मणिपुर की सुमंग लीला में थोइबी और खाम्बा का प्रेमाख्यानक

गुरू रवीन्द्र नाथ टैगोर ने कहा था आधुनिक भारत की संस्कृति एक विकसित शतदल के समान है। जिसका एक-एक दल उसकी प्रान्तीय भाषा साहित्य और संस्कृति है किसी एक को क्षति पहुँचाने  से कमल की शोभा क्षीण हो जायेगी। यह पंक्तियां पिछले दिनों भोपाल स्थित जनजातीय संग्रहालय के प्रेक्षागृह में आयोजित मणिपुर की बिरली लोकनाट्य शैली सुमंग लीला के प्रस्तुतीकरण के दर्शी बनकर स्मर हो आयीं। मणिपुरी रंगकर्मी नीलध्वजा खुमान के निर्देशन में ‘खोइरेंताक’ शीर्षक लिए लोक तत्वों से परिपूर्ण सुमंग लीला का प्रदर्शन मन मुग्ध कर गया। सुमंग लीला थोइबी और खाम्बा के  प्रेमाख्यानक पर आधारित थी। सुमंग लीला में …

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पश्चिम बंगाल की लोक नाट्य शैली “भवानी जात्रा” में महिषासुरमर्दिनी

आकाश पाताल को अपनी ज्योति से उद्भासित करती आद्यशक्ति सहस्त्र भुजवती देवी ‘भवानी’ की शत्रुविमर्दिनी शक्ति का चिरस्मरणीय प्रदर्शन हाल ही में भोपाल के जनजातीय संग्रहालय के सभागार में देखने को मिला। पश्चिम बंगाल की संस्था कोलकात्ता रंगमंच थियेटर  के कलाकारों द्वारा शोभीजीत हलदर के निर्देशत्व में प्रस्तुत ‘भवानी जात्रा’ की प्रस्तुति ने आद्यान्त दर्शकों को भक्ति प्रवण बनाये रखा। हमारी शक्ति रूपिणी शक्ति हमारे भीतर छिपी है का गूढ़ार्थ लिये पश्चिम बंगाल की लोक नाट्य शैली ‘जात्रा’ में महिषासुरमर्दिनी को ऐसे रूपायित किया गया कि हर दृश्य की समाप्ति पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान रहा। संस्कृतनिष्ठ श्लोकों, …

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राजा भोज का भोजपुर, आशापुरी और ढांवला में परमारकालीन मंदिर

bhopal bhojpur raja bhoj

पश्चिमाभिमुख भोजपुर मंदिर प्रदक्षिणा रहित होने के कारण निरंधार शैली में निबद्ध खेलते होंगे बच्चे यहां के कभी भरा समन्दर गोपी चन्दर बोल मेरी मछली तेरे तालाब में कितना पानी यह विचारते हुए होंठों पर स्मित (मुस्कान) तैर गयी थी। भोपाल से 32 कि.मी. दूर तक हरहराती बेतवा (वेत्रवती) नदी यमुना नदी में समागमित होने को आतुर, भूरे रंग की धूल खाई अनगढ़ चट्टानें, आम, महुआ, ईमली, पीपल, बड़ और सीताफल के असंख्य पेड़ों पर अटकी हुई धूप कलियासोत धारा को पार कर बायें हाथ पर बने विशालकाय नंदी को पीछे छोड़ते हुए हम परमारकालीन राजा भोज की नगरी भोजपुर …

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बुंदेलखण्ड की हास्य-परिहास वाली स्वांग परंपरा

बुंदेलखण्ड की हास्य-परिहास वाली स्वांग परंपरा

बुंदेलखण्ड की हास्य-परिहास वाली स्वांग परंपरा का रसास्वादन कराती ‘आ गई पूना बावरी’ का मंचन पिछले दिनों भोपाल स्थित मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय के सभागार में हुआ। सागर जिले के कर्रापुर कस्बे के ढीमर, मांझी और केवट समाज के लोक जीवन के बिम्ब समेटे इस प्रस्तुति में व्यंजनामयी लच्छेदार संवादों को सरस गीतों के साथ सम्मिलित कर ऐसे प्रस्तुत किया गया जो सभागृह में उपस्थित दर्शकों की निरंतर वाहवाही बटोरता रहा। नर्मदा मांई के सुमिरन के साथ शुरू हुए स्वांग ने आस्थावादी बुंदेली संस्कृति को जीवंत कर दिया। लघुता लिए इस स्वांग में बुंदेलखण्ड के ढिमरयाई नृत्य की लपक व लचीलापन भी था तो लोकोपयोगी संदेश भी समाहित था। …

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कश्मीर के अनंतनाग की भांड पथेर चौराहा नाटक शैली

कश्मीर

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय के सभागार में कश्मीर की लोक प्रचलित चौराहा नाटक शैली ‘भाण्ड पथेर’ प्रहसन का दर्शी बनना हमारे लिए नये अनुभव से साक्षात्कार करने जैसा था। शिकारगाह पथेर शीर्षक से पर्यावरण तथा वनजीव संरक्षण का संदेश देकर कश्मीर की लोक संस्कृति को प्रतिबिम्बित करते प्रसंगों ने देखने वालों को न केवल गुदगुदाया बल्कि सोचने पर भी विवश कर दिया। ‘इम्तियाज अहमद बगथ’ के निर्देशन में की गयी प्रस्तुति में लकड़हारे और चरवाहे के संवाद, शिकारी और चरवाहे के बीच झड़प, चरवाहे और उसकी पत्नी का वार्तालाप, आलसी सिपाही की सजग चरवाहे के साथ विनोदमूलक वार्ता और अंत में राजा द्वारा …

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राजस्थान के चितौड़गढ़ के घोसुण्डा की कलगी तुर्रा शैली

राजस्थान

भोपाल स्थित मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय के सभागार में राजस्थान के चितौड़गढ़ के घोसुण्डा कस्बे से पधारे कलगी के उस्ताद मिर्जा अकबर बेग काग़ज़ी के निर्देशत्व में तुर्रा कलगी शैली में निबद्ध राजकुमारी फूलवंती की आकर्षक प्रस्तुति ने मन मोह लिया। डेढ़ घण्टे के इस अभिनव प्रस्तुतीकरण में दर्शक आद्यंत सम्मोहित हुए से बैठे रहे। सूरजगढ़ के राजकुमार फूल सिंह के विवाह संबंधित कथानक में फूलसिंह भाभी संवाद, रूष्ट राजकुमार के बड़े भाई का उन्हें मनाना, फूलसिंह का चन्दरगढ़ में प्रवेश और मालिन द्वारा उन्हें शरण देना, स्त्री भेश में महल में राजकुमार फूलसिंह और राजकुमारी फूलवंती का परिसंवाद, ये समस्त …

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बिहार का गोड़ऊ लोकनाट्य, बुंदेली लोकगान और असम के लोकनृत्य

बिहार का गोड़ऊ लोकनाट्य, बुंदेली लोकगान और असम की कथक गुरू मरामी मेंधी लोकनृत्य शैली देवधानी और ओझा पाली

पिछले दिनों भोपाल स्थित जनजातीय संग्रहालय के दर्शनगृह में देश की लोकसंस्कृति और लोकांचलों के परिवेश की सुरम्यता को अनुभूत करने का अवसर मिला। रंग प्रयोगों के प्रदर्शन की साप्ताहिक श्रृंखला के अन्तर्गत बिहार प्रान्त के गोड़ऊ लोकनाट्य शैली में शिव-विवाह प्रसंग का रसमय मंचन हुआ विलुप्त प्राय तीव्र गति से होने वाले गोड़ऊ अथवा हुड़का नृत्यों की बहुलता वाली इस शैली को बक्सर के प्रभुकुमार गोंड के निर्देशत्व में तैयार किया गया था। लगभग डेढ़ घण्टे की नृत्य संगीत और वार्तालाप वाली समन्वित प्रस्तुति लोकतत्वों से परिपूर्ण थी। लोक नाटक में राजा हिमालय के पुत्री के विवाह की चिंता, …

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लोक धारणा : राजा विक्रमादित्य के पिता राजा गन्धर्वसेन की गन्धर्वपुरी

राजा विक्रमादित्य

९० वर्षीया केसर बाई के लोकगीतों में आज भी राजा गन्धर्वसेन के प्रति श्रद्धा भाव द्वादश ज्योतिर्लिगों में प्रतिष्ठित ओंकारेश्वर तीर्थ से दर्शन करके लौटते समय मध्यप्रदेश के इन्दौर भोपाल मार्ग SH 18 पर देवास जिले में सोनकच्छ से उत्तर पूर्व में बांए हाथ पर लगे एक संकेतक ने हमारा ध्यान आकृष्ट किया। ‘गंधर्वपुरी’ विस्फारित नेत्रों से पहले तो संकेतक पर दृष्टिपात किया उत्सुकता होनी स्वाभाविक थी सो हमने गाड़ी गंधर्वपुरी की ओर मोड़ दी। मार्ग में राहगीरों से पूछते पाछते हम काली सिंध नदी(प्राचीन नाम सिंधु जिसका कालिदास और वराहमिहिर ने भी स्मरण किया था) से आवृतित सागौन की …

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मालवा की लोक नाट्य शैली माच, जबलपुर का देवीजस गान, जूनागढ़ का गरबा

मालवा जबलपुर जूनागढ़

आचार्य नरेन्द्र देव ने कहा था संस्कृति लोक चित्त की खेती है। निःसन्देह जिये हुए जीवन पर निर्भर लोक साहित्य लोकरस की प्रधानता के कारण ही लोक संस्कृति को उर्वरत्व प्रदान करता है। लोकसंस्कृति का यही वैशिष्ट्य हमें भोपाल स्थित जनजातीय संग्रहालय के मंच पर अभिनयन श्रृंखला के अन्तर्गत आयोजित मालवा के लोकनाट्य ‘माच’ के प्रभावशाली प्रदर्शन में दिखाई दिया। मध्यप्रदेश के मालवा की चिरप्रचलित लोकनाट्य शैली में मालीपुरा सांस्कृतिक माच मण्डल एवं लोक कल्याण समिति उज्जैन के लोक कलाकारों द्वारा प्रणवीर तेजा जी का मंचन मन को लुभा गया। वीरवर तेजा जी का खेल मालवा संस्कृति का अभिन्न अंग …

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देश का एकमात्र संस्कृत वृंद (बैण्ड) और आदिशंकराचार्य की रचनाएँ

ब्रह्म सत्यस्य सत्यम् यही भारतीय आस्थावादी दृष्टिकोण – स्वामी मुक्तानंद पुरी देश के हृदय स्थल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के जनजातीय संग्रहालय में आयोजित शंकर व्याख्यानमाला के अन्तर्गत भक्ति आंदोलन में संतों की वाणी में अद्वैत दर्शन विषयक उद्बोधन में आदरणीय स्वामी मुक्तानंद पुरी जी ने परमतत्व से उद्भूत सृष्टि का पर्यवसान् भी उसी में निहित है कहकर संत रैदास तुलसी, सूरदास, कबीर, संत दादू दयाल और गुरु ग्रन्थ साहिब में निरुपित  विराट ब्रह्म की विश्व व्यापक संकल्पना को दोहराया। कार्यक्रम का आयोजन आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास ने किया था। सम्मान्य स्वामी मुक्तानंद पुरी जी ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती …

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