श्री त्र्यंम्बकेश्वर: जहां की अणु-रेणु ही तीर्थस्वरूपा है

श्री त्र्यंम्बकेश्वर: जहां की अणु-रेणु ही तीर्थस्वरूपा है द्वादश ज्योतिर्लिगों के परिगणन में दसवें क्रमांक पर प्रतिष्ठित श्री त्र्यंम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग नासिक

Continue Reading

श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग :शिव का छठवाँ दिव्य धाम

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रात्रि विश्राम के उपारान्त दूसरा दिन सृष्टि में जो परम परात्पर हैं भुवनेश, जिनका अर्थ ही मंगलमय, कुशलक्षेम और मुक्तिप्रदाता है, की शिवार्चा के लिए नियत था अतः द्वादश ज्योतिर्लिंगों के अर्चा-विग्रहों के परिगणन में छठवें क्रमांक पर प्रतिष्ठित दिव्य भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग हमारी आध्यात्मिक यात्रा का अगला पड़ाव था। मध्य महाराष्ट्र की अप्रतिम प्राकृतिक सुषमा श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग :शिव का छठवाँ दिव्य धाममें लोकस्तुत्य आध्यात्म की अलौकिक छटा के बीच शिव के लोकमंगल स्वरूप के दर्शन के हामी हों तो हमारी तरह भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग परिसर में समय व्यतीत कर आइये यकीन मानिये आप भी शिव की …

Continue Reading

तीर्थ की सात्विक शक्ति से सराबोर घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग निःसन्देह हम सभी का आंतरिक पक्ष है संस्कृति और बाह्य पक्ष सभ्यता। अनजाने सत्य को जानने की उत्कंठा ही हमारी स्वभावगत विशेषता है। संस्कृतियों और सभ्यताओं की विपुल निधि से तादात्म्य स्थापित करने की लालसा ही तो हमें यायावर बनाती है। यात्रा का प्रारम्भ सो इस बार लॉंग वीकेण्ड टूर के अन्तर्गत महाराष्ट्र स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में परिगणित दिव्य शिव तीर्थों की यात्रा का कार्यक्रम बना। श्री घृष्णेश्वर, श्री भीमाशंकर और श्री त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिर्गों के परम मंगलमय, चिन्मय और अलौकिक स्वरूप की दर्शनाभिलाषा में हम यात्रा पर निकल पड़े। भोपाल से 518 कि.मी. दूर वेरूल अथवा …

Continue Reading

भोपाल से श्री मल्लिकार्जुन: एक अविस्मरणीय यात्रा

श्री मल्लिकार्जुन यात्राएं उद्देश्यपरक होती हैं इसमें कोई सन्देह नहीं, लेकिन यादगार यात्राएं तो वही कहलाती हैं जिनकी इन्द्रधनुषी स्मृतियां लम्बे समय तक मन को आलोढ़ित करती रहती हैं। रेल और हवाई यात्राएं चाहे सुगम, सुविधाजनक और सुलभ कितनी ही क्यों न हों पर सड़क यात्राएं नैसर्गिक सौंदर्य के रसास्वादन का वास्तविक माध्यम होती हैं। अतः हमने अपने ‘लांग वीकेण्ड टूर’ के लिए सड़क मार्ग को ही श्रेयस्कर समझा। उद्देश्य भी यही था रोमांच की पराकाष्ठा की अनुभूति और विशुद्ध देशज संस्कृति की सौंधी गंध को महसूसना। देश के वैभवशाली ऐतिहासिक, समृद्ध सांस्कृतिक और आलौकिक आध्यामित्क परिवेश के सुरम्य साझा …

Continue Reading