राजस्थान की लोकनाट्य कुचामणि ख्याल शैली और महाराष्ट्र का लावणी नृत्य

संगीत नाटक अकादमी सम्मान प्राप्त बंशीलाल जी के मारवाड़ी खेलों का प्रारंभ बाला जी की स्तुति के साथ हुआ और समापन शिव के जयकारे के साथ हुआ। कुचामन निवासी कवि लच्छीराम द्वारा रचित इस लोकनाट्य में जब यह संवाद आता है कवित्त में  सुनोरी कमोद प्यारी, चालण की करो त्यारी, फूट्यो दरियाव भारी, तांके नई पाज है। मात घोल घात, तात ने जणाई बात, गई हात, भात, हूं को राज है।। दसरथ ने सीकाय, सुती कैकेई रिसाय, राम ने दीनु खीनाय, बोई दिन आज है।  केत कवि लछीराम, छोड़ी धन धाम बाम, धारा नगरी में रीया आपणों अकाज है।  तब  प्रेक्षागृह में उपस्थित दर्शक भाव विव्हल हो जाता है।  मूलतः मांड गायकी में सिद्धहस्त ये कलाकार सोरठ, कालिंगड़ा, श्याम कल्याण, बिलावल रागों में निबद्ध रंगतों से कानों में मिश्री घोल गये। चार दशकों से अधिक समय से कुचामणी ख्याल परंपरा की लोकधर्मिता को अक्षुण्ण रखने वाले 80 बसंत पार कर चुके बंशीलाल जी उर्फ बशीर मोहम्मद द्वारा निर्देशित इस लोक नाट्य की प्रस्तुति में शौकत खिलाड़ी माजिद, यायूब, मांगीलाल, छोटू, कालू खुर्दा, प्रकाश, शाहरूख झुम्मापुरी, मिट्टू की प्रशंसनीय लोकगायकी और अभिनय कौशल ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। इससे पूर्व उदयपुर के पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा कूचामणी ख्याल परंपरा में उल्लेखनीय अवदान हेतु सम्मानित बंशी खेलवाले के नाम से प्रसिद्ध श्री बंशी उर्फ बशीर मोहम्मद के निर्देशत्व में अमर सिंह राठौड़, विक्रमजीत, गोगा चैहान, राजा हरीशचंद्र, नौटंकी शहजादा, राजा मोरध्वज, राजा भरतहरी, खींवची आमल दे, पारस पीताम्बरी, राव डिमल सोटी इत्यादि कथानक राजस्थान ही नहीं देश-विदेश के अनेक दर्शकों के हृदय में स्थान बनाने में सफल रहे हैं। 12 वर्ष की आयु में नंदौती गांव के पंडित बद्रीप्रसाद दिवाकर की रामलीलाओं से अपनी कलायात्रा प्रारम्भ करने वाले बंशीलाल जी ने कभी हाथरसी ख्यालों में हंसोड़ और महिला पात्रों की भूमिकाएं निभाकर कचामणि ख्याल परंपरा के क्षेत्र में कदम रखा था। तब लगभग दो शतक पुरानी कुचामन की यह ख्याल परंपरा अपनी ख्याति के उत्कर्षकाल में थी, लोकरंजन के उद्देश्य से रमने वाले दर्शकों की भी कमी नहीं थी।

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Comments

  1. राम जूनागढ़ says:

    લોકનૃત્ય કે બારે મે આપ બહુત બઢીયા કામ કર રહી હૈ.
    આપકી લેખનશૈલી ભી બહતે જલ કી તરહ નિરાલી ઔર લાવણી નૃત્ય જૈસી લાવણ્યમય હૈ.
    મેરા સુઝાવ હૈ કી આપ સભી કલાનૃત્ય કે બારે મે એક બુક પ્રકાશિત કરે.
    બહુત સુંદર શૈલી મે આપ મોતી જૈસા કાર્ય કર રહી હો.
    ધન્યવાદ.