देवबल्ड़ा के मंदिरों की पुनर्निर्मिति से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

यात्रा की शुरुआत – देवास और सीहोर जिलों की सीमा (जिसे ग्रामीणजन सरहद्दी पुकारते हैं) में स्थित देवबल्ड़ा

लीजिये! आकाश के सुन्दर क्षितिज पर आ विराजे हैं सविता भगवान और हम भोपाल इंदौर राजमार्ग क्रमांक 18 पर भोपाल से  125 कि.मी. दूर स्थित विंध्यांचल पर्वत माला के नाभिस्थान और नेवज नदी के उद्गम स्थल देवबल्ड़ा के परमारकालीन मंदिर संकुल के अन्वीक्षण की उद्देश्य सिद्धि यात्रा पर निकले हैं। देवास और सीहोर जिलों की परिमा (जिसे ग्रामीणजन सरहद्दी पुकारते हैं) में स्थित देवबल्ड़ा का पहुँच मार्ग मालवा  को श्रीसंपन्न बनाने वाली सिंचाई की बारहमासी प्राणपद नदियों के दिग्दर्शन कराता चलता  है। सोंडा गांव के निकट अजनास  नदी, पतनास और पार्वती नदियों का संगमन, निर्विन्ध्या (पौराणिक नामधेय) नेवज नदी का नैरन्तर्य, डोडी के निकट दूधि नदी से अभिसिंचित सजल धरा में मार्ग के दोनों ओर लहलहाते मालव शक्ति और तेजस प्रजातियों के गेहूं के दर्शी बने हम फंदा, कोटरी, अमलाय, आष्टा, वेदाखेड़ी और सियाखेड़ी  होते हुए मेहतवाड़ा पहुँच गए थे। राजमार्ग से उतरकर गाँव का महात्मा गाँधी मार्ग यूकेलिप्टस के ऊँचे पूरे तने हुए वृक्षों की पंक्तियों के बीच से हमें जावर तहसील के ग्राम भानाखेड़ी में ग्राम पंचायत सचिव रहे श्री जीवन सिंह ठाकुर के घर तक ले आया। उन्हीं के साथ गाँव के कर्मप्रधान जीवन और सलोने ग्राम्य परिवेश की दृश्यावलियों को नैनों में बसाते हुए हम देवबल्ड़ा की ओर बढ़े। देवबल्ड़ा पहुंचने का एक और रास्ता सोनकच्छ से दौलतपुर होकर भी जाता है पर हमने आष्टा वाला मार्ग चुना, सघन अरण्य क्षेत्र बीलपान से तीन किमी दूर पश्चिम दिशा में देवबल्ड़ा का कच्चा संकरा मार्ग खाखरा, टेमरू, साजड़, धावड़ा, मोहिनी, पीपल, बबूल, कदलिया, कड़ा, नीम, बिल्ली, (विल्ब पत्रों के वृक्ष को बिल्ली पुकारा जाता है ) बेकल, करौंदी के वृक्षों से आच्छादित दिखाई दिया। हम जिस क्षेत्र में परिभ्रमण कर रहे थे वह पार्दीखेड़ा के 1030594 हेक्टेयर और चौबारा जागीर के 6880390 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तीर्ण जंगल का हिस्सा था।

भोपाल से सीहोर जिले के बीच विंध्य पर्वत गिरियों से घिरे देवबल्ड़ा की यात्रा

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Comments

  1. O.P. Mishra, Bhopal says:

    Madamji, excellent matter.you have covered all important historic sites around deobadla.your matter is very useful to local administration who needs historical background regarding cultural and folk songs bhakti feet remind the continuity of the religion. Ramesh Yadav has done an excellent job and justice for the paramara site Devbadla. Dr. Tejsingh Sendhava was a devoted person who did his Ph.D. and still, he is keen on the historic and cultural development of this region. You deserve congratulations and appreciations to work and takin interviews even with the scholar’s but also who is associated with this region. The source of the river and its information is also useful.on the centenary of Dr v s Wakankar this remembers his visit to the region.nature and social study will help for future generations.thanks for giving the details of temple architecture and information of the unique sculptures of devbadla.good information for new archaeological researchers. Thanks.

  2. ललित शर्मा, महाराणा कुम्भा इतिहास अलंकरण, झालाबाड़ (राजस्थान) says:

    अभिमत

    लोककथा, इतिहास और पर्यटन पर केन्द्रित ‘ब्लाग’ ‘देवबल्ड़ा’ क्षेत्र का वर्णन ब्लाग रोड मैप लेखिका दिशा अविनाश शर्मा (भोपाल) की नवीनता का ऐसा प्रतिमान है जो मालवा के लोक साहित्य, पर्यटन को महत्वपूर्ण दिशा देता है।
    यहां के मन्दिरों के स्थापत्य के पुराकला वालें भागों को उन्होंने गहनता से छुवा है। उन्हें पढ़कर मन्दिर विज्ञान को समझा जा सकता है। क्षेत्रीय धरोहरों की स्थापना, कला, गाथायें तथा वहां की हरितिमा प्रकृति को पढ़कर पर्यटक दौड़ पड़ता हैं। अनेक लोक गायकों की भजनावलियों के साथ पुराविदों के साक्षात्कार एवं देवबल्ड़ा के विहंगम दृश्य ब्लाग को मनोरम बनाते हैं। यह क्षेत्र परमारों का कलात्मक तीर्थ क्षेत्र रहा। डाॅ. वाकणकर ने इसको जग जाहिर किया तथा आज के दौर में दिशा शर्मा ने ब्लाग के माध्यम से हमारे समक्ष प्रकाशित किया। उन्होंने मालवा भूमि के जिन भी स्थलों के ब्लाग लिखे उनमें लोक के महत्व के साथ पर्यटन, पर्यावरण तथा पुराकला को जोड़ा है। वे सदैव आगे बढ़ती रहें- मालवा की अर्चना में निरत रहें – यहीं समय से कामना है।

  3. जगदीश भावसार, शाजापुर says:

    भूली बिसरी लोककला, स्थापत्य, प्रशासक -परंपरा, पर्यावरण एवं पर्यटन संभावना की पथ प्रदर्शक चिंतनशील प्रस्तुति । मंगलकामनाएं!

  4. आर सी ठाकुर, महिदपुर says:

    👏👏👏👏👌बहुत ही अच्छा!

  5. वर्षा नालमे, अजमेर says:

    आप बहुत अच्छा लिखती हैं, पता ही नही था हमारे आसपास इतनी सुन्दर और historical जगह है. आप लोगो की मेहनत को नमन 💐😊

  6. संजय शर्मा, भोपाल says:

    बहुत बढ़िया लेखन

  7. दिनेश झाला, शाजापुर,(गंधर्वपुरी,) says:

    स्व डॉ काटजू पूर्व गृहमंत्री जी के द्वारा देवास जिले (गंधर्वपुरी)के पुरातत्व सम्बंधित योजनाओं में काफी रुचि ली गई थी,उन्ही के सपनो को आप साकार कर रही है।बहुत बहुत धन्यवाद, आभार।

  8. प्रदीप says:

    आपका यह लेख पढ़कर मन आनंदित हुआ। आप अपने आप मे एक शब्दावली हैं।मौलिकता और आलौकिकता से प्रतिबिंबित लेख………..

    1. Sangeeta Tripathi says:

      बहुत सुंदर जानकारी । ये हमारे पास ही है और हमें पता ही नही, !!
      दिशा, तुम्हारी लेखनी का तो जवाब ही नहीं । बस थोड़ा छोटा लिखा कर बहन, बहुत देर लगती है पढ़ने में 🙏😄😄

  9. जीतेन्द्र सिंह ठाकुर, तालोद says:

    देव बल्डा के ऊपर आपके द्वारा परमार कालीन मन्दिरो के ऊपर जो लेख लिखा गया वह भारतीय संस्कृति को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत जैसा कार्य किया जा रहा है वह सरहानी योग्य हैं.

  10. नारायण व्यास , भोपाल says:

    आपका लेख देखा। बहुत सुँदर लिखा है। देवबल्डा नाम से ऐसा लगता है कहीं आसपास बौद्ध स्थल या स्तूप के अवशेष होना चाहिए।

  11. Mahendra Singh Jat says:

    आपकी अविरल यात्रा और अथक परिश्रम ही हमें ऐसे अनजान स्थलों की जानकारी हमें सुलभ रूप से प्रदान होती है ! धन्यवाद