your steps is saving our culture nd torch for youth who far away from our history.
    OM namha Shivay

    1. Disha Avinash says:

      जीतेन्द्र जी आपको बहुत धन्यवाद ,आपने यात्रा का भरपूर आनंद लिया ,द्रविड़ इतिहास और संस्कृति को ब्लाग के माध्यम से बेहतर ढंग से जाना,इतनी गहराई से जब आप जैसे पाठक पढ़ते हैं और फिर अपनी प्रतिक्रिया में मोक्ष की परम अनुभूति की बात साझा करते हैं तो कार्य में और मन लगता है और उत्त्कृष्ट लिखने की प्रेरणा मिलती है

  44. पंडित हरीश भारती गोस्वामी says:

    महादेव महादेव,अापने आलेख बहुत बढ़िया लिखा है ,हमने अपने सभी जानने वालों को पहुँचाया,सभी ने तारीफ की ,आप भारतीय संस्कृति ,आध्यात्म और धार्मिक अनुष्ठानों को जन जन तक पहुँचाने का काम कर रही हैं वह अनूठा और जनकल्याणकारी है,आपने घर बैठे रामेश्वरम धाम की यात्रा करा दी
    पंडित हरीश भारती गोस्वामी ,द्वारका

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम,आपके आशीष वचन मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं आपको अतिशय धन्यवाद महादेव,महादेव ?

  45. विपिन अग्रवाल says:

    दिशा की लेखनी सार्थक हो रही है,पढ़ते समय मम्मी की याद दिलाती है,
    दिशा साधुवाद,तुमने सामयिक विषयो पर कॅरियर के किस पढ़ाव में लिखा मुझे नही मालूम,लेकिन मेरा दावा है अब लिखोगी तो बहुत उम्दा और श्रेष्ठ होगा,बचपन से ही हमारे बीच में साहित्य,भाषा,सामयिक विषयो का महत्व रहा,
    पढ़ाई छूटी अब कम से कम तुम तो लगी हो,बाकी सब तो 99 के फेर में लग गए हैं
    विपिन अग्रवाल

    1. Disha Avinash says:

      बहुत लिखा बतौर संवाददाता ,राजनैतिक ,सामाजिक और सामयिक विषयों पर अब तो मन इसी में रम रहा है बहुत धन्यवाद,तुम्हें मेरा शोधपरक लेख अच्छा लगा मुझे इस बात की बहुत ख़ुशी है जो इस बात को दर्शाता है कि तुम भले ही९९के फेर में लग गए हो लेकिन साहित्य के प्रति तुम्हारी ललक अब भी बाक़ी है ,इसे हमेशा जिलाए रखना……यही तो हमारे संस्कार हैं और यही हमारी पूँजी …तुम्हें मम्मी की लेखनी की याद आ गई,ब्लाग पढ़कर ,मुझे प्रसन्नता हुई,बस जो कुछ भी तुम पढ़ रहे हो न यह सब उन्हीं की शिक्षा दीक्षा का नतीजा है ,एेसे ही लिखते रहना।बचपन के दिनों का स्मरण कराने के लिए भी बहुत सारा धन्यवाद?

  46. Varsha says:

    Disha bahut achhe se vistar purvak varnan kiya he tumne???

    1. Disha Avinash says:

      वर्षा ,मुंबई की व्यस्त महानगरी ज़िन्दगी से मेरे ब्लाग को पढ़कर प्रतिक्रिया लिखने के लिए दिल से शुक्रिया इसी तरह जुड़े रहना

  47. Umesh Soni says:

    Disha very nice . You are very good writer

    1. Disha Avinash says:

      उमेश , विचार साझा करने के लिए बहुत सारा धन्यवाद

  48. Vivek Mahajan says:

    Disha bahut Sundar likha hai, Maa Saraswati ka Ashirwad sadev Aap Par bana rahe.
    Vivek Mahajan

    1. Disha Avinash says:

      विवेक ,अपनी राय ज़ाहिर कर मेरी लेखनी में विश्वास बयां करने के लिए शुक्रिया

  49. प्रेमशंकर पाण्डेय says:

    दिशा बहुत ,बहुत साधुवाद ?�यात्रा विवरण पढ़कर मजा आ गया।तुम्हारी लेखनी मे दम हैं।बाबा महादेव एवं श्री गणेश की कृपा तुम पर बनी रहे।
    प्रेमशंकर पाण्डेय

    1. Disha Avinash says:

      प्रेमशंकर ,तुम्हें मेरी लेखनी ने प्रभावित किया उसमें दम भी दिखाई दिया, इस बाबत बहुत धन्यवाद

  50. Sanjay Sharma says:

    Very nice we are feeling proud of you
    Sanjay Sharma

    1. Disha Avinash says:

      संजय ,बहुत धन्यवाद,सराहना करने के लिए ,बहुत अच्छा लगा तुमने पत्र लिखा

  51. पंडित राजभाऊ जोशी says:

    आपका काम बहुत बढ़िया है ,पंडा जी से आपने विस्तार से बात कर जो रामेश्वरम की महती लिखी है वो बहुत ज्ञानवर्धक है जय परली वैधनाथ ,बाबा आपकी यात्रा सफल करे
    पंडित राजभाऊ जोशी

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम,आपको बहुत धन्यवाद,आपने लेख की प्रशंसा की,जय श्री परली वैधनाथ

  52. गिरिराज उत्तरवार says:

    दिशा, आई ने तुम्हारा लेख पढा, पढकर उन्हें बहुत आनंद हुआ, उन्हें लगा जैसे वे सारी जगहें फिर से घूम आई हों, उनकी इन जगहों की यादें मनपटल पर फिर से ताजा हो गई। आई ने तुम्हारी बहुत तारीफ की और तुम्हारे लगन और मेहनत की बहुत सराहना की। उनकी mobile पर पढ़ते-पढ़ते आँखे दुख आई, परंतु उन्हें इतनी अच्छी अनुभूति हो रही थी कि पूरा लेख पढने के बाद ही दम लिया। तुम्हें इसी तरह और अच्छा-अच्छा लिखने के लिये आई की तरफ से ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद।तुम्हारे लेख, हिंदी में लिखने के लिए मेरे लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। पहले मैं सोच रहा था, क्या मैं आई के विचारों की अभिव्यक्ति हिंदी में लिख पाऊंगा? परंतु जब लिखने की शुरुआत की तो सहजता से शब्दों का सिलसिला शुरू हो गया। मुझे अपने आप पर बहुत आश्चर्य हो रहा है, क्योंकि हिंदी की परीक्षा से मुझे नानी याद आ जाती थी, ग्यारहवीं class में भी सारे प्रश्नों के जवाब, कविता के अर्थ
    , निबंध, लेखकों की जीवनी, व्याकरण सबकुछ घोटकर जाता था क्योंकि अपने आप से हिंदी में लिख पाना मेरे लिए असंभव था और घोटना उससे भी कठिन कार्य। और अब हिंदी पढ़ने और लिखने का नाता करीब-करीब 20-22 सालों से टूट चुका है, हिंदी पढ़ने-लिखने को फिर से जोड़ने के लिये शत-शत धन्यवाद।
    गिरिराज उत्तरवार

    1. Disha Avinash says:

      गिरिराज ,आई को प्रणाम ,उनसे तारीफ सुनकर बहुत अच्छा लगा ,तुम्हारी हिन्दी वाक़ई सुधर और निखर गई है ,बहुत धन्यवाद

  53. प्रदीप त्रिपाठी says:

    दिशा जी यात्रा का पुनः अविस्मरणीय वर्णन। इतनी ज्ञानवर्धक जानकारी शायद ही और कहीं मिले। मीनाक्षी नागराज एवं रामेश्वरम का वर्णन अत्यंत सारगर्भित है। पढकर ऎसा लगा जैसे मैं भी यात्रा में शामिल हूं। विशेष सहयोग में मुझे स्थान देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Disha Avinash says:

      प्रदीप जी ,बहुत धन्यवाद,आपके सहयोग से वन क्षेत्र को समझना आसान हो गया ,आप हमारे साथ जुड़े रहिए आगे भी आपसे सहयोग की अपेक्षा रहेगी

  54. वीरेंदर सिंह says:

    आपका रोड डायरी का नया संस्करण ज्योतिर्लिंग के एकादश स्थान पर भगवान रामेश्वरम् की सड़क मार्ग द्वारा यात्रा वर्णन अत्यंत मन को आंदोलित करने वाला लगा । जिसे पढ़कर ऐसा लगा की हम भी आपके साथ-साथ सभी स्थानों एवं प्रसाद लाभ प्राप्ति कर रहे हो। साथ ज्योतिर्लिंग के अलावा कन्याकुमारी शक्तिपीठ का वर्णन भी अति रूप से किया गया है । साथ ही वहीँ पर नागलोक भी हुआ करता था जिसका प्रमाण नागरकोइल से मिलता है जहाँ के मंदिर आज भी प्रमाण रूप में प्रस्तुत है । तथा वहाँ के संस्कृति के साथ – साथ वहां के खान पान का वर्णन भी अति रुचिकर रूप से किया है । इसे पढ़कर आज के युवा जो अपने संस्कृति एवं संस्कार से दूर होते जा रहे है वह भी बिना वहां गए बहुत कुछ सीख सकते है । आशा है आगे और यात्रा संस्मरण हमे पढ़ने को मिलेगें जिससे हम जैसे और लोग भी दर्शन लाभ पा सकेगें ।
    ॐ नमः शिवाय, वीरेंदर सिंह

    1. Disha Avinash says:

      वीरेन्द्र जी आपको बहुत धन्यवाद,आप सभी आध्यात्मिक यात्रा का भरपूर आनंद ले रहे हैं यह जानकर बेहद ख़ुशी मिलती है और इस बात की प्रेरणा भी मिलती है कि बहुत गहराई से लिखूँ ,ज़्यादा तथ्यों को समाहित करूँ ,ज्ञानी लोगों से अधिक से अधिक ज्ञानार्जन कर सकूँ

  55. pratishrut awasthy says:

    Didi amazing ..journey ..feeling proud of our rich heritagae..at the same time i wonder why todays parents and system has kept away their offsprings from such an amazing and invaluable heritage?

  56. SUSHIL NAUTIYAL says:

    कभी रामेश्वर जाने का अवसर प्राप्त नही हुवा किंतु आपका लेख पढ़कर के ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मैं रामेश्वर की यात्रा कर रहा ह किन्तुूं पूरा नहीं पढ़ पाया जितना भी पढा असीम आनंद की अनुभूति प्राप्त हुई।आशा है आपकी लेखनी के माध्यम से इसी प्रकार से मे अनदेखे धार्मिक स्थलों का भ्रमण करता रहूंगा।

  57. Sushil nautiyal says:

    बहुत सुंदर लिखा आपने जाने का समय तो कभी मिल नहीं पाया लेकिन आपके लेख से आज कन्याकुमारी हैदराबाद मदुरई घूम गया भगवान से प्रार्थना करता हूं कि आपकी लेखनी का जादू ऐसा ही छाया रहे।