लोक धारणा : राजा विक्रमादित्य के पिता राजा गन्धर्वसेन की गन्धर्वपुरी

राजा विक्रमादित्य

गन्धर्वसेन मंदिर में विराजमान गर्दभ रूपी राजा जी की प्रतिमा परमार क़ालीन मंदिर की मूर्तियों में शिल्प सौन्दर्य 

अब मन में कौतूहल था राजा गंधर्वसेन के मंदिर को देखने का हम आगे बढ़े और परमारकालीन मंदिर के सामुख्य खड़े हो गये। यहां हमारी भेट राजा जी मंदिर के पुजारी श्री रमेश चन्द्र शर्मा जी से हुई उन्होंने बताया कि देव तुल्य राजा गंधर्व सेन का स्वर्ग से आवागमन निरंतर रहता हैं मंदिर के ऊपर चूहापाली अर्थात परस्पर शत्रुता रखने वाले सर्प व चूहे का विषम सामंजस्य रहता है यह भी पता चला लोक आस्था है कि सुबह-सुबह चूहा और सर्प अंटे खेलेते हैं। स्वर्णआभा लिए मूंछधारी सर्प और चूहे की लेंडिया दिखायी देती हैं। अमावस्या के दिन यहां विशेष पूजन की व्यवस्था रहती है। यहीं समस्त आत्माओं के ईश्वर महेश्वर लिंगरूप में विराजे हैं। शिव शाब्दिक रूप से ही कलयाणवाची हैं उनकी प्रतिष्ठा के कारण भी मंदिर में नित्य सर्वकालिक स्मरण स्तवन और संकीर्तन विधान चलता रहता है।

लोक तो लोक है लोक साहित्य जिसे आत्मीयता के साथ स्वीकारता है वही सर्वस्वीकृत और सर्वमान्य सत्य होता है। लोक नायक की निर्विकारिता सत्यवादिता और विशाल हृदयता उसे ईष्ट के समकक्ष लाकर खड़ा करती है। हम पूर्व मुखी मंदिर में स्थापित गर्दभ रूपी महराज गन्धर्व सेन की प्रतिमा के समक्ष प्रणवत खड़े हुए थे परमार कालीन मंदिर की भव्यता को देख कर मन मंथन कर रहा था कि परमारों ने 500 वर्षों तक मालवा सहित आस पास के जनपदों में शासन किया पूर्व में विदिशा से उदयपुर तक पश्चिम में काठियावाड़ तक परमारों के आधिपत्य वाले लगभग 47760 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में पुरातात्विक महत्व के अनेक साहित्यिक साक्ष्य मिलते हैं। परमार काल मुख्यतः शैव,शाक्त, वैष्णव और जैन सम्प्रदायों का केन्द्र था। इसीलिए गंधर्वपुरी के राजा जी मंदिर को निर्मिति के आधार पर पुराविद् 11 वीं सदी के उत्तरार्ध और 12वीं सदी के पूर्वार्द्ध का परमार कालीन बताते हैं। मालवा की सुप्रसिद्ध वास्तुविद्या भूमिज शैली में निबद्ध इस शिवालय का भूविन्यास कभी गर्भगृह, अंतराल, सभामण्डप, अर्धमण्डप से युक्त रहा होगा लेकिन अब गर्भगृह ही अपने मूलस्वरूप में शेष है। बलुआ प्रस्तर से निर्मित पूर्वमूखी इस मंदिर का अधिष्ठान संधाट भी अपने मौलिक स्वरूप में है।

चूहा पाली की अनोखी घटना पंडित रमेश चंद्र शर्मा द्वारा 

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Comments

  1. O P Mishra says:

    Wow! Well written and finely executed. You proved that Gardbhilla was Vikramaditya’s father. You are on the footsteps of Mrs devala Mitra DGA SI. Taking forward the interest in the field of art culture,and archaeology.
    Congratulations!

  2. दिनेश झाला says:

    काफी समय बाद आपकी गन्धर्वपुरी पर रचना पढने के बाद बहुत आनंद आ गया धन्यवाद आभार।
    -दिनेश झाला शाजापुर ।🙏🏻🙏🏻👏👏

  3. Shyam says:

    दीदी नमस्कार.केसर बाई के लोकगीत मे आनंद आ गया आपके द्वारा हमे कई सारी एतिहासिक जानकरी प्राप्त हुई आपका आभार.आपको बधाई.

  4. वीरेंद्र सिंह says:

    ऊँ नमः शिवाय आपका नया ब्लाग पढ़ कर अति प्रसन्नता हुई परन्तु उससे अधिक जिज्ञासा बढ़ गयी गन्धर्व पुरी के बारे में एक ऐसे प्रतापी राजा और वंश के बारे में जिन्होंने परमार वंश की नीव रखी जिनका साम्राज्य मध्य भारत से दक्षिण भारत तक फैला हुआ था जिनके वंशज एक महान सम्राट विक्रमादित्य हुए तो दूसरे राजा भर्तृहरि जिन्होने हिन्दू धर्म का मार्ग दर्शन किया, सबसे बड़ी बात जो आपके शोध से सामने आयी कि किस प्रकार पहले के इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास के साथ घोर अन्याय किया है आपने जिस तरह से पूरी प्रमाणिकता के साथ तथ्यों को सामने लाने का प्रयास किया है शायद इससे आने वाले समय में भारत का प्राचीन इतिहास पुनः एक बार ऐसे ही शोध के साथ देश दुनिया के सामने लाने की आवश्यकता है, आज की जो युवा पीढ़ी जिसको अपने गौरव शाली इतिहास को ना तो बताया गया और ना तो दिखाया गया ऐसे छात्रों के लिए आपका ये लेख किसी अमूल्य खजाने से कम नहीं हैं पर मेरा उन छात्रों से भी निवेदन है कि वे आपका लेख सिर्फ पढ़े नहीं बल्कि गंधर्वपुरी आकर स्वयं अवलोकन भी करे ।इतिहास में प्रामाणीकता सिर्फ किताबों के अन्दर नहीं बल्कि भारत के लोककथाओं में व लौकक्तियो में भी भरे पड़े हैं । जिसको ये पश्चिमी मानसिकता वाले इतिहासकारों ने बड़ी चालाकी से नकारने की कोशिश की । मेरे विचार से आपका ये लेख राजपूत वंश में परमार वंश को और अधिक गहराई से जानने में सहायक सिद्ध होगा ।गंधर्वपुरी को सरकार को विश्व धरोहर स्थल व पर्यटक स्थल घोषित करना चाहिए जिससे भारतीय अपने गौरव शाली इतिहास को जान सके व राज्य का भी आर्थिक विकास हो ।

  5. कमलेश बुन्देला says:

    अति सुन्दर जानकारी
    कमलेश बुन्देला

  6. दयाराम सिरोलिया says:

    बहुत ख़ूब दीदी
    दयाराम सिरोलिया देवास