राजस्थान की लोकनाट्य कुचामणि ख्याल शैली और महाराष्ट्र का लावणी नृत्य

80 बसंत पार कर चुके बंशीलाल जी उर्फ बशीर मोहम्मद द्वारा निर्देशित लोक नाट्य की प्रस्तुति इसमें कोई संदेह नहीं मंगल भाव लिए हमारे लोकनाट्य हों याँ लोक नृत्य, सामाजिक स्थितियों और परंपराओं की उजास से परिपूर्ण क्षेत्र विशेष का दर्पण होते हैं। भोपाल स्थित जनजातीय संग्रहालय के सभागार में राजस्थान की लोकनाट्य कुचामणि ख्याल शैली और महाराष्ट्र की लावणी नृत्य परंपरा के दर्शी बने हम यही अनुभूत करते रहे। सभागार में अभिनयन श्रंखला के अन्तर्गत राजस्थान के नागौर जिले के डेगाना तहसील के चुयी गांव से पधारे बंशीलाल खिलाड़ी एंड पार्टी द्वारा जगदेव कंकाली की सराहनीय प्रस्तुति की गयी। कुचामणी ख्याल परंपरा में …

Continue Reading

निमाड़ की रसवन्ती लोक नाट्य गम्मत शैली, ओडिसी नृत्य में शिव और शिवा की अभिन्नता

निःसन्देह किसी अंचल विशेष की संस्कृति को उसकी वाचिक परंपरा से भली भांति समझा जा सकता है। पिछले दिनों भोपाल स्थित जनजातीय संग्रहालय के सभागार में निमाड़ प्रान्त की लोकसंस्कृति को रंग प्रयोगों के प्रदर्शन की साप्ताहिक श्रृंखला में पारंपरिक लोक नाट्य ‘गम्मत’ के रसास्वादन के साथ समझने का सुअवसर मिला। श्री शोभाराम वासुरे के निर्देशन में पटेल-पटलन का मंचन निमाड़ी बोली की समग्रता का सौन्दर्य बोध करा गया। मण्डलेश्वर की खरगोन रोड के छप्पन देव के निवासी 62 वर्षीय शोभाराम जी की सांवरिया गम्मत मण्डली के लोक कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता से पश्चिम भारत के निमाड़ लोकांचल की समृद्ध संस्कृति के दर्शन करा दिये। एक घण्टे की …

Continue Reading

लोकमतः शनिदेव की साढ़ेसाती ने सम्राट विक्रमादित्य को चम्पावती (चकल्दी) पहुंचाया

लोकमतः राजा विक्रमादित्य का शनि प्रकोप चम्पावती में शांत मध्यप्रदेश के शाजापुर और सीहोर जिलों के अवन्तिपुर बड़ोदिया, पगरावद, रनायल, कोटरी, दिवड़िया, तिलावद, ढावला राय गाँवों में विक्रमादित्य की प्रशंसा के गीत पुरातन का सतत अनुसंधान हमारी यात्राओं के मूल में रहा है आज भी हम यात्रिक बन ऐसे अतीत में झांकने निकले हैं ,जिसमें हमें सम्राट विक्रमादित्य संबंधी एक  दंतकथा के  मर्म की खोज करना है  ,एक ऐसा राजा जिसे लोक ने देवता स्वरूप पूजा परन्तु इतिहास के समक्ष वह चुनौती बन गया हम उसी सर्वशक्तिमान लोकात्मा की सर्वप्रभुता के यथार्थ दर्शन के लिए निकले थे  कतिपय सूत्रों से पता चला था  कि  रमपुरा …

Continue Reading

गुजरात की भवाई लोकनाट्य शैली, राजस्थान की मांगणियार गायकी

लोकगाथाएं लोक के पुराण हैं इसीलिए इतने वर्षों के बाद भी उनका अस्तित्व विद्यमान है। 13वीं सदी के उत्तरार्ध और 14वीं सदी के पूर्वार्ध में उत्तर गुजरात में अद्भूत लोकनाट्य शैली भवाई का मंचन भोपाल स्थित जनजातीय संग्रहालय के प्रेक्षागृह में देखने के उपरांत उरोक्त पंक्तियों की पुष्टि स्वतः ही हो गई। मोरबी (गुजरात) से पधारे विवेकानंद भवाई मण्डली  के 70 वर्षीय श्री हरिलाल पैजा के पुत्र प्रकाश के निर्देशन में 25 लोक कलाकारों के मन हरने वाले पारंपरिक भावमय प्रदर्शन ने हमें भावविह्वल कर दिया। रावत रनसिंह शीर्षक वाले भवाई लोकनाट्य में मोरबी के राजा रावत रनसिंह का मोजड़ी प्रेम प्रसंग, …

Continue Reading

मणिपुर की सुमंग लीला में थोइबी और खाम्बा का प्रेमाख्यानक

गुरू रवीन्द्र नाथ टैगोर ने कहा था आधुनिक भारत की संस्कृति एक विकसित शतदल के समान है। जिसका एक-एक दल उसकी प्रान्तीय भाषा साहित्य और संस्कृति है किसी एक को क्षति पहुँचाने  से कमल की शोभा क्षीण हो जायेगी। यह पंक्तियां पिछले दिनों भोपाल स्थित जनजातीय संग्रहालय के प्रेक्षागृह में आयोजित मणिपुर की बिरली लोकनाट्य शैली सुमंग लीला के प्रस्तुतीकरण के दर्शी बनकर स्मर हो आयीं। मणिपुरी रंगकर्मी नीलध्वजा खुमान के निर्देशन में ‘खोइरेंताक’ शीर्षक लिए लोक तत्वों से परिपूर्ण सुमंग लीला का प्रदर्शन मन मुग्ध कर गया। सुमंग लीला थोइबी और खाम्बा के  प्रेमाख्यानक पर आधारित थी। सुमंग लीला में …

Continue Reading

पश्चिम बंगाल की लोक नाट्य शैली “भवानी जात्रा” में महिषासुरमर्दिनी

आकाश पाताल को अपनी ज्योति से उद्भासित करती आद्यशक्ति सहस्त्र भुजवती देवी ‘भवानी’ की शत्रुविमर्दिनी शक्ति का चिरस्मरणीय प्रदर्शन हाल ही में भोपाल के जनजातीय संग्रहालय के सभागार में देखने को मिला। पश्चिम बंगाल की संस्था कोलकात्ता रंगमंच थियेटर  के कलाकारों द्वारा शोभीजीत हलदर के निर्देशत्व में प्रस्तुत ‘भवानी जात्रा’ की प्रस्तुति ने आद्यान्त दर्शकों को भक्ति प्रवण बनाये रखा। हमारी शक्ति रूपिणी शक्ति हमारे भीतर छिपी है का गूढ़ार्थ लिये पश्चिम बंगाल की लोक नाट्य शैली ‘जात्रा’ में महिषासुरमर्दिनी को ऐसे रूपायित किया गया कि हर दृश्य की समाप्ति पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान रहा। संस्कृतनिष्ठ श्लोकों, …

Continue Reading

राजा भोज का भोजपुर, आशापुरी और ढांवला में परमारकालीन मंदिर

bhopal bhojpur raja bhoj

पश्चिमाभिमुख भोजपुर मंदिर प्रदक्षिणा रहित होने के कारण निरंधार शैली में निबद्ध खेलते होंगे बच्चे यहां के कभी भरा समन्दर गोपी चन्दर बोल मेरी मछली तेरे तालाब में कितना पानी यह विचारते हुए होंठों पर स्मित (मुस्कान) तैर गयी थी। भोपाल से 32 कि.मी. दूर तक हरहराती बेतवा (वेत्रवती) नदी यमुना नदी में समागमित होने को आतुर, भूरे रंग की धूल खाई अनगढ़ चट्टानें, आम, महुआ, ईमली, पीपल, बड़ और सीताफल के असंख्य पेड़ों पर अटकी हुई धूप कलियासोत धारा को पार कर बायें हाथ पर बने विशालकाय नंदी को पीछे छोड़ते हुए हम परमारकालीन राजा भोज की नगरी भोजपुर …

Continue Reading

बुंदेलखण्ड की हास्य-परिहास वाली स्वांग परंपरा

बुंदेलखण्ड की हास्य-परिहास वाली स्वांग परंपरा

बुंदेलखण्ड की हास्य-परिहास वाली स्वांग परंपरा का रसास्वादन कराती ‘आ गई पूना बावरी’ का मंचन पिछले दिनों भोपाल स्थित मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय के सभागार में हुआ। सागर जिले के कर्रापुर कस्बे के ढीमर, मांझी और केवट समाज के लोक जीवन के बिम्ब समेटे इस प्रस्तुति में व्यंजनामयी लच्छेदार संवादों को सरस गीतों के साथ सम्मिलित कर ऐसे प्रस्तुत किया गया जो सभागृह में उपस्थित दर्शकों की निरंतर वाहवाही बटोरता रहा। नर्मदा मांई के सुमिरन के साथ शुरू हुए स्वांग ने आस्थावादी बुंदेली संस्कृति को जीवंत कर दिया। लघुता लिए इस स्वांग में बुंदेलखण्ड के ढिमरयाई नृत्य की लपक व लचीलापन भी था तो लोकोपयोगी संदेश भी समाहित था। …

Continue Reading

कश्मीर के अनंतनाग की भांड पथेर चौराहा नाटक शैली

कश्मीर

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय के सभागार में कश्मीर की लोक प्रचलित चौराहा नाटक शैली ‘भाण्ड पथेर’ प्रहसन का दर्शी बनना हमारे लिए नये अनुभव से साक्षात्कार करने जैसा था। शिकारगाह पथेर शीर्षक से पर्यावरण तथा वनजीव संरक्षण का संदेश देकर कश्मीर की लोक संस्कृति को प्रतिबिम्बित करते प्रसंगों ने देखने वालों को न केवल गुदगुदाया बल्कि सोचने पर भी विवश कर दिया। ‘इम्तियाज अहमद बगथ’ के निर्देशन में की गयी प्रस्तुति में लकड़हारे और चरवाहे के संवाद, शिकारी और चरवाहे के बीच झड़प, चरवाहे और उसकी पत्नी का वार्तालाप, आलसी सिपाही की सजग चरवाहे के साथ विनोदमूलक वार्ता और अंत में राजा द्वारा …

Continue Reading

राजस्थान के चितौड़गढ़ के घोसुण्डा की कलगी तुर्रा शैली

राजस्थान

भोपाल स्थित मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय के सभागार में राजस्थान के चितौड़गढ़ के घोसुण्डा कस्बे से पधारे कलगी के उस्ताद मिर्जा अकबर बेग काग़ज़ी के निर्देशत्व में तुर्रा कलगी शैली में निबद्ध राजकुमारी फूलवंती की आकर्षक प्रस्तुति ने मन मोह लिया। डेढ़ घण्टे के इस अभिनव प्रस्तुतीकरण में दर्शक आद्यंत सम्मोहित हुए से बैठे रहे। सूरजगढ़ के राजकुमार फूल सिंह के विवाह संबंधित कथानक में फूलसिंह भाभी संवाद, रूष्ट राजकुमार के बड़े भाई का उन्हें मनाना, फूलसिंह का चन्दरगढ़ में प्रवेश और मालिन द्वारा उन्हें शरण देना, स्त्री भेश में महल में राजकुमार फूलसिंह और राजकुमारी फूलवंती का परिसंवाद, ये समस्त …

Continue Reading