लोक धारणा : राजा विक्रमादित्य के पिता राजा गन्धर्वसेन की गन्धर्वपुरी

राजा विक्रमादित्य

द्वार से प्रविष्ट होने के साथ ही मालवा के लोकजीवन का वैशिष्ट्य लिये 5000 ग्रामवासियों वाला गांव गंधर्वपुरी हमारे समक्ष था। जिज्ञासा चरम पर थी गन्धर्व तो स्वर्ग के निवासी होते हैं देव गणों और मनुष्यों के बीच दूत का कार्य करते हुए देव सभा में गायक का दायित्व भी निभाते हैं यह सब तो हमने पढ़ रखा था पर हम तो एक गांव की समग्रता को, सीधी-सादी निश्छल ग्रामात्मा को और लोक परंपराओं में निहित लोक तत्वों के अनुसंधायक की भूमिका में यहां आए थे। सौभाग्य से हमारी भेंट औदुम्बर ब्राह्मण श्री राकेश कुमार चौधरी जी से हुई जो वर्तमान में गांव के वसूली पटेल हैं और पूर्व सरपंच भी रहे हैं उन्होंने हमें बताया कि गन्धर्वपुरी को पुरानी पीढ़ी गंधावल के नाम से जानती है। गन्धावल नामाभिधान के मूल में उनके अनुसार यहां पूर्व में बहुतायत में पाये जाने वाले सुगंधित चंदन के वृक्षों की पंक्तियां रहीं। गंध अवलि  अर्थात गंध युक्त पुष्पों की पंक्ति वाला गांव गंधावल, जिसका आज सर्वथा अभाव है यहां का लोक मानस अपने राजा गन्धर्व सेन को अराध्य के रूप में पूजता है। गांव में मांगलिक कार्यों के आयोजन से पूर्व राजा जी को न्योतने की परंपरा का भी निर्वाहन होता है लोक विश्वास है कि राजा जी की प्रतिमा के सामने निवेदित प्रार्थनाएं फलीभूत होती हैं इसीलिए अवर्षा की स्थिति के देवल भरे जाने से इंद्रदेवता प्रसन्न होते हैं।कुशवाहा बस्ती में सोमवती नदी के निकट स्थित राजा जी मंदिर में राजा गंधर्वसेन की प्रतिमा के चरणों तक देवल भरी जाती है। राकेश जी बताते है कि राजा जी की पूजार्चना और अभिषेकोपरांत निर्धारित विधि विधान से देवल भरने के अब तक किये तीन प्रयोग सफल सिद्ध हुए है यही नहीं असमय वर्षा कराने के लिए भराई गयी देवल के दुष्परिणाम के भी गांव वाले प्रत्क्षदर्शी रहे हैं। राकेश जी से यह भी पता चला कि राजा जी को यहां निवासित मानकर आस्थावान गंधर्वपुरी की जनता उज्जैनी (बीज बोने के बाद इंद्र देवता को प्रसन्न करने के लिए बस्ती के बाहर जंगल में भोजन बनाने की परंपरा) आयोजित नहीं करती। अपने राजा के प्रति गहनासक्ति रखने वाला जनमानस राजा गंधर्वसेन के प्रति ही नहीं बल्कि उनके पुत्रों उज्जयिनी के जनसम्राट विक्रमादित्य और भर्तृहरि को भी उनके अलौकिक गुणों के कारण पूजता है। लोक की हृदय संवादिता ने निरंतर कड़ियों के रूप में राजा गन्धर्वसेन के प्रति अमोध विश्वास को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुंचाया यह तो हम जानते थे पर हमने राकेश जी से जब इस लोक कथा के बारे में जानना चाहा तो ज्ञात हुआ कि इन्द्र की सभा में एक गंधर्व द्वारा अनैतिक आचरण करने पर इंद्र द्वारा गन्धर्व को गर्दभ स्वरूप में जन्मलेने के लिए आज्ञापित किया गया इस लोक भूमि पर कुम्हार के घर गर्दभ योनि में जन्मने के पश्चात् वह कुम्हार से राजा की बेटी से शादी करने के लिए कहने लगा। राजा से न कह पाने की विवशता में कुम्हार ने गांव से पलायन करने का निर्णय लिया।
राजा को जब इस बात की सूचना मिली तो उसने कारण जानने की अभिलाषा में कुम्हार को दरबार में बुलाया। कुम्हार ने राजा से निवेदन किया कि वे एक रात उसके घर पर रह लें तो वे उसकी समस्या के मूलकारण से अवगत हो जायेंगे। राजा द्वारा रात्रि विश्राम करने पर उस ने पाया कि वह गर्दभ रूपी लड़का पुरूष सृदश वार्तालाप कर रहा था। उसने राजा से उसकी बेटी का हाथ मांग लिया। अचकचाये राजा ने उसकी परीक्षा लेने हेतु एक प्रस्ताव रखा जिसमें एक रात में इस नगरी को तांबे से बनाये जाने की प्रतिज्ञा रखी गयी थी। उसने ऐसा ही किया तब यह नगरी ताम्ब्रवती कहलायी। प्रतिभा सम्पन्न होने पर राजा ने अपनी बेटी का विवाह गंधर्व से कर दिया। रात्रि में वह गर्दभ रूपी पुरूष सहधर्मिणी के साथ रहता था उन्हें पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई। कुछ समय पश्चात् उसकी सास ने सोचा कि क्यों न अपने दामाद के गधे रूपी आवरण को ही विनष्ट कर दें। उन्होंने उसके आवरण में आग लगा दी। दुर्भाग्य से गर्दभ रूपी पुरूष जब जलने लगा तब उसने अपनी जीवनसंगिनी से गांव छोड़कर अन्यत्र चले जाने को कहा। गांव वालों की मान्यता है कि वह अपने पुत्र को लेकर उज्जैनी की ओर प्रस्थान कर गयी बाद में वही बालक बड़ा होकर लोकनायक विक्रमादित्य के रूप में सर्वस्वीकृत सर्वमान्य गणनायक बना। जिसने विदेशी शकों से देश की अस्मिता की रक्षा की। जलते हुए गर्दभ रूपी पुरूष के वचनानुसार धूल कोट के कारण यह नगरी धूलधुसरित हो गयी और सभी प्राणी पाषाणमय होकर जड़वत् हो गये।

राकेश चौधरी वसूली पटेल, गांव गंधर्वपुरी 

राकेश जी के अनुसार आज भी गांव में घर बनाते समय खुदाई करने के दौरान पुरातात्विक महत्व की असंख्य प्रतिमाएं प्राप्त होती हैं। राकेश जी बताते है कि उन्होंनेे अपने बालकाल्य से देखा है कि गन्धर्वपुरी में कभी गर्दभ को उपाहासात्मक दृष्टि से नहीं देखा गया बल्कि मार्ग में गधे को देखकर परस्पर संवाद में यह भर कहा जाता रहा यहां के राजा जी पधार रहे हैं हट जाओ रास्ता छोड़ो।

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Comments

  1. O P Mishra says:

    Wow! Well written and finely executed. You proved that Gardbhilla was Vikramaditya’s father. You are on the footsteps of Mrs devala Mitra DGA SI. Taking forward the interest in the field of art culture,and archaeology.
    Congratulations!

  2. दिनेश झाला says:

    काफी समय बाद आपकी गन्धर्वपुरी पर रचना पढने के बाद बहुत आनंद आ गया धन्यवाद आभार।
    -दिनेश झाला शाजापुर ।🙏🏻🙏🏻👏👏

  3. Shyam says:

    दीदी नमस्कार.केसर बाई के लोकगीत मे आनंद आ गया आपके द्वारा हमे कई सारी एतिहासिक जानकरी प्राप्त हुई आपका आभार.आपको बधाई.

  4. वीरेंद्र सिंह says:

    ऊँ नमः शिवाय आपका नया ब्लाग पढ़ कर अति प्रसन्नता हुई परन्तु उससे अधिक जिज्ञासा बढ़ गयी गन्धर्व पुरी के बारे में एक ऐसे प्रतापी राजा और वंश के बारे में जिन्होंने परमार वंश की नीव रखी जिनका साम्राज्य मध्य भारत से दक्षिण भारत तक फैला हुआ था जिनके वंशज एक महान सम्राट विक्रमादित्य हुए तो दूसरे राजा भर्तृहरि जिन्होने हिन्दू धर्म का मार्ग दर्शन किया, सबसे बड़ी बात जो आपके शोध से सामने आयी कि किस प्रकार पहले के इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास के साथ घोर अन्याय किया है आपने जिस तरह से पूरी प्रमाणिकता के साथ तथ्यों को सामने लाने का प्रयास किया है शायद इससे आने वाले समय में भारत का प्राचीन इतिहास पुनः एक बार ऐसे ही शोध के साथ देश दुनिया के सामने लाने की आवश्यकता है, आज की जो युवा पीढ़ी जिसको अपने गौरव शाली इतिहास को ना तो बताया गया और ना तो दिखाया गया ऐसे छात्रों के लिए आपका ये लेख किसी अमूल्य खजाने से कम नहीं हैं पर मेरा उन छात्रों से भी निवेदन है कि वे आपका लेख सिर्फ पढ़े नहीं बल्कि गंधर्वपुरी आकर स्वयं अवलोकन भी करे ।इतिहास में प्रामाणीकता सिर्फ किताबों के अन्दर नहीं बल्कि भारत के लोककथाओं में व लौकक्तियो में भी भरे पड़े हैं । जिसको ये पश्चिमी मानसिकता वाले इतिहासकारों ने बड़ी चालाकी से नकारने की कोशिश की । मेरे विचार से आपका ये लेख राजपूत वंश में परमार वंश को और अधिक गहराई से जानने में सहायक सिद्ध होगा ।गंधर्वपुरी को सरकार को विश्व धरोहर स्थल व पर्यटक स्थल घोषित करना चाहिए जिससे भारतीय अपने गौरव शाली इतिहास को जान सके व राज्य का भी आर्थिक विकास हो ।

  5. कमलेश बुन्देला says:

    अति सुन्दर जानकारी
    कमलेश बुन्देला

  6. दयाराम सिरोलिया says:

    बहुत ख़ूब दीदी
    दयाराम सिरोलिया देवास