भूले बिसरे खेल-खिलौने वाला माटी शिल्प शिविर

लुका-छिपी, आँख-मिचौनी, धूप ले के छैंया, सितौलिया, आसी-पासी, कुक्कर कुक्कर कांकरो, आती-पाती, फुंदी फटाका, लंगड़ी, गुल्ली-डंडा और गुड्डे-गुड़ियों के साथ घर-घर खेलने वाले उल्लसित और उत्फुल्लित लोकमन की समूहात्मक अभिव्यक्ति हमें पिछले दिनों भोपाल स्थित जनजातीय संग्रहालय के दस दिवसीय शिविर में माटी के खिलौने बनाने वाले कुशल शिल्पकारों के शिल्प में दिखायी दी। राजस्थान, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश राज्यों के सिद्धस्त शिल्पियों ने मुक्ताकाश तले मुक्त कल्पनाओं से माटी के खेल खिलौनों का अभिनव संसार रच दिया। आंचलिक परिवेश में अपने बचपन की स्मृतियों में लौटकर खेल-खेल में ही आपसदारी सिखाते शिल्पियों में देश के कई प्रांतों और मध्यप्रदेश के …

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लोकमतः राजा विक्रमादित्य का शनि प्रकोप चम्पावती (चकल्दी) में शांत

लोकमतः राजा विक्रमादित्य का शनि प्रकोप चम्पावती में शांत   शनि प्रकोप से प्रभावित राजा विक्रमादित्य के चम्पावती नगरी में प्रवेश संबंधी कथानक के सूत्र चकल्दी में उपलब्ध मध्यप्रदेश के  शाजापुर जिले के अवन्तिपुर बड़ोदिया और पगरवाद गांवों में तुर्रा और कलगी के अखाड़े ढफ बजाकर अपने खयालों के माध्यम से विक्रमादित्य को लगी साढ़े साती शनि दशा को गा कर सुना रहे थे, सुनकर हम निःस्तब्ध थे। 2100 वर्ष बाद शनि की साढ़े साती से संत्रस्त राजपुरूष विक्रमादित्य की लोककथा आधारित गीत विक्रमादित्य  काल की ऐतिहासिकता को उद्घाटित कर रहे थे, इसी से उस दिव्य पुरूष की चतुर्दिक दिव्यता के प्रसरण का सहजता से अनुमान लगाना …

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