श्री केदारनाथ: देवभूमि उत्तराखण्ड में शिव का चिन्मयी धाम

श्री केदारनाथ

शिवालय के  पुनरोद्धार का श्रेय 2500 वर्ष पूर्व अद्वैत दर्शन के प्रवर्तक जगतगुरु आद्य शंकराचार्य को, वे 32 वर्ष की अवस्था में अपने शिष्यों के साथ केदारनाथ में समाधिस्थ हुए

परंपरानुरूप हिमाच्छादन्न के चलते दीवाली के दूसरे दिन श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होने से तीन दिन पूर्व केदार क्षेत्र के क्षेत्रपाल श्री मुकुन्द भैरव मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाने के साथ ही दैनंदिनी आरतियों और अलंकरणों की संख्या में कटौती कर दी जाती है। प्रधान अर्चक निज मंदिर के कपाट बंद होने से पूर्व वेदोच्चारण के बीच शास्त्रोक्त अनुष्ठान कर ज्योतिर्लिंग का भस्मी अभिषेक करते हैं। घृतलेपन के उपरान्त् व्याघ्रचर्माम्बधारी अर्चा विग्रह पर मेवे-पुष्पादि के अर्पण का अनुक्रम होता है। मुख्य रावल आगामी अप्रैल मई माह में प्रस्तावित कपाटोद्घाटन (6 माह की कालावधि) तक प्रज्वलित रहने वाली चमत्कारिक अखण्ड ज्योति में घी की मात्रा सुनिश्चित कर, पूर्व निर्धारित मुहुर्त पर उल्टे कदमों से बाहर आ जाते हैं। जनपद रूद्रप्रयाग के सर्वोच्च शासकीय अधिकारी की उपस्थिति में कपाट सील कर दिये जाते हैं। मंगलमय, कुशल क्षेम मुक्तिप्रदाता श्री केदारनाथ जी की श्रृंगारित पंचमुखी उत्सव प्रतिमा जो अब तक मुख्य रावल जी के निजी आवास में पूजित थी उखीमठ में शीतकालीन प्रवास हेतु समारोह पूर्वक लिये जाने की दीर्घकालीन प्रथा का निर्वहन होता है। पीढियों से गुजरात, बंगाल और मध्यप्रदेश प्रान्तों का प्रतिनिधित्व करने वाले पंडाओं से घिरे मुख्य रावल श्रीमान् शिवशंकर जी से हम करूणसागर श्री महेश्वर की उपासना संबंधित ज्ञानार्जन कर रहे थे। मंदिर के निर्माण के तारतम्य में हमारी जिज्ञासावृत्ति को गुजराती समाज के वरिष्ठ पंडा, विद्ववत् श्री प्रवीण तिवारी जी ने शान्त किया उन्होंने बताया कि अर्जुन के प्रपौत्र जन्मजेय ने मंदिर के अग्रभाग का निर्माण कराया ऐसी मान्यता है।
कालान्तर में शिवालय के जीर्णोंद्धार का श्रेय 2500 वर्ष पूर्व अद्वैत दर्शन के प्रवर्तक जगतगुरु आद्य शंकराचार्य को जाता है। समझा जाता है कि आठवीं शताब्दी में वैदिक धर्म के उद्धार हेतु आध्यात्मिक जगत की इस महान विभूति ने केदार पावन क्षेत्र में साम्बसदाशिव को संस्थापित किया। जन-जन को सत्पथ दिखाने वाले आदि गुरू शंकराचार्य 32 वर्ष की अवस्था में अपने शिष्यों के साथ केदारनाथ में समाधिस्थ हुए और 716 ई में सःशरीर पंचतत्व में विलीन हुए थे। मंदिर के दाहिने हाथ पर वैदिक परंपरा को अक्षुण्ण बनाने वाले पूज्य शंकराचार्य की समाधिस्थली दुर्भाग्यवश आपदा में पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो गयी। वार्तालाप करते-करते हम मंदिर के दोनों ओर विद्यमान द्वारपाल जय-विजय की प्रतिमाओं के निकट आ गये थे। पंडा जी बताते चल रहे थे ‘‘ कटु सत्य तो यही है बहन जी न जाने कितने मंदिर, प्रतिमाएं, तीर्थ और कुण्ड चोरावाड़ी हिमनद के प्रलयकारी बहाव में बह गये। ब्रह्मकमल का जनक वासुकी ताल और पैंया ताल भी भयावह आपदा में कुछ कम रोषान्वित नहीं थे। प्रिय मेध के पुत्र सिन्धुक्षित ऋषि द्वारा उद्घोषित भगवती गंगा की सहायिका नदी सिन्धु की पांचवी स्वसा (कुभा वैदिक नाम धारी) मंदाकिनी नदी के जिस ‘स्तिमित प्रवाह’ की कालिदास ‘रघुवंश’ में प्रशंसा करते नहीं थकते वह भी इस कालरात्रि में प्रचण्डता लिये गर्जन-तर्जन करती सर्वस्व बहा ले गयी थी और सहस्त्रों यात्रियों को काल को ग्रास बना गयी थी।” चलते-चलते अब तक हम मंदराचल पर्वत से निकलकर केदार क्षेत्र में प्रवाहमान मंदाकिनी नदी के सन्मुख पहुंच गये थे। पुराणों में मंदिर से दूर ऊपर की ओर क्रोन्च तीर्थ और ब्रह्मतीर्थ काकभुसंडी टॉप, हनुमान टॉप, चन्द्र शीला पर्वत का उलेख हुआ है जहां पहुंचना त्रासदी के बाद अगम्य हो गया है ऐसी चर्चा भी निकली। ब्रह्मनदी, सरस्वती और मन्दाकिनी की संन्निधि पर आस्थित अन्नपूर्णा मंदिर और समीप्य स्थित अति मूल्यवान स्फटिक शिवलिंग तो बह ही गये।

यस्माज्जलमयी भूमिः पदन्यास सुकम्पिता, केदारक्षेत्रभाख्यातं तीर्थानां तीर्थ मुत्तमम’ (के से अभिप्राय जल, दार अर्थात् दलदली भूमि) तीर्थों में सर्वोत्तम तीर्थ केदारनाथ क्षेत्र जलार्द है

मंदिर के पार्श्ववर्ती स्थित भीमकाय शैलखण्ड के समक्ष षाष्टांग दण्डवत् होते भाविकों को देखकर उपजी ज्ञानपिपासा के प्रत्युत्तर में पंडाजी श्रद्धेय केशव तिवारी ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदा से पूर्व इस शैलखण्ड का यहां कोई अस्तित्व नहीं था लेकिन इसकी उपस्थिति ने ही मंदिर को क्षत-विक्षत् होने से बचा लिया इसीलिए श्रद्धालुओं ने इसे भीम शिला की संज्ञा दे दी है। सामने अमृत कुण्ड के जल का आचमन कर हमने रेतस (उद्क कुण्ड) ईशान, हंस कुण्ड सामुद्रकुण्ड की पूछ परख ली तो ज्ञात हुआ कि वे विभीषणकारी प्रलय की गर्त में दब चुके हैं। पंडा जी परमादरणीय प्रवीण तिवारी जी वार्तालाप के क्रम को विस्तार देते हुए ‘यस्माज्जलमयी भूमिः पदन्यास सुकम्पिता, केदारक्षेत्रभाख्यातं तीर्थानां तीर्थ मुत्तमम’ (के से अभिप्राय जल, दार अर्थात् दलदली भूमि) कहकर तीर्थों में सर्वोत्तम तीर्थ केदारनाथ क्षेत्र के जलार्द होने का भी रहस्योद्घाटन करते हैं। यहां पंचनंदो के उद्गम और संन्धि स्थल (मंदाकिनी, सरस्वती, मधुगंगा, क्षीरगंगा और स्वर्गद्वारि) के दर्शन मात्र की अभिलाषा रखने वाले को शिवलोक की प्राप्ति होती है बहन जी ऐसा महात्म्य है। स्वयं महेश्वर माता पार्वती से कहते हैं ‘‘ अहंमहापथे नित्यं संस्थितो मम वल्लभे, अस्मात्स्थानात् प्रियतरं नास्तिदेवेशिमेक्वचित।। कि पुनर्मानवो लोके सर्वसंग विवर्जितः मात्यस्य हदि च स्वीयेगच्छेद्वै मम्मन्दिरे।’’ (मैं सदा महापथ में निवास करता हूं और जो महाभक्त मेरे महापथ स्थित मन्दिर में पहुंचता है। वह भला क्यों नहीं मुझे प्यारा होगा। आगे बढ़े तो पंडाजी श्री महेश तिवारी जी बदरी केदार प्रसाद समिति के गढ़वाली फलाहारी प्रसाद की नयी नवेली व्यवस्था के अन्तर्गत उपलब्ध चूरमा चौलाई और रामदाना प्रसाद वाला झोला लिये खड़े थे। जनपद रुद्रप्रयाग के पर्यटन विकास अधिकारी श्री सुशील नौटियाल जी जिन्हें पहाड़ों के डॉक्टर के रूप में जाना जाता है के द्वारा हमें यह भी बताया गया कि इस वर्ष शैवागन्तुकों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में डेढ़ लाख की अभिवृद्धि हुई है। इस वर्ष (2017) में कुल 458524 शैवमनविस्कों ने श्री केदारनाथधाम में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है। दिक दिंगत में व्याप्त शिवता और दृढ़आस्था चेतना तथा चिंतन के अतुल भण्डार हिमगिरी के पार्श्वस्थ केदारनाथ मंदिर परिसर के घान (विशालकाय घण्टों) से निस्त्रत आल्हादित निनाद पल प्रतिपल शिव-साक्षात्कार करा रहा था। पर्वत श्रृंगों की धवलिमा में दो हरिताभ पर्वतों को पंडा जी प्रवीण तिवारी हरिलोक के जय-विजय सदृश पर्वतों की संज्ञा दे रहे थे। खण्ड-खण्ड हुए घरों के भग्नावशेष और अकारण विपदा की भेंट चढ़ गये सहस्त्रों धर्मानुयायी स्वजनों के अवशिष्टों को विशेष रसायनों के माध्यम से गलाने के हृदय विदारक प्रसंगों ने व्यथित मन को झिंझोड़ कर रख दिया था। अब तक सुनते आये थे कि शिव जब कुपित होते हैं तभी प्रकृति विपरीत दिशा की ओर अग्रसर हो जाती है। संभवतः इसीलिए ऋग्वेद का ऋषि भोलेनाथ की प्रार्थना करते हुए कहता है “हे! मरूद्गण के जनक रूद्र तुम्हारा सुखदान हमें प्राप्त हो, हम सूर्य के दर्शन से कभी वंचित न रहें, राहू केतू हमें कभी व्यथित न करें, हे रूद्र तुम अभीष्टों की वर्षा करने वाले हो, हम नियम विरूद्ध नमस्कार एवं भ्रम युक्त स्तुति तथा तुम्हारे असहयोगियों का आह्वाहन कर तुम्हें कुपित न करें, कोमल उदर, दृढ़ शरीर, उज्जवल तेजोमय सुन्दर नाम वाले रूद्र हमारी हिंसा न करें। तो क्या वाकई शिव उस दिन कुपित हो गए थे? पर क्यों? गहन निस्तब्धता… हमने मोक्षित धूलि का वंदन किया और सघन निर्माण कार्यों से केदारनाथ धाम की बदलती तस्वीर को नैनों में बसाकर हैलीकॉप्टर में बैठ गये। मन कह रहा था- पसरेगी धूप जब धवल पहाड़ी ढलानों पर पिघलेगी चमचमाती बर्फ, सन्नाटे को चीरकर झरने तोड़ेंगे चुप्पापन, तपस्वियों के संदेश लिए वारिधाराएं कुछ और आगे बढ़ेंगी, खिलेंगे असंख्य ब्रह्मकमल महाशिवरात्रि के अवसर पर, मुख्य रावल हकहकूकधारी और क्षेत्र के गणमान्य लोग मंत्रणा कर कपाटोद्धाटन की नियत तिथि सुनिश्चित करेंगे, अगली 29 अप्रैल को हे कन्दर्पदलन, केदानाथ, चराचर, जगद्रूप प्रभो, के शरणागत होंगे अनेकानेक  शैवधर्मी…

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Comments

  1. राकेश मिश्रा says:

    ॐ जय भोले नाथ बाबा की जय ॐ

    1. Disha Avinash says:

      बहुत धन्यवाद राकेश

  2. Gopalkrishna Andhale says:

    दिशा मॅडम आपको माॅ सरस्वती का आशिर्वाद हैं.
    भौतिक सुख में भटके हुऐ लोगोंको आपकी कलम से सही ”दिशा”देने का ही नेक कार्य हो रहा है.
    आपकी पावन कलम को बहोत सारी शुभ कामना!

    1. Disha Avinash says:

      परली से मिला आपका पत्र मुझे और बेहतर लिखने के लिए सदा प्रेरित करता रहेगा धन्यवाद

  3. Vinay kumar mishrs says:

    दिशा तुमने फिर से बहुत शानदार लिखा है बधाई

    1. Disha Avinash says:

      विनय तुम्हें पुन:धन्यवाद

  4. Mahendra jat says:

    एक इंतजार की बेला के बाद केदारनाथ यात्रा के मनोहारी दशर्न से मन अभिभूत हो गया। धन्यवाद ज्ञानवर्धक जानकारी के लिए।

    1. Disha Avinash says:

      महेन्द्र यह जानकर अच्छा लगा कि तुम हमारे ब्लाग की प्रतीक्षा करते हो धन्यवाद

  5. Abhinav Kurkute says:

    दिशाजी आपपर माता सरस्वती की विशेष कृपा है। इसके आगे क्या कहें।

    अगर गंगोत्री का मूल नाम गंगोत्तरी हैं, तो यमुनोत्री का भी यमुनोत्तरी होना चाहिए।

    1. Disha Avinash says:

      अभिनव जी आप की प्रशंसा मुझे बेहतर और बेहतर लिखवाती रहेगी
      धन्यवाद

  6. प्रीति says:

    सुन्दर लिखाई सुन्दर विवरण बहुत खूब
    प्रीति ,जूनागढ़

    1. Disha Avinash says:

      प्रीति स्नेह सहित धन्यवाद

  7. Jujar says:

    Very good disha
    Jujar Hussain

    1. Disha Avinash says:

      धन्यवाद,बचपन के सहपाठी हमेशा साथ निभाते हैं

  8. जंयती उनियाल says:

    बहुत सुंदर बहिन जी
    आप तो बहिन जी ज्ञान के भण्डार हैं माँ यमुना से आपके उज्जवलमय जीवन के साथ आप हमेशा इसी प्रकार के लेख लिखते रहेँ और धर्म के प्रचार पर अपनी अहम भूमिका निभाते रहेँ माँ यमुना का आप पर विशेष आर्शीवाद बना रहे जय श्री यमुने मैया
    श्री जंयती उनियाल

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम पंडित जी ,आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर मुझे आनंद आ गया ,आपके सहयोग के लिए आभारी हूँ

  9. मनोज द्विवेदी says:

    बहुत अच्छा दिशा ,विशेषकर श्री केदारनाथ मंदिर का सविस्तार वर्णन पढ़कर आनंद आ गया ,मुझे इन तीर्थों की यात्रा का सौभाग्य नहीं मिला पर तुमने घर बैठे यात्रा करा दी
    मनोज द्विवेदी

    1. Disha Avinash says:

      मनोज ,बिजली विभाग से फ़ुरसत निकालकर तुमने ब्लाग की सामग्री पर रोशनी डाली ,धन्यवाद

  10. Suresh Awasthi says:

    अद्भुत दृष्टि और मेधा पाई है दिशा तुमने।ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ के दर्शनों के साथ साथ मार्ग में पड़ने वाले सभी दिव्य और धार्मिक स्थानों का बड़ा सजीव और सरस वर्णन बन पड़ा है।धार्मिक माहात्म्य और निसर्ग के सौंदर्य के सजीव वर्णन के साथ ही भाषा पर भी तुम्हारी पकड़ सराहनीय है।रुद्राक्षों के प्रकार और उनके प्रभाव के बारे में भी पढ़ा और अपना ज्ञान बढ़ाया। इसके लिए धन्यवाद।गंगा आरती का सजीव और सचित्र वर्णन अत्यन्त मनोहारी और आस्था जगाने वाला है।
    अत्यन्त सुखकारी,ज्ञानवर्धक और आस्था जनक आलेख पढ़ने का अवसर देने के लिए धन्यवाद।

    1. Disha Avinash says:

      सर ,आपकी तारीफ मिल गई बहुत सुखद अनुभूति हुई ,दूरदर्शन के दिन याद आ गये ,बहुत धन्यवाद

  11. प्रवीण says:

    दिशा जी बहुत बहुत बधाई।आप का कार्य अत्यन्त सराहनीय एवं प्रशंसनीय है। आप ने स्वयं सभी तीर्थ यात्रायें कीं तथा प्रत्येक तीर्थ का महात्म्य वहाँ की पौराणिक एवं ऐतिहासिक घटनाओं,आधुनिक सुविधाएं सन्साधन उस तीर्थ में स्थानीय लोगों का योगदान कितना बड़ा महत्वपूर्ण होता है।आप के लेख से लोगों को यह भी मार्ग दर्शन मिला कि कब कैसे पहुँचा जा सकता है।माँ सरस्वती से प्रार्थना करते हैं आप की लेखनी को अधिक शक्तिशाली बनाएगीं जय श्री केदारनाथ।
    प्रवीण तिवारी

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम पंडित जी ,आपके सहयोग के बिना ते लिखना असंभव था फिर आपकी प्रशंसा भी मिल गई परम संतुष्ट हूँ ,बहुत धन्यवाद

  12. श्रीकांत बिष्ट says:

    आपने बहुत ही अच्छा लिखा दीदी ,हमने जितना सोचा था उससे भी बहुत अच्छा ,आपने श्री बद्रीनाथ धाम के बारे में इतने विस्तार से जानकारी दी है कि बहुत से यात्री इसका लाभ समय – समय पर उठा सकेंगे ,अगली बार दीदी माणा गाँव और फूलों वाली वैली को देखने के हिसाब से समय निकालकर आईयेगा
    श्रीकांत बिष्ट

    1. Disha Avinash says:

      तुमने शौक़ से घुमाया इसलिए हम शिद्दत से लिख पाए शुक्रिया

  13. Shilpa.gaur says:

    अद्भुत और उत्कृष्ट वर्णन ।आपकी लेखनी की जितनी तारीफ़ की जाए कम है ।इतनी सुन्दर यात्रा के साथ कितनी सूक्ष्म जानकारियों से परिपूर्ण है आपका आलेख ।कब पढ़ना शुरू किया और कब खत्म हो गया पता ही नहीं चला बिलकुल सजीव चित्रण ।आप के साथ हम लोगोंको भी मानसिक दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।गंगा जी की आरती, रुद्राक्ष की महत्ता, ऋषिकेश का वर्णन, ऋग्वेद में उड़न खटोलों की चर्चा, यमुनोत्री धाम का वर्णन, वृक्षों के बारे में जानकारियां, नोंक-झोंक वाले भगवान शिव और मां पार्वती के संवाद, केदारनाथ धाम की यात्रा तक सब कुछ उत्कृष्ट और अद्वितीय वर्णन है ।यह लेख एक बार पढ़ने केलिए नहीं है इसको तो जितनी बार पढ़ा जाए उतना ही अधिक आनंद प्राप्त होगा ।इतनी सुन्दर और मनोरम यात्रा का मानसिक दर्शन कर चित्त बहुत ही शांत और प्रसन्न हुआ ।इस सुअवसर केलिए कोटि-कोटि धन्यवाद ।ऊं नमः शिवाय

    1. Disha Avinash says:

      सात समंदर पार से जब जब तुम्हारी चिठ्ठी आती है यह संदेशा लेकर कि तुम्हें आलेख अच्छा लगा मुझे दिली ख़ुशी मिलती है ढेर सारा धन्यवाद

  14. राजेश दीक्षित says:

    हर बार की तरह आपने बहुत ही अच्छा लिखा है सारी जानकारियाँ इकट्ठा कर आपने जिस तरह साहित्यिक शब्दावली में पिरोकर प्रस्तुत की हैं वह प्रशंसनीय है ,आप की लेखनी बहुत ही प्रभावकारी है विषय अपने आप रोचक बन जाता है आप इसी प्रकार लिखते रहिए ,हरिओम
    राजेश दीक्षित

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम पंडित जी ,त्र्यम्बक क्षेत्र से आपकी सराहना मिल गई और क्या चाहिए सधन्यवाद

  15. पूरव त्रिवेदी says:

    अप्रतिम अद्भुत ,मैंने आपका ब्लाग पढ़ा और भाव विभोर हो गया मेरी बड़ी इच्छा है कि मैं अपने माता पिता को हरिद्वार तो एक बार कम से कम ले ही जाऊँ गंगा जल से उनके चरण धोकर पीलूं ,उन्हें चारों धाम की यात्रा कराऊं ,आपके ब्लाग को उन्हें भी पढ़कर सुनाया ऐसी परम संतुष्टि मिली मेरे पास शब्द नहीं हैं उसे बयां करने के लिए ,मैंने चारों धाम पहले भी किये हैं पर आपके वर्णन ने पुन:यात्रा के लिए प्रेरित कर दिया आप कभी पंचकेदार पर भी लिखिएगा ,जय सोमनाथ
    पूरव त्रिवेदी

    1. Disha Avinash says:

      पूरब जी आप जितना भाव विभोर हुए उससे अधिक हम हो गए ,बहुत धन्यवाद

  16. Sanjay says:

    Excellent disha you are genius..keep righting like this 👏
    Sanjay sharma

    1. Disha Avinash says:

      संजय प्रतिक्रिया लिखते रहो बस यूँ ही ….

  17. रीतेश पटेल says:

    अति सुन्दर वर्णन ,दिशा
    ऐसे ही लिखती रहो ,चरैवति चरैवति
    रीतेश पटेल

    1. Disha Avinash says:

      रीतेश धन्यवाद ,यात्रा जारी है ,ब्लाग से जुड़े रहो

  18. दर्शन पाठक says:

    आपका आलेख बहुत ही बढ़िया है आपने बहुत सारी जानकारियों को बहुत ही प्रभावी शैली में लिखा है ऐसा मालूम पड़ता है कि हम यात्रा कर रहे हैं ,श्री नागेश्वर जी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे और हमेशा ऐसे ही लिखती रहें
    दर्शन पाठक

    1. Disha Avinash says:

      धन्यवाद पंडित जी
      आपके सहयोग के लिए आभार

  19. गजेन्द्र उनियाल says:

    बहिन जी आपके द्वारा चार धाम व 12 ज्योतिरलिग का उल्लेख सराहनीय है आपकी बुद्धिमता की जितनी तारीफ करू वह बहुत कम है बहिन जी आपके जिव्हा में मा सरस्वती बिराजमान है आपके हृदय में गणपति बिराजमान दिखाई दे रहे है ऐसा अदभुत लेख वहीं लिख सकता है जिसपे ठाकुर जी कि कृपा होती है वह कृपा आप पर दिखाई दे रही है । मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है कि पूर्व जनम में आपने बिधयादान। किया है ओर आज प्रभु का प्रसाद आज के मनुष्यो मे बितरण कर रही है मै माॅ भगवती यमुना माता जी से सदैव प्रार्थना करता हूँ कि माँ यमुना जी की कृपा का बरदहसत आपके उपर बना रहे मा यमुना जी की कृपा सदेव आप पर बनी रहे ओर आप धार्मिक ग्रंथों का बिमोचन करती रहे आपके द्वारा उल्लेख कितना सुंदर है मैं इसका वर्णन जितना करू या जितना लिखुंगा उतना कम ही कम पण रहा है आपको व आपके परिवारजनो को मा यमुना जी की कृपा बनी रहे जय श्रीयमुना महारानी
    गजेन्द्र उनियाल

    1. Disha Avinash says:

      पंडित जी बहुत सुन्दर शब्दों में आपने प्रतिक्रिया लिखी है ,यह बाबा भोलेनाथ का ही आर्शीवाद है जिसके कारण मुझे आप जैसे पंडितों का सानिध्य प्राप्त हुआ और हम यह लिख पाए बहुत धन्यवाद

  20. After read of Ur dairy page I feel I m in this religious journey .nice discription of past correlate with prasent.just one thing I face that I have read 2 to 3 time because you are using too though hindi lecture word which is my weakness but thanks to you for did well job and giving full of knowledge along with all related all religious theory .
    All the best

    1. Disha Avinash says:

      गिरी जी ,यह जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरे आध्यात्मिक तथ्यों ने प्रभावित किया है पर हिन्दी की क्लिष्टता 🤔…भविष्य में ध्यान रखूँगी ,धन्यवाद

  21. Premchand Tiwari says:

    I read your blogs, these are very much informative. More over your way of describing the journeys is such that one feels as if he is one the way. There could not be a better attempt than yours. I am really proud of to have such an intellectual sisters. This caliber is a GOD ‘S gift to you, which you really deserve. GOD bless you.
    Premchand Tiwari Lucknow

    1. Disha Avinash says:

      तिवारी जी ,मुझे गर्व है आप जैसे सुधि पाठक पर ,जिन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया ,अतिशय धन्यवाद

  22. महेश चन्द्र तिवारी says:

    भगवान आशुतोष केदारनाथ तथा भुकुंड भेरव की कृपा आप पर सदा बनी रहे . आशा करता हूँ कि आपका ये कार्य जो कि उत्तराखंड के चारो धामों का परिचय करवा रहा है. ये सदेव चरमोत्कर्ष पर रहे. अत: मैं आपके उज्जवल भविष्य की मंगल कामना करता हूँ
    पंडित महेश चन्द्र तिवारी

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम पंडित जी ,केदार क्षेत्र से पत्र लिखकर शुभकामनाएँ देने के लिए अनेकानेक धन्यवाद

  23. Umesh Soni says:

    Disha congrats,excellent Very well written
    Umesh Soni 👏

    1. Disha Avinash says:

      उमेश ,बहुत धन्यवाद

  24. राज प्रजापति says:

    शानदार अद्भुत कल्पनाओं से परे
    आपने जो देवभूमि उत्तराखंड के बारे में अति महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है .
    इससे हमारे हिंदू धर्म से जुड़ी आस्थाएं आमजन को ज्ञान प्रदान कराएंगी.
    इससे हमारे हिंदू धर्म को बहुत बल मिलेगा.
    आपने यह जो देवभूमि उत्तराखंड अपने लेख में वर्णन किया है।
    यह आपका अभूतपूर्व और सराहनीय कार्य है
    इसके लिए हम आपका हृदय से धन्यवाद करते हैं
    राज प्रजापति ऋषिकेश

    1. Disha Avinash says:

      राज जी आपको आलेख रूचिकर लगा यह जानकर संतुष्टि हुई ,आपके सहयोग के लिए भी धन्यवाद

  25. हरीश says:

    आपने खूब दिल से लिखा है ,
    मैं अभी जाने वाला हूँ आपका लेख पढ़ – पढ़ कर यात्रा करूँगा ,त्रासदी से पहले दो बार हो कर आया पर आपने जो दिया है उससे बहुत सी नयी बांतें भी सामने आईं हैं मैंने अपने जानने वालों को भी पढ़ने के लिए ब्लाग भेजा है ,ऐसे ही लिखते रहो ,हरिओम
    हरीश भारती गोस्वामी

    1. Disha Avinash says:

      हरिओम ,आपकी प्रशंसा पंडित जी मेरा उत्साह बढ़ाती रहेगी बहुत धन्यवाद

  26. काशी प्रसाद पालीवाल says:

    आपने बहुत अच्छा लिखा बहन जी ,बद्रीविशाल भगवान की महिमा,स्थान के संबंध में आपने जो कुछ जानकारी हासिल की उसको बहुत बढ़िया अंदाज में लिखा है बहन जी ,केदारनाथ जी का भी आपने बहुत बढ़िया वर्णन किया है बल्कि समग्र उत्तराखण्ड के तीर्थों की सही -सही जानकारी आपने दे दी है
    काशी प्रसाद पालीवाल

    1. Disha Avinash says:

      पंडित जी मैं तो आपको धन्यवाद देना चाहूँगी आपकी सहायता के बिना हम बद्रीनाथ जी की महिमा का उचित वर्णन नहीं कर सकते थे

  27. पुष्कर says:

    प्रणाम,
    आपने बहुत सुंदर वर्णन किया है।
    प्रिंट निकालकर इत्मिनान से दोबारा पढूंगा।आप इसे आगे किताब के रूप में प्रकाशित अवश्य कराएँ
    पुष्कर रावत

    1. Disha Avinash says:

      पुष्कर जी ,किताब निकालने का कार्यक्रम तो है ईश्वर ने चाहा को शाघ्रातिशीघ्र यह होगा ,बहुत धन्यवाद

  28. विवेक महाजन says:

    बहुत सुंदर केदारनाथ का वर्णन किया है पढ़कर लगता है हम एक रोचक आध्यात्मिक यात्रा के हिस्सा हैं ऐसे ही लिखते रहो 👍
    विवेक महाजन

    1. Disha Avinash says:

      विवेक ,लेखन जारी है उत्साह बढ़ाते रहो

  29. राजेन्द्र says:

    आपका लेख पढ़ा ,पढ़कर आनंद आ गया ,आपकी शैली असरकारक है केदारनाथ जी की व्यापक जानकारी और पूजा अनुष्ठान के बारे में आपने सारी मालूमात हासिल कर निराले अंदाज में पेश किया है ,भगवान घृष्णेश्वर की कृपा सदैव आप पर बनी रहे
    राजेन्द्र कौशिके

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम पंडित जी
      आपने तो स्वयं किताब लिखी है आपकी प्रशंसा पाकर सच में मन प्रफुल्लित है धन्यवाद

  30. रवीन्द्र गंगाधर says:

    जय रामेश्वरम ,हमें
    बहुत अच्छा लगा पत्रकार होने के कारण आपने सबसे बात करके लिखा है इसकर के पंसद आया ,हम मई में चार धाम करने वाले हैं अभी आपका पढ़ लिया तो आसानी होगी।
    रवीन्द्र गंगाधर दशपुतरे

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम पंडित जी
      आपकी यात्रा शुभ हो ,आप लेख पढ़ते रहिएगा ,अपनी राय से अवगत कराने के लिए धन्यवाद

  31. Sangeeta Tripathi says:

    दिशा,
    काफी अंतराल के बाद तुम्हारे इस लेख को पढ़ के बहुत अच्छा लगा । तुम्हारी इस यात्रा में वहाँ का वर्णन, विस्तृत जानकारी व तुम्हारी लेखन शैली …..वाक़ई सराहनीय है ।
    👏👏👏👍
    बस, ऐसे ही आगे भी हमें अच्छी अच्छी जानकारियां देती रहो….😍🙂

    1. Disha Avinash says:

      संगीता तुम प्रतिक्रिया भेजकर यूँ ही तारीफ़ें करती रहो लेखनी मज़बूत होती जायेगी ,धन्यवाद

  32. दीपक शर्मा says:

    आपकी लेखनी के बारे में अब कुछ कहना नहीं अति उत्तम ,अद्भुत ,आपने पूरी यात्रा को एक माला में पिरोया है ऐसा लगा ही नहीं कि आपने यात्रा विमान से की है बल्कि ऐसा लगा कि आपने पदयात्रा कर एक -एक मोती को माला में पिरोया है बद्रीनाथ जी के बारे में आपका विवरण बेहद रोचक है ,केदारनाथ जी के मंदिर की बीस द्वारी संरचना की सुदर्शन चक्र से संबंद्धता के बारे में पहली बार पता चला ,गंगोत्तरी ,यमुनोत्तरी धाम के बारे में भी पढ़कर ज्ञान वृद्धि हुई ,एक अनुरोध है आप अपनी यात्राओं में स्वयं के फोटो भी लगाया कीजिए
    दीपक शर्मा

    1. Disha Avinash says:

      दीपक जी आपने ध्यान से पढ़ा ,अच्छा लगा दिल से धन्यवाद ,रहा सवाल निजी चित्रों के तो पत्रकारिता का उसूल है निजी तस्वीरों से परहेज़ करना चाहिए सो कर रहे हैं आगे देखेंगे

  33. संजीव रतन says:

    झंझवातो में उलझे अशांत मन से अपनी उलझी जिदंगी के पलो में कुछ शान्ती की अभिलाषा के साथ ब्लाग पर नये पोस्ट श्री केदारनाथ “चिन्मयी धाम” को पढ़ना आरंभ किया इसके सभी २९ भागों को पढ़ते-पढते कब अपनी उलझनों को कुछ समय के लिये भुल गया पता ही नही चला।
    ब्लाग पर इस पोस्ट को पढ़ने के बाद —–लगा,
    कई बार इन क्षेत्रों की आध्यात्मिक यात्रा करने बाद भी मुझे एक बार पुन: देवभूमि के दर्शन करना चाहिए।
    संजीव रतन मिश्रा ,बनारस

    1. Disha Avinash says:

      संजीव जी ,तमाम झंझावातों से जूझते हुए भी आप प्रतिक्रिया लिख पाये यही मेरे लिए अहम है आप दर्शन कर ही आइये बहुत धन्यवाद

  34. पंकज द्विवेदी says:

    उच्चस्तरीय वर्णन ,इसमें कोई दो राय नहीं कि देहरादून से लेकर बद्रीनाथ धाम तक की यात्रा को जिस शब्दावली के साथ आपने वर्णित किया है वह शुरूआत से लेकर अंत तक बाँधे रखती है हर दृष्टिकोण से यह पठनीय और शोधपरक है माँ भगवती का आप पर आर्शीवाद है ,जय माँ विंध्यवासिनी
    पंकज द्विवेदी

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम पंडित जी ,आपका ब्लाग को पठनीय कह देना मन को छू गया ,बहुत धन्यवाद

  35. अखिलेश says:

    आपकी यात्रा डायरी पढ़ी ,इस बार भी बहुत बढ़िया लिखा है ,ऐसा लगा चारों धाम घूम लिए।फोटो भी सुंदर हैं भगवान
    ओंकारेश्वर आपको और ऐसी आध्यात्मिक यात्रा कराएँ
    अखिलेश दीक्षित

    1. Disha Avinash says:

      प्रणाम पंडित जी
      आपने ब्लाग में हमेशा की तरह इस बार भी दिलचस्पी दिखायी मुझे बहुत अच्छा लगा

  36. प्रेमशंकर says:

    जा पर कृपा राम की होई ता पर कृपा करें ऐसा कोई।🙏
    बहुत-बहुत साधुवाद *दिशा* बहुत सुंदर लिखा है जिसमें प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन देवभूमि का पौराणिक महत्व और यात्रा से धार्मिक लाभ तीनों का बहुत सुंदर समन्वय किया है, ऐसा लगता है कि पढ़ते पढ़ते मैं स्वयं यात्रा में सम्मिलित था मैंने मात्र 10 ब्लॉक पढ़ें है। तुम बहुत सौभाग्यशाली हो, बाबा केदारनाथ की असीम कृपा तुम्हारे ऊपर है तुमने बाबा के सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन प्राप्त कर लिए है। हम जैसे तो 99 के फेर में ही पड़े हैं। एक बार फिर बहुत-बहुत 🙏धन्यवाद🙏
    प्रेमशंकर पाण्डे

    1. Disha Avinash says:

      प्रेमशंकर ,बहुत धन्यवाद ,तुम कौन से ९९ के फेर में पड़े हो बताया नहीं ,बहरहाल १० आलेख पढ़ चुके हो यह बात बेहद भली लगी ,ऐसे ही हमसे जुड़े रहो बहुत धन्यवाद

  37. Rajendra Kumar Malviya says:

    Bahut hi manohari varnan…

    1. Disha Avinash says:

      राजेन्द्र एक के बाद एक पत्र लिखकर ब्लाग से जुड़कर तारीफ करने के लिए बहुत सारा धन्यवाद

  38. Rajendra Kumar Malviya says:

    Manohari varnan, adbhut…

  39. Sandeep Gour says:

    इंतज़ार की घड़ी समाप्त हुई,,,बाबा केदारनाथ की जय,,,,

    1. Disha Avinash says:

      संदीप ,श्री केदारनाथ की जय ,धन्यवाद

  40. Swati says:

    Congratulations Disha ! After reading your road diary on Kedarnath I felt like I m experiencing everything and I did Darshn of Baba Bholenath you described the whole journey so well 👌🏻keep writing 👍

    1. Disha Avinash says:

      स्वाति हमारे संग संग यात्रा कर प्रतिक्रिया भेजने के लिए दिल से शुक्रिया

  41. Varsha says:

    Excellent,tumhare aalekh me varnan
    Padhkar laga mano kedarnath ke darshan hi ho Gaye.

    1. Disha Avinash says:

      वर्षा तुम्हें मैंने घर बैठे केदारनाथ जी के दर्शन करा दिए यह जानकर बढ़िया लगा शुक्रिया

  42. राजाभाऊ जोशी says:

    उच्चकोटि का अभ्यास ,आपकी भाषा भी उच्चस्तरीय है ,बद्रीनाथ जी का जो वर्णन आपने किया है वह प्रशंसनीय है यह सब कठिन परिश्रम का प्रतिफल है।आपको और आपके परिवार को नव संवत्सर की शुभकामनाएँ
    राजाभाऊ जोशी ,परली

    1. Disha Avinash says:

      जोशी जी ,आपको बहुत धन्यवाद ,आपने अपने विचार साझा किए

  43. Mahesh Chouksey says:

    अपने आसपास के सुंदर परिदृश्य और आपके द्वारा लिखित वृतांत को आत्मसात करके मैं आपको सादर प्रणाम करता हूं ! यह वृतांत जिस प्रकार जीवन में सौंदर्य, आनंद तथा अर्थ को पैदा कर सच्चे ज्ञान को दर्शाता है ! और इन्ही के माध्यम से हम ब्रह्मांड के शक्तिशाली व निपुण परमात्मा को अनूठे ढंग से व्यक्त कर पाते है ! आपका यह आलेख प्रेरणादायक एवं सार्वभौमिक सत्य की विशाल श्रृंखला की गहन विवेचना को प्रस्तुत करता है ! जिसने मुझे सदा बहुत मोहित किया है ! और यही ईश्वर के साथ एकत्व का योग है ! प्रकृति की भव्यता और कला का सौंदर्य, मनुष्य को स्वयं होने का एहसास करवाते है ! जहां मंदिर का पुजारी असफल हो जाता है ! वही एक जागृत कलाकार उस भूले बिसरे संदेश को लोगों तक पहुंचाता है ! जो व्यक्ति सौंदर्य से परिपूर्ण दुर्लभ क्षणों को याद कर सकता है ! वह दुख की घड़ी में भी अपनी स्मृति से प्रेरणा लेकर अपने भीतर स्थित शिवालय में पहुंच सकता है ! आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, हर बार की तरह आपने इस बार भी शिवमय होने में हमारी मदद की इस यात्रा वृतांत की तारीफ शब्दों में नहीं की जा सकती, आगे की यात्रा वृतांत के लिए तहे दिल से प्रतीक्षारत !!!

    1. Disha Avinash says:

      महेश तुमने पहले बहुत रूचि से आलेख पढ़ा फिर उतनी ही श्रद्धा और गंभीरता के साथ प्रतिक्रिया लिखी है जो दिल को भा गयी ,ऐसे ही लिखते रहना बहुत धन्यवाद

  44. kamal dubey says:

    दिशा जी अपने श्री केदारनाथ मंदिर का सविस्तार वर्णन पढ़कर बहुत बढ़िया लगा| गंगोत्तरी ,यमुनोत्तरी धाम के बारे में तथा अन्य धार्मिक स्थल का विवरण अपने बहुत बढ़िया किया है तथा भाषा का उपयोग बहुत बढ़िया किया है आगे भी आपकी लेखनी का इंतजार रहेगा

    1. Disha Avinash says:

      दुबे परिवार इस बार विलम्ब से प्रतिक्रिया कैसे ,बहुत ख़ुशी मिलती है जब आप लोग परिवार के सभी सदस्य साथ बैठकर पढ़ते हैं और फिर एक साथ प्रतिक्रिया भी लिखते हैं अनेक धन्यवाद

  45. ankita dubey says:

    श्री केदारनाथ धाम की यात्रा का वर्णन पढ़कर बहुतअच्छा लगा| भगवन राम , लक्ष्मण, शत्रुघ्न, भरत मंदिर, और अश्रुओं से सिरजे रूद्राक्ष के बारे में हमने आपकी लेखनी के माध्यम से जाना …… भगवन की जटाओ में विराजी माँ गंगा का वर्णन अत्यंत सुन्दर किया गया है भगवन सूर्य की पुत्री यमुना की कथा अत्यधिक रोचक लगी …और साथ में वह की प्रकृतिक विवरण भी बहुत सुन्दर किया है भगवन श्री केदारनाथ जी के मंदिर का सुंदर परिदृश्य और शिवलिंग के रूप में विराजे भगवन शिव का अदभुत मनोहारी वर्णन इतना सुन्दर किया गया है मानो वहा के चलचित्र हमारे सामने हो .. यात्रा का वृतांत पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा आपकी अगली लेखनी का इंतजार रहेगा

    1. Disha Avinash says:

      धन्यवाद अंकिता

  46. jay dubey says:

    श्री केदारनाथ धाम की यात्रा का वर्णन पढ़कर बहुतअच्छा लगा वह के आसपास के सुंदर प्रकृतिक चित्रण अत्यंत सुन्दर किया गया है

    1. Disha Avinash says:

      धन्यवाद जय

  47. nitya dubey says:

    आपका आलेख बहुत ही बढ़िया है

    1. Disha Avinash says:

      धन्यवाद नित्या

  48. Pratishrut says:

    Highly informative and hearttouching observations!Thank you didi for sharing.

    1. Disha Avinash says:

      अरे वाह ,परदेश से ब्लाग की पर प्रतिक्रिया लिखने का समय निकालकर हमारा उत्साह वर्धन करने के लिए तुम्हें भी बहुत धन्यवाद

  49. संतोष पैठनकर says:

    साक्षात् दर्शन की अनुभूति कराता आपका आलेख पढ़ा ,बहुत अच्छा लगा ,मेरा एक सुझाव है आप कभी पंच केदार की यात्रा कर उनके बारे में भी लिखिएगा ,इसी प्रकार लिखते रहिए
    संतोष पैठनकर, एलोरा

    1. Disha Avinash says:

      संतोष जी,आपकी प्रतिक्रिया में पंचकेदार का सुझाव उपयुक्त लगा ,जाना तो इसी बार चाहा था पर मार्ग सुगम नहीं था बर्फ़ से बाधित भी था अगली बार ज़रूर जाऊँगी ,लिखूँगी भी ताकि अपने ब्लाग के पाठकों को शिव जी से जुड़े स्थानों की यात्रा करा सकूँ ,धन्यवाद

  50. सुशील नौटियाल says:

    आपको और आपके लेख को कोटि कोटि नमन् ।
    सुशील नौटियाल

  51. Shrikant says:

    Disha, you are great👏�👏�👏on a personal note, while I am a biiiiiig fan of your command on Hindi language, you may try to write one travel blog in relatively easier hindi. Many of your words chosen to express your thoughts and feelings are beautiful but difficult to understand by us lesser mortals. And we do not get the meaning of such words. This might be limiting your readership to only a few literacy genius. While I believe your blogs should be read by young generation who are not great in hindi vocab. For example, my son 15 year old, could not understand much and did not continue to read.I am and will remain your fan 👍Shrikant Bansal

    1. Disha Avinash says:

      श्रीकांत ,तुम्हारी प्रतिक्रिया में जो बातें कही गयी हैं वो असरदार हैं पर मेरा मन दुविधा में है हिन्दी का नुक़सान पीढ़ी दर पीढ़ी हुआ है तुम भी इससे इत्तफ़ाक़ रखते होगे ,नयी पीढ़ी चाहकर भी पढ़ने को आतुर नहीं है ,जो पीढ़ी पढ़ रही है वह हिन्दी की जानकार है अब मेरे लिए तो दोनों ही ज़रूरी हैं मैं ऐसे में हिन्दी समझने वालों के लिए लिखना श्रेयस्कर समझूँगी जो मुझसे खुद को जोड़ते हैं युवाओं के लिए तो अंग्रेज़ी का अनुवाद है वे उससे खुद ब खुद जुड़ जाएँगे बहरहाल,बहुत धन्यवाद

  52. Nishant vyas says:

    ॐ नम्: शिवाय्:
    हर हर महादेव
    दीर्घ अंतराल के बाद आया आपका देवभूमि उत्तराखण्ड एवं श्री केदारनाथ जी का यह वृत्तान्त मन को शांति एवंआनंद की अनुभूति प्रदान करने वाला रहा। भाषा और शब्दों के चयन दिखाई उदारता से अध्ययन रुचिकर रहा।
    नमस्कार ।

    1. Disha Avinash says:

      निशान्त ,तुमने शब्दों के चयन और भाषा को सराहा यह मेरे लिए बहुत महत्व रखता है धन्यवाद

  53. SUSHIL NAUTIYAL says:

    आज आपका लेख पढ़कर मन को बहुत असीम प्रसन्नता हुई कि मैं आज भी ऐसे लेखकों से जुड़ा हूं जो साहित्य, संस्कृति, हिंदी भाषा के पारखी हैं और धार्मिक यात्राओं को अपनी शब्द माला में पिरो कर हम तक पहुंचा रह हैं उत्तरकाशी / गंगोत्तरी यात्रा का वर्णन एवं आपकी केदार यात्रा के वर्णन को पढ़कर लगा कि आपने बहुत नजदीकी से इन्हें स्पर्श कर महसूस किया है अभिलाषा करता हूं कि आपकी लेखनी ऐसे ही धार्मिक यात्राओं को शब्द माला मे पिरोकर अपने प्रिय जनो,पाठकों को आज के सामाजिक संचार माध्यम के द्वारा उपलब्ध कराते रहेंगे।
    चरैवेति चरैवेति… सादर प्रणाम
    सुशील नौटियाल
    जिला पर्यटन विकास अधिकारी
    रूद्रप्रयाग (उत्तराखंड)।

    1. Disha Avinash says:

      सुशील जी
      आपको अतिशय धन्यवाद आपने अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच समय निकालकर प्रतिक्रिया लिखी ,आपके सहयोग के बिना मेरे लिए पर्वतों को पहचान पाना मुश्किल था,आप कई साहित्यिक शख़्सियतों से जुड़े हैं यह जानकर भी बेहद ख़ुशी हुई पढ़ने लिखने वाले अपने साथियों को हमारे ब्लाग से जोड़ियेगा 🙏
      कोटि कोटि धन्यवाद

  54. Devendra dubey says:

    Kedarnath ka Etna sundar barnan jo aapne bistar ke sath kiya he aap ko bahut bahut sadhhu Bad bhagban siv aap par krapa kare
    Devendra dubey

    1. Disha Avinash says:

      दुबे जी आपको अनेक धन्यवाद ,आपने प्रतिक्रिया लिखकर अपने मन की बात बताई

  55. Amit Sinha says:

    दिशा जी सदैव की भांति आपकी लेखनी शब्दों की तूलिका से चित्रांकन करती है। आपके शब्दों का प्रयोग /चयन लाजवाब होता है। कैदार धाम की यात्रा में आपने शिवमय कर दिया है। केदारनाथ में आई भयंकर प्रलय के बावजूद इस पीठ को आंच नहीं आई थी जो कि इस धाम की ताकत स्वतः प्रदर्शित करताहै। यह बात जरूर है कि केदार के आसपास संस्कृति का अकूत भंडार रहा है। आपने हमें उसके दर्शन करवा दिए हैं। उसके लिए आपका साधुवाद।

    1. Disha Avinash says:

      अमित जी ,आप सौ फ़ीसदी सही हैं कि केदार नाथ धाम की महिमा अपरम्पार है तभी तो इतनी भयंकर विनाश लीला में भी मंदिर को क़तई नुक़सान नहीं पहुँचा ,आप आलेख से शिवमय हो गए समझिए हमारे ब्लाग का उद्देश्य पूरा हो गया ,बहुत धन्यवाद

  56. संजीव सेमवाल says:

    श्री गंगा जी
    श्रीमती दिशा न गंगोत्री का विषय मां जु अपणा लेखा मां लिखी उ वास्तव मां साहित्यक वर्णन को एक सुन्दर प्रमाण छ
    ऊ का शब्द विन्यास एवं स्थानीय संस्कृति समझ उतम कोटी वास्तव मां श्रीमती दिशा धन्यवाद की पात्र छ जु मूल रूप सी भोपाली निवासी एवं हिन्दी भाषी होणा का बाद भी स्थानीय शब्दों कु एव यख का रहन सहन व रीति रिवाज डांडी कांडी पहाड़ियो का सुन्दर वर्णन वास्वमा क्षेत्र का
    प्रति प्रेम कु उदारण छ
    क्षेत्रीय लोग एवम गंगोत्री तीर्थक रावल पुजारी ऊ का उज्जवल भविष्य एवं दीर्धायु की कामना भगवती गंगा जी सी करदा

    जय गंगा मैया की
    पं. संजीव सेमवाल
    रावल गंगोत्री मन्दीर
    पूर्व अध्यक्ष गंगोत्री मन्दीर

    1. Disha Avinash says:

      पंडित जी
      आपके पत्र में गढ़वाली की मिठास है बहुत अच्छा लगा आपने गढ़वाली भाषा में प्रतिक्रिया लिखी और आलेख की प्रशंसा की,आनंद आ गया ,जितना सुन्दर आपका प्रदेश उतनी ही भाव प्रधान आपकी प्रादेशिक भाषा है ,आपके भरपूर सहयोग के लिए आपकी तहे दिल से आभारी हूँ ,गंगा मैया की जय 🙏

  57. Vivekanand says:

    बहुत ही सुंदर वर्णन । हालाँकि अभी सम्पूर्ण लेख नहीं पढ़ पाया हूँ पर बहुत गहन और आकर्षक है l इतना संजीव चित्रण है की हमको भी साक्षात दर्शन की अनुभूति हो रही है l इतनी अछी जानकारी के लिए धन्यवाद l

    1. Disha Avinash says:

      विवेकानंद जी ,आपने समय निकालकर ब्लाग पढ़ा यही मेरे लिए बहुत मायने रखता है आगे भी समय निकालकर पढ़ियेगा बहुत धन्यवाद

  58. शिवाकांत बाजपेई says:

    हमेशा की तरह उम्दा लेखन….. धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्रकृति का रोचक शाब्दिक चित्रण ….सबसे अलग खान-पान विशेषकर मोहन पूरी वाले का ज़िक्र पुरानी स्मृतियों को कुरेदता है…..अलहदा लेखन के लिए बधाई…..

    1. Disha Avinash says:

      शिवाकांत जी ,आप जैसे उच्चकोटि के लेखक और पुराविशेषज्ञ की ओर से मिली सराहना ने मुझे परम संतुष्टि दी है ,अतिशय धन्यवाद🙏

  59. Rahul says:

    Mem, aapne jis trh se kedarnath yatra ka sjeev vardan kiya hai wo adbhut hai. Aapki bhasha shEli me bhavo evm anubhavo ko sjeevta pradan krne ki adbhut ,anokhi kshamta hai. Esa lga mano khud wha yatra kr aae ho. Aapne n keval kedarnath darshan ko vrn wnha ki poranikta evm prachin mahatv to b hm tk smpreshit kiya .uske lie koti koti dhanyavad.

    1. Disha Avinash says:

      राहुल ,बहुत बढ़िया लगा ,तुमने अपने सुविचारों से अवगत कराया ,बहुत धन्यवाद

  60. Shyam says:

    जय श्री केदारनाथः दीदी नमस्कार बहुत ही अच्छा लगा पढकर, नया अनुभव मिला

    1. Disha Avinash says:

      श्याम ,पत्र के लिए धन्यवाद

  61. प्रदीप त्रिपाठी says:

    सजीव चित्रण गंगा जी की आरती यमुनोत्री धाम का वर्णन केदारनाथ धाम की यात्रा तक का उत्कृष्ट और अद्वितीय वर्णन अप्रतिम अदभुत अत्यंत सराहनीय कार्य

    1. Disha Avinash says:

      प्रदीप जी, वन विभाग की व्यस्तताओं के बीच समय निकालकर आलेख को पढ़ने ,रूचि अनुरूप पाकर प्रतिक्रिया लिखने के लिए आपका धन्यवाद

  62. O P Mishra says:

    Disha Bahanji,
    I read your road dairies of Dehradun, Rishikesh, Haridwar, Badrinath, Kedarnath, Yamunotri and Gangotri. It was in an excellent details with 29 pages along with respective illustrations, descriptions, about the importance of rituals, varieties of medicines, rudraksha trees, names of river Ganga which is an unique example for completing your road dairies. Congratulations! My suggestion is to divide your this blog into three parts so that everybody can read easily. Your style of writing is surely of very high standard and is good to become example for top Hindi and history scholars. I wish you, my sister, takes such proud position that will make me so proud. Hearty wishes to you once again and thank you very much.
    It was wonderful to see that you again highlighted minute-to-minute study of the nature, of the people, family history of Semwals and other pandit and your whole journey with the helicopter team right from starting to all the religious Centers.
    You explained the kachauri of haridwar, and also the problems of the devotees in the old times and the cruel winter season people face there. You have done deep research as a senior and serious scholar. Once again I can say your writing is inspiring as of our senior scholars like Prof.B Subbarao who worked with Dr H D Shankalia of deccan college. I will share my further critical analysis after reading your all road dairies blogs. Thanks.

    O P Mishra
    (Sr. Archeologist)
    Bhopal

    1. Disha Avinash says:

      मिश्रा सर
      आपकी सराहना मिल गई ,आप जैसे दिग्गज पुरातत्व विशेषज्ञ ने आलेख को पठनीय और शोधपरक पाया जानकर अत्यन्त प्रसन्नता हुई ,आप का मार्गदर्शन आगे भी मिलता रहे यही कामना है ,अतिशय धन्यवाद 🙏

  63. Arcana tiwari says:

    दिशा मुझे बहुत दिनों से ग्यारहवे ज्योतिर्लिंग केदारनाथ की यात्रा की दिली तमन्ना थी पर शायद भोले बाबा की अभी मुझ पर कृपादृष्टि नही हुई पर तुम्हारे इस आलेख ने मुझे केदारनाथ के साथ साथ गंगोतरी यमुनोत्री व बद्रीनाथ की भी यात्रा करा दी तुम्हारी लेखनी से मैं बहुत अभिभूत हूलगता है भोलेनाथ ने पहले तुम्हारे माध्यम से मानसिक व आध्यात्मिक यात्रा करा अपना आशीर्वाद दे दिया है चारों धाम की इतनी गूढ़ व विस्तार से जानकारी देने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Disha Avinash says:

      अर्चना ,बहुत बढ़िया लगता है जब तुम मुझे सराहती हो ,तुमने मेरे आलेख के माध्यम से यात्रा कर ली मेरा उद्देश्य पूरा हो गया ,मेरी आध्यात्मिक यात्रा से इसी तरह जुड़े रहना ,बहुत धन्यवाद

  64. Bhikhanbhai M. Ram says:

    आपकी क़लम हिन्दी के प्रति रूचि पैदा करती है और केदारनाथ जी की यात्रा भी बख़ूबी करा देती है आपकी लेखन शैली बहन मनोहारी है यात्रा की थकान भी नहीं होती बल्कि बड़ा ही आनंद दिलाती है जय शिव शंकर

  65. इरा मिश्रा says:

    Dishaji,
    Apki lekhni aur nazar se hum sabko bhi dershan ka saubhagya milta rahey, mahadev ki kripa bani rahey.
    इरा मिश्रा कानपुर

  66. Premchandra TiWari says:

    Long ago I have planned to visit Badrinath and Kedaranath with my family and mother.I completed the journey to Badrinath very easily but on way to Kedarnath my mother who was nearly 70 got seriously ill.we came back to Haridwar and stayed there till my mother was able to come back to Lucknow.I preferred to take of my mother,and this gave me the satisfaction of visiting Kedarnath.By the grace of the Bholenath I got your blog and this gave me not only the real view of temple but also gave me the pleasure of the journey.Had I really gone there ,I have not able to know so many things such as history of the temple,various traditions and surrounding culture I shared to one of my friends who visits Kedarnath every year.On the event of Kedarnath tragedy,he was there with his family but by the grace of the Bholenath they escaped narrowly.He also admitted that he was not aware of so many facts.This way you deserve loud applous my my family and my friends.God bless you for this noble deed.

  67. आभा शर्मा says:

    अद्भुत ,शब्द नहीं है मेरे पास साक्षात शंकर जी की प्रेरणा ,तुम्हारी लेखनी के साथ हैं मन और मस्तिष्क से मैंने तुम्हारी अभिनव शैली के साथ यात्रा का आनंद लिया कई स्थानों पर श्रद्धा स्वरूप मैं नतमस्तक स्थिति में रही एक बार जो तुम्हारा ब्लाग पढ़ने बैठी जिज्ञासा और एकाग्रता बढ़ती ही गई मैं भगवान शंकर से प्रार्थना करती हूँ तुम एेसे ही शंकर जी के धामों के संबंध में लिखती रहो और अधिक सेअधिक लोग तुम्हारे ब्लाग से जुड़ते रहें ऐेसे दत्तचित्त हो कर मैंने पहली बार कोई ब्लाग का आलेख पढ़ा है और पढ़ने के बाद मेरे मन और मस्तिष्क में आत्मिक शान्ति थी अंजुरी में गंगा जल और एक शिव धाम से लौटकर आने का सुखद अनुभव !!!
    आभा शर्मा