शिवमय स्पंदन की जागृत धरा : ओंकारममलेश्वर ज्योतिर्लिंग तीर्थ

शिवपुरी स्थित ओंकारेश्वर मंदिर का विहंगम दृश्य

वृत्तायत शतश्रृंग भूमिज शैली में मंदिर की निर्मिति, महामण्डप से अर्धमण्डप में प्रवेश वाले द्वार पर पंचशाखाएं उत्कीर्ण 

मंदिर में आस्तिकों की भीड़ बढ़ने लगी थी। हमने विशिष्ट अतिथि हेतु निर्धारित 300 रू. का टिकिट लिया और गर्भगृह में प्रतिष्ठापित महामृत्युन्जय भगवान् के वंदन की बाट जोहने लगे। अवसर का लाभ लेते हुए हमने ज्ञानदाता श्री अखिलेश दीक्षित से अतिप्राकृत ओंकार शिव की उत्पत्ति के संबंध में ज्ञानार्जन की उत्सुक्ता व्यक्त की। उन्होंने शिवपुराण की आख्यायिका का दृष्टान्त देकर बताया कि देवऋषि नारद गोकर्ण महाबलेश्वर से विंध्य पर्वत पर आये आधिदैवत्वरूप में विन्ध्य ने देवऋषि का स्वागत सत्कार किया लेकिन नारद द्वारा उपहासात्मक शैली में विंध्य से ये कहने पर कि तुम सर्वश्रेष्ठ नहीं हो तुम्हारे शिखर सुमेरू पर्वत के शिखरों की भांति देवलोक तक नहीं पहुंचे हैं। यह सुनकर आत्मग्लानि से व्यथित विंध्य ने अपनी न्यूनता से मुक्ति हेतु शंभु को षड्मास के अखण्ड तपोबल से प्रसन्न किया। उन्होंने ओंकार शिव से देवताओं व ऋषियों सहित यहीं निवास करने की याचना की। उनका निवेदन स्वीकार कर महेश्वर स्वतः सदा के लिए यहीं विद्यमान हो गये।
एक अन्य कथानक में सतयुग में देवासुर संग्राम में कंकाल कलिकेय और कालक नामक दैत्यों से संत्रस्त देवगण रक्षा हेतु गुरू बृहस्पति की शरण में गऐ ऐसा प्रसंग मिलता है। जब उनकी सुझाई युक्ति भी काम नहीं आई तब सप्त पाताल भेदी महाप्रलय की अग्नि सृदश एक लिंग का प्राकट्य हुआ लिंग रूप में प्रोद्भूत सदाशिव ने ब्रह्मा से निर्भीक होकर यज्ञ करने कहा। ब्रह्मा के प्रथम यज्ञ से राक्षस भाग खड़े हुए और सौम्य यज्ञ से देवगण कोटितीर्थ में अवगाहित होकर षोडषोपचार से ज्योतिर्लिंग की पूजा कर देवलोक लौट गये।
देवस्थानसमं हयेतत् मत्प्रसादाद भविष्यति
अन्नदानं तपः पूजा तथा प्राणंविसर्जनम्
ये कुर्वन्ति नरास्तेषां शिवलोक निवासनम्
(स्कन्दपुराण रेवाखण्ड)
(सम्पूर्ण ओंकारेश्वर तीर्थ अलौकिक है। भगवान शंकर की कृपा से यह देवस्थान के तुल्य है यहां जो अन्नदान तप पूजा कर मृत्यु को प्राप्त होते हैं उनका शिवलोक निवास होता है)

ओंकारेश्वर मंदिर में अभिषेक पूजन

अब अधीश्वर के दर्शन की अधीरता बढ़ गयी थी हम संकरे से रास्ते से अन्दर धक् (तेजी) से पहुंचा दिए गए। महानियन्ता के साक्षात्कार से अखण्ड प्रीति और परमात्म प्राप्ति की सुखानुभुति होने लगी थी। ओंकारेश्वर मंदिर में जलार्पण हेतु ताम्रवर्णी जलवाहिका के माध्यम से नर्मदा की पीयूष धारा से जलाभिषेक का विधान है पिनाक पाणी के पीछे शिवा विराजमान थी और समीप्य ही अनादिकाल से प्रतिष्ठित ज्योतिमान अखण्ड ज्योति जिसके समक्ष कृताजंलि हो हम प्रार्थना करने लगे।
पत्रेण पुष्पेण तथा जलेन प्रीतो भवत्येष सदाशिवोहि
तस्माच्च सर्वैः परिपूज्नीयः शिवा महायाग्यकरो नृणामहि
निरन्तरो निगुणो निर्विकारो निराषाधो निर्विकलो निरीहः
निरन्जनो नित्युयुक्तो निराशो निराधारो नित्यमुक्तः सदैवहिः
अभिप्राय यह कि पत्र पुष्प जल से संतुष्ट हो जाने वाले सदाशिव जगत में मनुष्यों को सौभाग्य प्रदाता हैं। एक हैं, महान हैं, ज्योतिस्वरूप हैं, अजन्मा परमेश्वर हैं, कार्य व कारण से परे हैं, व्यवधान शून्य, निर्गुण, निर्विकार, निर्बाध, निर्विकल्प, निरीह, निरन्जन, नित्ययुक्त, निष्काम, निराधार तथा सदैव नित्यमुक्त हैं।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, पार्वती माता, शुकदेव मुनि और गर्भगृह का प्रवेश द्वार

पंडित जी के माध्यम से भगवान को मौलसिरी (आक) के पुष्पों की माला, बेलपत्र धतूरा चढ़ाया। ओंकारेश्वर धाम का गर्भगृह शरीर की अधिया तिहाई ऊँचाई तक शीशे से आवृत्त है ऐसे में ज्योतिर्लिंग को स्पर्श करना दुष्कर था। सामने ही विराजे शुकदेव मुनि की प्रतिमा को दूर से ही प्रणाम कर हम बाहर आ गये। पेढ़ियां (सीढ़ियां) उतरकर मंदिर के मुख्य द्वार पहुंचकर पंचस्तरीय मंदिर की दिव्यता का दृश्यावलोकन किया। मंदिर के प्रथम तल पर श्री ओंकारेश्वर, द्वितीय पर महाकालेश्वर, तृतीय पर सिद्धनाथ, चतुर्थ पर केदारनाथ और अंतिम तल पर श्री गुप्तेश्वर महादेव विराजमान थे। मंदिर सुदर्शन लग रहा था। पंडित अखिलेश दीक्षित जी के साथ नंदी मण्डप तक सीढ़ियां चढ़ने के क्रम में श्रीराम मंदिर, स्वयंभू श्री पंचमुखी गणेश और हनुमान जी, लक्ष्मी जी, शनि देव, पुत्रवंती माता के मंदिरों में शीष नवाते हुए हम पुण्यात्मा अहिल्या बाई होल्कर जी द्वारा प्रदत्त श्वेताभ नंदी के प्रणमन हो दिव्यातिदिव्य मंदिर के स्थापत्य को निहारने लगे। यहाँ दो नंदी हैं। द्वार पर ही द्वारपालेश्वर हैं। मंदिर का जीर्णोद्धार धर्मनिष्ठ नरेशों द्वारा भिन्न-भिन्न कालों में होता रहा यह तो ज्ञात था पर उसे यथातथ्य जानने के लिए हमने वरिष्ठ पुरातत्व शास्त्री डाॅं. रमेश यादव जी की सहायता ली, ओंकारेश्वर विषयक संशोधक डाॅं. यादव ने मंदिर को वृत्तायत शतश्रृंग भूमिज शैली के प्रासाद से समीकृत किया। उन्होंने बताया कि तल विन्यास में गर्भगृह, अन्तराल, अर्थमण्डप, महामण्डप, ओर तीनों मुखमण्डप की योजना वाले इस मंदिर के वेदिबन्ध में विशाल कुम्भ कलश अन्तर्पट्टिका और कपोतिका हैं जो राजा भोज कृत समरांगण सूत्रधार में निर्दिष्ट सूत्रों पर आधारित हैं। महामण्डप से अर्धमण्डप में प्रवेश वाले द्वार पर पंचशाखाएं उत्कीर्ण हैं। प्रथम शाखा में नदी देवियों, द्वितीय में कुम्भ कन्याओं का आलेखन है तृतीय शाखा में शिव द्वारपाल जय-विजय उसके नीचे लघु रथिका में देवी ललितासीन हैं। दुर्भाग्य से पंचम और चतुर्थ शाखाओं का शिल्पांकन क्षरित हो चुका है। ललाट बिम्ब पटल पर गणेश और उत्तरंग पर पंच देवों का प्रभावी शिल्पण हैं। सभी को त्रिभंग में चतुर्भुजी दर्शाया गया है।

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Comments

  1. Rajendra kumar malviya says:

    Bhagwan aur prakriti ka Bahut hi sundar aur manohri man ko harshit karne wala avishmarniya varnan.

    1. Disha Avinash says:

      राजेंद्र – आप हमेशा त्वरित प्रतिक्रिया भेजकर पहली पयदान पर आते हैं साधुवाद के पात्र हैं।

  2. rahul says:

    Very interesting omkareshavar mandir ka bhut hi rochak or prsnchit krne vala varnan

    1. Disha Avinash says:

      राहुल –कम शब्दों में आपने मेरे ब्लॉग की व्यापक प्रशंसा कर दी धन्यवाद

  3. Neeta Deo harne says:

    Omkareshwar mandir tatha narmada nadi ka bahut manmohak varnan hai, jo yatra karane ko prerit karta hai.

    1. Disha Avinash says:

      नीता- तुम मेरे साथ सूरत से ओंकारममलेश्वर की यात्रा में सम्मिलित हुईं यह जानकर मन प्रसन्न हो गया।

  4. Shailesh Tripathi says:

    दिशा जी
    पुनः आपके लेखनी का चमत्कार पढ़ा। सचमुच आपके ऊपर माँ शारदा की कृपा है। इस तीर्थ यात्रा में भी वही आनंद और वहाँ पर स्वयं के होने की अनुभति हुई। इन यात्राओं पर जाने वाले दूसरे लोगो के लिए आपका यह वृतांत अत्यंत उपयोगी साबित होगा। यात्रा मार्ग का जो सुन्दर चित्रण आपने किया है वह मेरे जैसे तमाम लोगो इन मार्गो पर जाने को प्रेरित करेगा। धन्यवाद सहित आपके अगले ब्लॉग की प्रतीक्षा रहेगी।।।
    डॉ शैलेश त्रिपाठी
    वाराणसी।

    1. Disha Avinash says:

      त्रिपाठी जी – हमेशा आपकी सधी हुई प्रतिक्रिया मेरे यात्रा वृतान्त में और अनछुए पहुलओ को सम्मलित करने की प्रेरणा देती है

  5. Prabhat Kumar Tiwari says:

    बहुत ही सुन्दर और रोचक वर्णन, ऐसा लगा ऑडी के पीछे हमारी eon भी थी।
    और वो सारे दृश्य साक्षात् थे।
    जो तुरंत सफर के लिए निकल सकते हैं, उनके लिए प्रेरणास्रोत।
    और जो नहीं जा सकते उनके लिए मनसा दर्शन की संतुष्टि।

    हृदय से आभार और शुभकामनाएं।

    प्रभात तिवारी
    कानपुर

    1. Disha Avinash says:

      प्रभात जी – आपको ओंकारममलेश्वर दर्शन से जो संतुष्टि मिली उसने मुझे पूरी तरह भावविभोर कर दिया

  6. Anil Sharma says:

    Akalpniya Citraran, Superb lekhani, shabad hi nahi hai aap ke iss utkrasht Onkareswar ka sajiv lekhan (CHITRAN) ke liye. Intzaar hai aap ke agle article ka. Shubkamnaye. Waise bhi Hum aap ki lekhani ke fan hai bhai.

    1. Disha Avinash says:

      अनिल जी- आपकी प्रतिक्रिया से मुझे लेखनी को और अधिक धारदार बनाने का बल मिलेगा।

  7. Sandeep Gour says:

    Very nice mam,,
    Shandar varnan, padh kr bahot achcha lgta h,, apk next article ka intezar rahega,,,,

    1. Disha Avinash says:

      संदीप- धन्यवाद, तुम मेरे ब्लॉग से जुड़े रहो और ऐसे ही उत्साहवर्धन करते रहो

  8. Anumita Patel says:

    ॐ नम: शिवाय ?
    पूरा यात्रा वृताँत पढ़ा….तुम्हारी लेखनी बहुत प्रखर हैं…हिन्दी के कई शब्द जिनका प्रचलन समाप्त होने को हैं..उनका सटीक प्रयोग किया हैं…
    मुझे जनवरी 2008 में सपरिवार इंदौर से ओम्करेश्वर की यात्रा याद आ गई…तुमने पूरे घटना क्रम इस प्रकार वर्णन किया हैं लगता हैं हम भी तुम्हारे साथ विचरण कर रहे हैं….पुण्य सलिला माँ रेवा के दर्शन मात्र से कष्ट दूर हो जाते हैं…प्राचीन मंदिरों ,बारादरी का पूर्ण वर्णन सुंदर बन पड़ा हैं…
    नमामि देवी नर्मदे ?….

    अगले वृताँत की प्रतीक्षा रहेंगी……..चरैवति चरैवति

    1. Disha Avinash says:

      अनुमिता – तुम खुद बहुत अच्छा लिखती हो एकदम दिल से निकली प्रतिक्रिया सीधे दिल में उतर जाती है

  9. Varsha says:

    बहुत बढिया वर्णन .उम्दा शब्दों का प्रयोग.

    1. Disha Avinash says:

      वर्षा – संक्षिप्तता में ही तुमने ब्लॉग को पठनीय बताकर दिल खुश कर दिया

  10. Shilpa.gaur says:

    बहुत सुंदर वर्णन किया है आपने ।आपकी भाषा,शब्दों का चयन और व्याख्या एकदम अनूठी है। ऐसा लगता है कि आपके साथ हमने भी यात्रा में शामिल होकर शिवलिंग के दर्शन कर लिए ।अगले लेख की प्रतीक्षा रहेगी ।

    1. Disha Avinash says:

      शिल्पा – तुम सात समुंदर पार हो पर फिर भी मेरी ज्योतिर्लिंगों की यात्रा को पूरी शिद्दत के साथ महसूस कर रही हो इस बात से मुझे बेहद संतुष्टि मिलती है।

  11. archana PARASHAR says:

    Disha… omkareshwar ke bare me padhkar me bahut romanchit aur utsahit hun..kyoki ye bharat ke hraday sthal madhay pradesh me basa hua hai aur mere grahnagar harda se pas bhi hai… ek bat aur me narmdiy bramhan hun aur ham logo ki utpatti narmada kinare se hi mani gaye hai isliye ma narmada ham logon ki Pujyaniya hai aur hamesha rahengi .Abhi 7.8 mahine pahle hi ham log omkareshwar gaye the.. tumne bahut achhi jankari di..aage bhi aise hi badhiya likhte raho..(namami devi narmade)

    1. Disha Avinash says:

      अर्चना – नमामि देवी नर्मदे, तुम्हारी प्रतिक्रिया मुझे आगे भी दिव्य स्थानों के वैशिष्ट्य को ज्यों का त्यों पेश करने की अभिप्रेरणा देती रहेगी।

  12. Archana Tiwari says:

    Charaveti charaveti Om namah shivay Disha sachmuch tumhare upar ma sarasswati ki krapa h tumhari lekhani tumhare dwara kiye gaye shabdo ka chayan bejod h omkareswar Harda se karib hone ke karana kai bar jana hua lekin uska etihas avam paoranik mahatav Aaj etne vistar se jana Ye tumhari lekhani ka hi prabhav tha ki mujhe mahsus hua jaise puri yatra me mai tumhare sath hu Aaj punah etni Sundar mansik yatra karwane hetu bahut bahut dhanywad

    1. Disha Avinash says:

      अर्चना – तुम्हारी प्रतिक्रिया मुझे और बेह्तर लिखने के लिए उत्साहित करती है। विषय के और भीतर गहरे पैठने के लिए ललायित करती है। ऐसे ही मेरे ब्लॉग से जुड़े रहना

  13. Waah Disha. .adbhut yatra aaj laga jese hum bhi tumhare sath yatra me hain…. Bahut hi achha laga padkr…. Bahut khub Disha…….. Waiting 4 ur nxt topic…….

    1. Disha Avinash says:

      कल्पना – तुम्हें यह ब्लॉग अच्छा लग रहा है और मुझे ब्लॉग से तुम्हारा जुडाव अच्छा लग रहा है ऐसे ही संवाद का क्रम बने रहना चाहिए

  14. Swati says:

    Disha ,bahut khoobsurati se tumne is yatra, mandir avam Narmada nadi ka varnan kiya hai. Mai 2003 me indoor se by road apane pariwar ke sath omkareshwar gayi thi, per tumhare kiye gaye is varnan ke baad , phir Jane ka man karta hai !!

    1. Disha Avinash says:

      स्वाति – मेरे ब्लॉग की साथर्कता इसी में निहित है कि तुम एक बार फिर ओंकारमम्लेश्वर की यात्रा करने में इच्छुक हो, मेरे यात्रा वृत्तान्त में तुम्हारी दिलचस्पी मुझे और बेहतर लिखने की प्रेरणा दे रही है

  15. P C Bastwar says:

    Ma’m ji aapka article padha. Aapne yatra ka varnan bahut hi sahaj aur anukool shabdo me likha he aapko anekonek badhai. Aur ummeed karte hein aage bhi is tarah aap yatraon ka article likhti rahengi. Thanks

    1. Disha Avinash says:

      बस्तवार जी – मेरे ब्लॉग से पहली बार जुड़ कर आपने ब्लॉग की तारीफ की है वो यक़ीनन मेरी लेखनी में कसावट लाएगी

  16. kamal dubey says:

    आपकी ममलेश्व एवं ओम करेश्व यात्रा का विवरण पढकर मेरा मन भाव विभोर हो गया और इससे आपके ब्लॉग पर पढने पर ऐसा प्रतीत हुआ की जैसे हमारा मन जोतिर्लिंग रूपी ज्योति के दर्शन कर लिए हो ! एवं इससे जो व्यक्ति आपके ब्लॉग से जुड़े है इसके पढने से उसके इतिहास की जानकारी मिलती है एवं धार्मिकता को बढ़ावा मिलता है जिससे हमारा मन और अधिक धार्मिकता की ओर जाता है | आपकी अगली लेखनी की प्रतीक्षा रहेगी |

    1. Disha Avinash says:

      कमल जी – आपके शब्द मुझे भविष्य में भी और गहरे पैठ कर लेखन कर्म करने के लिए प्रेरित करते रहेंगे, ब्लॉग से जुड़े रहिये.

  17. JAY DUBEY says:

    ओमकरेश्वर ममलेश्वर की यात्रा का विवरण पढकर अच्छा लगा और ख़ुशी हुई ! नमामि देवी नर्मदे

    1. Disha Avinash says:

      जय – तुम तो एक युवा प्रतिभा हो अगर तुम हिन्दी के यात्रा ब्लॉग को पसंद कर रहे हो तो मेरे लिए यह संतुष्टि का विषय है

  18. Sangeeta Tripathi says:

    दिशा तुम्हारी यात्रा को प्रस्तुत करने की शैली और लेखनी का जवाब नहीं। बहुत सुंदर वर्णन ..
    वैसे हरदा के बाद जब हम बड़वाह ट्रान्सफर होकर आए तो वहां से ओंकारमम्लेश्वर कई बार गए पर तुम्हारी इस यात्रा के वर्णन को पढ़कर फिर पुराने दिन याद आ गए और कई नई दिलचस्प बातें भी मालूम हुई|
    अगली यात्रा के इंतज़ार में…

    1. Disha Avinash says:

      संगीता – तुम एक बार फिर ओंकारमम्लेश्वर की यात्रा पर जाओ इस बार मेंरे नजरिये से ओंकारेश्वर और मम्लेश्वर का दर्शन लाभ लो परिक्रमा पथ की पद यात्रा करो विश्वास करो तुम्हें दुगनी ख़ुशी मिलेगी

  19. ब्रजेश राजपूत says:

    दिशा , ओंकारेश्वर का ये यात्रा वृतांत बहुत बेहतर और स्तरीय है। भाषा कठिन है मगर आनंद देती है। ब्यौरे बहुत दिलचस्प और अनोखे हैं। पौराणिकता के छौंक के साथ पत्रकारिता की नजर से जुटाये गये आँकड़े बताते हैं कि कितनी मेहनत और लगन से ये सब लिखा गया है। बेहद दिलचस्प । अगले की प्रतीक्षा रहेगी।
    ब्रजेश राजपूत

    1. Disha Avinash says:

      ब्रजेश – तुमने मेरे यात्रा वृत्तान्त को पत्रकार के दृष्टिकोण से जांचा परखा ये मेरे लिए गर्व का विषय है, अस्वस्थ होने के बावजूद भी तुमने समय निकाल कर इतनी सटीक प्रतिक्रिया भेजी यह मुझे और बेहतर लिखने के लिए प्रेरणा देती रहेगी

  20. Seema sharma says:

    Dear disha …..ma narmada ….bhagawan shiv ka etna sunder …..shudh hindi me varnan dil ko khush kar gaya
    Agale blog ke intjar me
    Seema sharma
    नर्मदे हर?

    1. Disha Avinash says:

      सीमा, नर्मदे हर? -अतिशय धन्यवाद.मेरे ब्लॉग से जुड़े रहना.

  21. KAMAl Maheshwari says:

    जय ॐ कार ! वैसे तो मैंने भी मलिकार्जुन एवं ॐ कारेश्वर के दर्शन किये है,किन्तु में कभी सोच भी नहीं सकता कि एक यात्रा का वर्णन इस प्रकार से भी हो सकता है इतना सजीव वर्णन है कि मानो आपके साथ में भी यात्रा में शामिल हूं और यात्रा का आनंद उठा रहा हूं नयन रुपी कैमरे से समस्त प्राकृतिक सुंदरता अपने ह्र्दय में समेट कर रख रहा हू। बहुत बहुत बधाई।

    1. Disha Avinash says:

      कमल जी आपकी प्रतिक्रिया ने नि:संदेह मेरा उत्साह बढाया है आपने भी यात्रा वृतान्त की समीक्षा बहुत ही रोचक अंदाज में की है, भविष्य में भी संवाद बनाये रखियेगा

  22. Ankita dubey says:

    पुण्यसलिला माँ नर्मदा जी के दर्शन तथा भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन,और यात्रा का वर्णन बहुत ही अच्छा लगा | आपने आपकी लेखनी के शब्द ऐसे
    लिखे है मानो इसे पढ़कर ऐसा लगा की हमने भी दर्शन कर लिए हो…

    1. Disha Avinash says:

      अंकिता – तुम्हारी प्रतिक्रिया से मेरी लेखनी में नई ऊर्जा का संचार हुआ है धन्यवाद

  23. Sapna Gupta says:

    Very nice Disha ji…….padhkar hum Omkareshwar na jakar bhi Wahan hone ka Ehsaas hua….shudh aur uchcha Hindi

    1. Disha Avinash says:

      सपना – अगर तुम ओमकरेश्वर नहीं गईं अब तक तो जरूर हो कर आओ मेरे ब्लॉग की सार्थकता भी इसी में है

  24. सुरेश अवस्थी says:

    बहुत अच्छा है लेकिन दीपिका पादुकोण जैसा है। मतलब ब्लॉग बहुत सुंदर लिखा है लेकिन कुछ लंबा है, दीपिका की तरह। तुम इसे दो किस्तों में लिख सकती थीं। पहले दिन का और दूसरे दिन का अनुभव। धार्मिक स्थलों के आसपास रहने वालों के जीवन पर उनका प्रभाव भी अपेक्षित था। अर्थात आज की युवा पीढ़ी किस प्रकार पुरानी परंपराओं और आधुनिक जीवन की मांग के बीच कैसे सामंजस्य बिठा रही है। उनकी आजीविका किस प्रकार धार्मिक स्थानों के दम पर चलती है।
    इस सब पर भी कलम चलती तो और आनंद आता। वैसे चित्र बहुत प्यारे हैं। उनके कारण ब्लॉग की सुंदरता में चार चांद लग गए हैं मेरा सुझाव है कोई भी ब्लॉग 6oo से 650 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए। बहुत से ब्लॉग अपने फ़ोन पर पढ़ते हैं। उनका data खर्च होता है इसलिए लंबे ब्लॉग को बिना पढ़े ही आगे बढ़ जाते हैं तुम लिखती तो शुरू से ही अच्छा हो लिखती रहो। रोचकता होगी तो लोग पढ़ेंगे ही।

    1. Disha Avinash says:

      आदरणीय सर – आपकी प्रतिक्रिया में दिए सुझावों पर अमल किया जायेगा. आगामी ब्लॉग में आलेख की लंबाई पर भी विशेष ध्यान दिया जायेगा. संपादन के लिए मुझे बाजीराव (रणबीर सिंह) की तरह धारदार तलवार चलानी होगी। मेरी कोशिश यही रहेगी कि मैं धार्मिक स्थानों के आसपास के दृश्यों से भी आप सब को अवगत कराऊँ चित्रों को पसंद करने के लिए धन्यवाद.

  25. Birendra kumar singh says:

    ऊँ नमः शिवाय, आपकी लघु साप्ताहिक यात्रा, भोपाल से औंकारेश्वर ममलेश्वर यात्रा पढ़कर मन में कौतुहल और बढ़ गया हालाँकि आप के इस यात्रा वर्णन में आपका सिर्फ भ्रमण नहीं बल्कि उस पर किए गये शोध को भी प्रदर्शित करता है। इस यात्रा में प्रकृति का मनोरम वर्णन भी ह्रदय को आन्दोलित करते है और मन्दिर का पुरातात्विक व ऐतिहासिक वर्णन यात्रा वृत्तान्त को आम वर्णन से अलग करता है । आपके द्वारा स्थान एवं भौगोलिक वर्णन भी आपके शोध को दर्शाता हैं । धन्यवाद। ?
    वीरेन्द्र सिंग

    1. Disha Avinash says:

      वीरेन्द्र जी – भोपाल से औंकारेश्वर ममलेश्वर यात्रा वृत्तान्त से प्रभावित होकर लिखी गई आपकी प्रतिक्रिया में ब्लॉग की सराहना से मुझे और अधिक शोध परक आलेख लिखने की प्रेरणा मिली है.

  26. Amit sinha says:

    आपकी लेखनी की एक खूबी है, इसमें ताज़ा हवा की खुशबू होती है जो की इस यात्रा में भी है… माटी की गंध…वातावरण की सुगंध साथ साथ चलती हैं…
    आपकी आस्थामयी जानकारी, यात्रा संबंधी कथाएं, प्रकृति की छोटी छोटी जानकारियां। वाह! क्या बात है….
    आपके शब्दों का चयन विषयानुरूप है… आप ने अभी भी अपने जहाँ में इतने शब्द संभालकर रखे हैं… किस पिटारे से ये सब निकलती हैं… ऐसा लगता है अगली किसी यात्रा पर आपके साथ चलना ही होगा… आपको अद्भुत लेखन के लिए बधाई।
    चरैवेति…चरैवेति…

    1. Disha Avinash says:

      अमित जी – ताज़ी हवा के झोंके सरीकी आप की प्रतिक्रिया मिली आपके भी शब्दों का चयन और वाक्य विन्यास अदभुत है। आपकी सधी हुई प्रतिक्रिया की मुझे हमेशा प्रतीक्षा रहती है

  27. Vivekanand says:

    दिशा जी, पूरी यात्रा को इतनी सुंदर तरीक़े से वर्णित किया गया है कि पढ़के मन खुश हो गया. बहुत ही वास्तविक स्वरूप दिखाया गया है. चित्रों ने लेख का प्रभाव कई गुना बढ़ा दिया. बहुत बधाई.
    विवेकानंद

    1. Disha Avinash says:

      विवेकानंद जी – सात समुंदर पार से बेहद अच्छी प्रतिक्रिया भेजने के लिए अतिशय धन्यवाद ब्लॉग से आगे भी जुड़े रहिएगा, साथ ही संवाद का क्रम यूं ही जारी रखिएगा

  28. विनय मिश्रा says:

    दिशा लेख बहुत ही अच्छा है अगर यहां के कुछ होटलो के फोन नंबर और ईमेल एड्रेस जोड़ देती तो और भी अच्छा होता क्योंकि इसे पढ़ने के बाद आने का मन करेगा

    1. Disha Avinash says:

      विनय – धन्यवाद, तुम्हारे सुझाव अच्छे हैं भविष्य में ब्लॉग में संबंधित स्थानों के होटल के लिंक भी जोड़े जा सकते है।

  29. गौरव विजय काण्णव says:

    ? dishaji aapka article padha bahot hi sundar varnan kiya aapne dono jotirlingoka
    गौरव विजय काण्णव

    1. Disha Avinash says:

      गौरव जी – प्रतिक्रिया के लिए विशेष धन्यवाद

  30. Dr Ira Misra says:

    Itna sajeev varnan hai prateet hota tha hum bhi saath yatra pey hain aur shivji k dershan ker rahey hein, wo baat alag K aap humey saath nahi ley jatin.

    1. Disha Avinash says:

      इरा जी – आप हमारी यात्रा में मानसिक रूप से हमारे साथ हो लेती हैं यह हमारे लिए गर्व का विषय है। यात्रा वृतान्त आपको मन भावन लगा जान कर प्रसन्नता हुई

  31. Deepa Nema says:

    बहुत खूब ….!!!!!!
    दिशा के शब्दयान में किया गया ओंकारेश्वर का यह रूहानी सफर अद्भुत था .दिशा तुमने अपनी शब्दकूचिका से प्रकृति को कुछ इस तरह रंगा है कि मैं रह रह कर उसी सपनीली दुनिया में पहुँच प्रकृति के सौंदर्य को निहारती रहती हूँ …
    कई जानकारियाँ जो हम नहीं जानते थे तुम्हारे इस लेख के जरिये मिली ….
    तुम्हारा शब्दकोष न केवल उच्च श्रेणी का है वरन विस्तृत भी है ….
    मैं निश्चित ही तुम्हारा अगला संस्करण पढ़ना चाहूंगी …? ? ? ?

    1. Disha Avinash says:

      दीपा, तुम्हारा चितेरा स्वभाव तुम्हारी प्रतिक्रिया में भी दिखाई देता है. तुम्हारे अनुसार शब्दों के जरिये यदि मैं ओंकारममलेश्वर के सौंदर्य को इंद्रधनुषी रंग दे पायी हूँ तो उसमे भी उस स्थान का माहात्म्य छिपा है. तुमने रंगों की इबारत पढ़ ली मेरे लेख की सार्थकता इसी में है. तुम बेहतरीन चित्रकारा हो.

  32. namrata says:

    जब तक आपका शरीर स्वस्थ्य और नियंत्रण में है और मृत्यु दूर है,अपनी आत्मा को बचाने कि कोशिश कीजिये; जब मृत्यु सर पर आजायेगी तब आप क्या कर पाएंगे? – चाणक्य || As long as your body is healthy and under control and death is distant, try to save your soul; when death is immanent what can you do? – चाणक्य
    तुम सही समय पर कर रही हो तथा तुम्हारा धन्यवाद कि तुम यात्रा वृतांत लिख कर सबको प्रेरित भी कर रही हो …..आज चाणक्य भी याद आ गए ….
    इतना सटीक और संतुलित विवरण सच में तुम्हे साधुवाद ……
    मैंने भी ओम्कारेश्वर की यात्रा 2013 ‘ अक्टूबर में की थी…..पर जानकारी की कमी के कारण …..हमने सिर्फ कोटितीर्थ में स्नानोपरान्त ओंकारेश्वर मंदिर में ही दर्शन किये….आज जब तुम्हारा यात्रा वृतांत पढ़ा तो अफसोस हो रहा है ..पार्थिव लिंग शिवज्योति ( अमलेश्वर अथवा ममलेश्वर ) के दर्शन रह गए…..
    अब मैं जल्द ही फिर …तुम्हारे अनुसार यात्रा करुँगी …….
    नमामि देवी नर्मदे ?….

    1. Disha Avinash says:

      नम्रता जी, आपकी प्रतिक्रिया सदैव मेरे मन में कहीं गहरे उतर जाती है. चाणक्य का उल्लेख कर आपने मुझे भावविह्वल कर दिया. आप एक बार फिर ब्लॉग के अनुसार ओंकारममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की यात्रा कीजिये., परिक्रमा मार्ग का भ्रमण कीजिये और नर्मदा मैय्या के मनोहारी स्वरुप की अर्चना भी. यकीन मानिये विधाता ने दोनों हाथों से इस क्षेत्र को सौगातें दी हैं. नर्मदे हर.

  33. Chaitravi Geeta Vivek Dhote says:

    Jai Hind… Lovely to see another article by ” theroaddiaries” . I glorify and wish to inform that i had been to river “Naramadaji Naval Expedition” during the academic period of 1991-92… We from Gotegaon ( Near Jabalpur) through river to Badwani ( Near Indore) and we had a lovely stay at this holy place . I appreciate and thanks the team of Raoddiaries to present this article and made me more happy and glorified. Wishing all the best to team of roaddiaries for this article and waiting for another lovely article…. Jai Hind….

    1. Disha Avinash says:

      विवेक, तुम्हारी प्रतिक्रिया हमेशा की तरह आज भी मेरे दिल को भा गयी. यह जानकार प्रसन्नता हुई की तुमने नर्मदा की परिक्रमा की है. निःसंदेह यह क्षेत्र अद्भुत है शक्तिदायी है. रोड डायरीज़ टीम की ओर से धन्यवाद.

  34. श्याम says:

    दीदी नमस्ते , पढ़ने से बहुत सारी जानकारियाँ प्राप्त हुई और ऐसा लगा कि मै खुद ओम्कारेश्वर की यात्रा में शामिल हूँ ।
    श्याम बाबू ?

    1. Disha Avinash says:

      श्याम, प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से धन्यवाद.

  35. akhilesh awasthy says:

    Ye bahut hi achha vritant hai. Kai baar jane ke bawjood is se naye pahluon ka pata chalta hai. MP tourism ki hotel jaroor bakhoobi kaam ko anjam nahi de rahi hain

    1. Disha Avinash says:

      अखिलेश, यात्रा वृत्तान्त आपको रुचिकर लगा, अतिशय धन्यवाद. मध्य प्रदेश पर्यटन का होटल सुविधा संपन्न तो है लेकिन बहुत ज़्यादा फेलसुफियत की उम्मीद नहीं बाँधी जा सकती.

  36. Neeta Mishra says:

    प्रिय दिशा
    ओंकारेश्वर यात्रा वृतांत बहुत ही अच्छा लगा तुम्हारी कलम ने उन सभी पहलुओं पर प्रकाश डाला है जोकि हम ओंकारेश्वर के दर्शन करने के बाद भी अनुभव नहीं कर पाए थे तुम्हारे लेखन में इतिहास और अध्यात्म का समावेश है जिसे पढ़कर पुनः यात्रा की प्रेरणा मिलती है।
    अगली यात्रा वृतांत का इन्तजार है।

  37. NISHANT VYAS says:

    सर्वप्रथम अभिनंदन
    संस्मरण साझा करने के लिये
    अत्यंत संक्षिप्त लेखन के माध्यम से ज्योतिर्लिंग ओंकार -ममलेश्वर से संबंधित सूक्ष्मतम् जानकारियां तो प्राप्त हुईं ही सांथ मे मां नर्मदा के विस्तृत महात्म्य को पढ़कर मन अभिभूत हुआ।
    सादर नमन

    1. Disha Avinash says:

      निशांत, तुम्हारी प्रतिक्रिया पढ़कर बहुत अच्छा लगा. आगे भी ऐसे ही जुड़े रहो. प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से धन्यवाद.

  38. sushma tiwari says:

    Vastav me…tum sachmuch DISHA hi ho…jin raaston ko aam aadmi need ke jhnko aur chaay nashte ke sath juzaarte hain….usi dagar ko tum apni lekhni se jeevant kar deti ho…..tumhare Blog par Dodi Restaurant ab hame bhi bahut achchha nazar aa rha tha ….jab tak aisi kalam hogi har jafah sundar aur suhani lagegi…..dekhne ki utsukta aur aturta aur bash jayegi….apne agle kram ki aur isi prakar agrasar rahom…

    1. Disha Avinash says:

      सुषमा – धन्यवाद मेरा सफ़र तुम्हे प्रभावित कर गया ये मेरे लिए सुखद ऐहसास है मेरी कोशिश रहेगी ज्यादा से ज्यादा अनजानी जगहों की यात्रा करूं और तुम लोगों को भी कराऊँ बस मेरे साथ बने रहना

  39. Priti Mirani says:

    तुम्हारा आलेख बहुत अच्छा है , मैं ओंकारेश्वर गई नहीं कभी पर अब जाने का मन कर रहा है ऐसे ही यात्रा करती रहो और हम सबको भी कराती रहो
    प्रीति

    1. Disha Avinash says:

      प्रीति – तुम जुनागढ़ से मुझसे जुडी हुई हो ये मुझे और बेहतर लिखने के लिए प्रेरित करता रहेगा

  40. Ashok Tiwari says:

    आपका ओमकारेश्वर यात्रा वृत्तांत पढ़ा।लंबे अरसे बाद दिशा की लेखनी का आनद मिला।कथ्य में वही गहराई,सूक्ष्मतम विवरण और सबसे बड़ी बात वहीँ पुरानी लय, सब कुछ बिलकुल वैसा ही जैसे एक दशक पहले हुआ। करता था।लेख पढ़ते समय लगा जैसे हम भी यात्रा में उनके साथ हों।भूगोल,इतिहास,राह के स्थान,सड़क,नर्मदा जी,नाव,मंदिर,उससे संबंधित मान्यताएं सब कूछ का सटीक और विस्तारित व्याख्या बिलकुल दिशामय और दिशानुरूप।कोटिशः बधाइयां।
    keep it up

    1. Disha Avinash says:

      अशोक जी – लंबे अन्तराल के बाद आप से विचार साझा करने की प्रक्रिया ने मेरे भीतर नई उर्जा का संचार कर दिया है आपने समय निकालकर ब्लॉग में इतनी दिलचस्पी दिखाई मेरे लिए यही बहुत है इतनी अच्छी प्रतिक्रिया मुझे लम्बे समय तक उत्तम बल्कि सर्वोत्तम प्रस्तुत करने के लिए अभिप्रेरित करती रहेगी

  41. Riya Malviya says:

    आपने अपनी यात्रा का इतना ख़ूबसूरत अदभूत वर्णन किया हैं पढ़ कर ऐसा लगा जैसे हमने साक्षात ओंकारेश्वर के दर्शन कर लिए। इसमें नर्मदा नदी की और यात्रा की कुछ नई जानकारियाँ ज्ञात हुई। आपके लेख से हमें सही दिशा मिलती हैं।
    आपके अगले लेख के इतंजार में
    रिया मालवीया

    1. Disha Avinash says:

      रिया – ब्लॉग को चाव से पढ़ने और फिर उतनी ही तत्परता से जबाब देने के लिए शुक्रिया

  42. संजीव रत्न मिश्र says:

    दिशा जी आपके द्वारा इस इले. युग में उपलब्ध संचार माध्यमों का उपयोग पर्यटन की सूचना के साथ धार्मिक यात्राओं की विशेषता को सरल रूप में चित्रण उपयोगी और समयानुकूल है।
    मैं समझ सकता हूं कम शब्दों में विस्तृत विवरण आसान कार्य नही फिर भी आपसे अनुरोध है धर्मिक स्थलों के विषयागत विवरण के साथ वहाँ के पारम्परिक उत्सवों और पूजन ,आरती के समय विवरण के साथ प्रस्तुति करण किया जाना और अधिक उपयोगी सिद्ध होगा।
    संजीव रत्न मिश्र, बनारस

    1. Disha Avinash says:

      संजीव जी – बनारस में बैठकर अगर आप ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की मेरी अध्यात्मिक यात्रा का भरपूर लुत्फ़ उठा पाए ये मेरे लिए गर्व का विषय है आप के सुझाव बेहद सटीक हैं बाद के अंकों में इन पर गौर किया जाएगा हांलाकि इससे ब्लॉग के कलेवर विस्तारित होने का अंदेशा है फिर भी कोशिशें तो की ही जा सकती हैं

  43. योगेश जोशी says:

    आपकी हिंदी और लेखन शैली सच में प्रसंशनीय है। भगवान घृष्णेश्वर की कृपा आप पर बनी रहे । आध्यात्म और इतिहास की धरोहर का मेल आपके लेखन में मिलता है ।
    योगेश जोशी

    1. Disha Avinash says:

      योगेश जी आप ने प्रतिक्रिया लिखकर विश्वास कीजिए मुझे प्रसन्नचित्त कर दिया आप हिन्दी में अच्छा लिख लेते हैं आगे भी लिखते रहिएगा

  44. Padam Bhandari says:

    दिशा जी
    एक यात्रा अंतस की ,ऑडी से…
    लेखन यात्रावृतांत ही तो है !
    बधाई कि आपने इस ब्लॉग को बाह्य यात्रानुभव के इर्दगिर्द रखते हुए पाठकों के लिए अनुभवों को जीना आसान बना दिया है।
    यात्राएँ पहले हमें अनुभवों से समर्थ करती हैं बाद में लघुता का अहसास परोक्ष रूप से हमारी संवेदनाओं को प्रखर बनाने में मददगार सिद्ध होता है।आपकी सहज अभिव्यक्ति हम जैसों को ऑडी में साथ लिए चलती है।कई जगहों पर हम ऑडी से उतरना भूल जाते हैं और आपके सूक्ष्म अनुभव स्पंदन से वंचित रह जाते हैं,पर इसमें कोई शक नहीं कि आप इस बात को बहुत जल्द ताड़ लेती हैं और फिर खींच कर ले जाती हैं अपना हमनज़र बना कर…
    सुखद है आपसंग जगतदर्शन
    बधाई

    1. Disha Avinash says:

      पदम तुम्हारा लेखन भी कोई कम प्रभावशाली नहीं है लगता है तुमने बड़े ही इत्मिनान से ब्लाग पढ़ा बल्कि उसका भलीभाँति रसास्वादन भी किया ,इसी तरह ब्लाग पर बने रहना इतनी ही शिद्दत से पत्र भी लिखना,धन्यवाद

  45. Archana mandloi says:

    Hi.. I read your blog and your travel experience was nicely described,got new information and facts about the place. Wish you good luck, continue sharing copying your travel dairies with us.

    1. Disha Avinash says:

      Mighty thanks for sharing your views and appreciating the blog, Archana ji. Hope you’ll keep visiting for more…Keep in touch.

  46. Dr R S Raghuwanshi says:

    ओंकारेश्वर एक एतिहासिक तीर्थस्थल है यहाँ की यात्रा अपने आप में हिंदू धर्म के अनुसार उपलब्धि है । इस यात्रा की जानकारी से माँ नर्मदा के दर्शन करना भी पुण्य कमाने जैसा है । इस तरह की यात्रा का वर्णन पढ़ना रोमांचक अनुभव रहा । शुभकामनाएँ

    1. Disha Avinash says:

      रघुवंशी जी, आपकी स्नेह से भरी प्रतिक्रिया दिल को सुकून दे गई

  47. deepak sharma says:

    दिशा ऐसा लगा तुमने नर्मदा पर बांध बना दिया हो अपने शब्दों से … और यात्रा के साथ तुमने हिन्दी की साधना भी की है

    1. Disha Avinash says:

      दीपक जी हम सब हिन्दी को बढ़ावा देने का अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं ,लेख अच्छा लगा यह जानकर संतोष हुआ,ब्लाग से इसी तरह जुड़े रहिए

  48. Anil Mudgal says:

    Bahut badhiya Disha…….padhkar maza aa gaya. Bahut si baaten padhkar laga ab jaldi hi Jane ka program banana padega…….

    1. Disha Avinash says:

      अनिल जी आप की प्रतिक्रिया पाकर दिल ख़ुश हो गया आप ज़रूर परिवार के साथ एक बार ओंकारममलेश्वर की यात्रा कर आइए।

  49. R T Koushike says:

    ब्लॉग बहुत अभ्यास पूर्ण है हर मिनिट का आपने वर्णन ख़ूबसूरती से किया है माँ सरस्वती की आप पर कृपा रहे यही प्रार्थना करता हूं धन्यवाद

    1. Disha Avinash says:

      कौशिके जी आपने ब्लाग पढ़ा और मेरी प्रशंसा की इसके लिए धन्यवाद,आगे भी आशा है आप ब्लाग से जुड़कर मुझे प्रोत्साहित करते रहेंगे।

  50. Priti Mirani says:

    Disha, Tum saday aise acche lekh likh ti raho aur Bharat ke pauranik tirth sthalo ka darshan katvati raho. Hamari subhkamna tumhare sath hai.

  51. Mradula awasthy says:

    Bahut shandar yatra ka varnan kiya ki ab hum bhi sochenge by road jane ki.isi tarah aage badhte raho

    1. Disha Avinash says:

      मृदुला जी,मेरा लेखन आपको सड़क से यात्रा करने के लिए लालायित कर रहा है यह जानकर संतुष्टि हुई आप मेरे सुझाये रास्तों पर बस निकल पड़िए,शुभ यात्रा,आगे भी ब्लाग से जुड़े रहिएगा

  52. पद्मा मिश्रा says:

    Ati sundar yatra vratant

    1. Disha Avinash says:

      पद्मा,तुमने ब्लाग पढ़ा और प्रतिक्रिया लिखी मेरे लिए यह बहुत मायने रखता है

  53. Mahendra jat says:

    आपके आध्यात्मिक यात्रा वृतानंत की लेखन शैली की पराकाष्ठा ने साक्षात् स्वयंभू के दर्शन लाभ करा दिये । आपने जिस लेखन शैली से शब्दों को संवारा है वो आज के परिवेश में देखने को नहीं मिलती। सधन्यवाद।

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  55. bit.ly says:

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  57. OP misra, Bhopal. says:

    Your roaddairis covers everything included cultures,religious, Sanskrit sloks, architecture,art craft,local foods and the style of preparation,folk songs related to Narmada Maia,the style of worshiping the lord by the saivites pujari,scindhia,and Hillary pujari with their rituals.you covers the shivalings formation in a center with their distributions.you have mentioned how worshipers have faith on the lord Shiva, Vishnu, and other gods.you have made comparative study for the mirchi and production in a large quantities.inscription deberies clearance evidence is the new material for researchers and for worshipers.at last I must congratulate you for covering such important road dairies.thank you very much for excellent photographs and sub title in the text.good and wish you very happy journey.

  58. गोपालकृष्ण रावसाहेब आंधले says:

    दिशा मॅडम आपको माॅ सरस्वती का आशिर्वाद हैं. आपकी कलम की शक्ति ऐंसे ही चलती रहें आपकी लेखनशैली हम जैसे भक्तोंको घर बैढे ही याञा का पुण्य देती हैं. आपको बहोत शुभकामना!
    गोपालकृष्ण रावसाहेब आंधले ,परली

  59. विपिन अग्रवाल says:

    शानदार ,गौरवान्वित करने वाला लेख
    विपिन अग्रवाल

  60. पंडित कीर्ति देव शास्त्री says:

    बेटा मैं बहुत खुश हूँ,
    सम्वेद्ं सरल,संभाशितं,
    इस बात पर गौर करें ताकि आयोजन सफल होने की संभावना कम नहीं हो इस प्रकार का लेख अब तक प्रकाशित किया गया नहीं था दिल को छूती हुई रचना के लिए बधाई स्वीकारें अस्तु
    अद्भूत चिर स्मरणीय
    स्वेद्नम
    पंडित कीर्ति देव शास्त्री ,सोमनाथ

  61. brawl stars hack coins says:

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  62. Raviraj Patil says:

    ऊँकार जी की कृपा आपकी लेखनी पर बनी रहे

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