निमाड़ की रसवन्ती लोक नाट्य गम्मत शैली, ओडिसी नृत्य में शिव और शिवा की अभिन्नता

ओडिसी नृत्य और छाऊ (मयूरभंज) के सम्मिश्रण वाली श्री अशोक घोसाल की सांगीतिक प्रस्तुति

जिस कला में मन रम जाये वह तृप्तिदायी होती है ऐसी परितृप्ति को हमनें भोपाल स्थित जनजातीय संग्रहालय के सभागार में प्रदर्शित ओडिसी नृत्य और छाऊ (मयूरभंज) के सम्मिश्रण वाली श्री अशोक घोसाल की सांगीतिक प्रस्तुति में अनुभूत किया। नृत्य प्रवीण अशोक जी की प्रयोगधर्मिता ओम नमः शिवाय के प्रदर्शन में सामने आयी। अमित अपरिणामी शक्तिमान शिव तथा परिणामी अंचित्य शक्ति शिवा की अभिन्नता दर्शाती इस प्रथम प्रस्तुति में भाव भंगिमाओं और आंगिक मुद्राओं से सृजित व्यूह रचना को दर्शकों की अपार सराहना मिली। उड़ीसा के भुवनेश्वर में संचालित नृत्यशाला संस्था के 10 प्रशिक्षुओं और सहधर्मिणि के साथ मंच पर अशोक घोसाल ने त्रिभंग में हस्त पद संचालन के संतुलित सामंजस्य के साथ अनन्त स्वरूप शिव जो कल्याणमय हैं, प्रशान्त हैं, अमृत हैं, ब्रम्ह हैं, निखिल ब्रम्हाण्ड का मूल कारण हैं, विभु हैं, चिदानंद हैं को भलि भांति व्याख्यायित किया। अगली प्रस्तुति ‘यशोधरा’ में भगवान गौतम बुद्ध और उनके आत्म बोध का ओडिसी नृत्य की शास्त्रीयता और छाऊ नृत्य की सांकेतिक अभिव्यक्तियों वाला अद्भुत तालमेल प्रदर्शित हुआ। वंदिता, सृष्टि, रघुनाथ, सरोज, अर्पणा, उमरेश, निम्नेश ने अपनी नृत्य प्रतिभा से मंचीय प्रस्तुति को प्रशंसनीय बना दिया।