निमाड़ की रसवन्ती लोक नाट्य गम्मत शैली, ओडिसी नृत्य में शिव और शिवा की अभिन्नता

हमने पाया कि नृत्य और गीत प्राणतत्व से परिपूर्ण पटेल पटलन गम्मत लोकविधा में जान फूंकने का काम मुख्यतः शोभाराम जी ने ही किया। हमने उनसे सम्पर्क साधा और गम्मत को समझने का प्रयास किया। अपने पिता श्री आनंदराम वासुरे जो कि प्रख्यात राम दंगल गायक हुए से विरासत में मिली गम्मत लोक नाट्य कला को गांव-गांव में जनप्रिय बनाने वाले शोभाराम वासुरे जी ने हमें बताया कि स्वर, ताल, लय, भाव तथा भूमिका के समागम से निर्मित यह पारंपरिक रंगकर्म निमाड़ अंचल में विशेष रूप से दशहरे पूर्व की नवरात्रि, गणगौर और होली के अवसर पर चौपाल और चौराहों पर मुक्ताकाशी रंगस्थल पर किया जाता है। मुख्यतः लोकरंजन के उद्देश्य से आयोजित होने वाली गम्मतों में सेठ -सेठानी, फजीतों, जतरा, सत्यनारायण कथा, बरसूंबिया (नौकर-मेम साब), उड़द की दाल, घनचक्कर आदि शीर्षक से सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार कर लोकधर्मी मर्यादाओं की रक्षा के प्रति दर्शकों को सचेत किया जाता है। शोभाराम जी बताते हैं कि वे आशुकवि हैं इसलिए मंच से संवाद, गीत, प्रहसन आवश्यकतानुसार तत्काल रच लेते हैं। तात्कालिकता ही गम्मत का वैशिष्ट्य भी है।  40 साल से अधिक गम्मतों से लोगों का मन बहलाने वाले शोभाराम जी स्थानीय स्तर पर पत्रकारिता भी करते हैं। वे बताते हैं कि गम्मत का आरंभ पारंपरिक पूजन पाठ से ही होता है। कलश पूजा, श्रीफल इत्यादि भेंट के उपरांत गणपति का स्वांग खेल के पूर्व में लाकर गणपति की स्तुति की जाती है। गायन व नृत्य प्रधान लोकनाट्य गम्मत में हमने पाया कि शोभाराम जी के स्वर की पकड़, सधा हुआ गला और उठान कर्णप्रिय भैरवी, अहीर भैरव, मालकोस और यमन रागिनी आधारित लोकगीतों की गायकी से माधुर्य प्रदान कर रही थी। हमने उनसे इस संदर्भ में पूछताछ की तो 250 से अधिक निमाड़ी बारहमासी भक्ति परक गीतों के कैसेट और सीडी बनाकर बड़वानी, खरगोन, अलीराजपुर, जोबट, महेश्वर, बड़वाह के ग्राम्यांचलों ने लोगों के दृदय में बसने वाले शोभाराम जी बोले उनके लिखे “लाल-लाल बैल्या, म्हारा घणी मका पियरियो अच्छों लग, हऊं नी जाऊं सासरियों और साहिबा मका लाइद करण फूल झूमको” लोकगीतों को यहां की जनता रुच रुच के सुनती आई है। निमाड़ी बोली संस्कृति, प्रथा व लोकविश्वासों वाले ऐसे गीत और नृत्य वे निःशुल्क बच्चों को सिखाते भी हैं। जिससे नयी पीढ़ी निमाड़ की गम्मतें देखने सुनने में रूचि ले।

 

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