पंजाब की लोकनाट्य नकल चमोटा शैली, लोक नृत्य, और मालवा का कबीर गायन

पंजाब का लोक नृत्य, लोकनाट्य शैली, चमोटा, मालवा, कबीर, गायन, धर्म और संस्कृति

लोकमानस की कल्पनाशीलता पर आश्रित लोकसाहित्य का वैशिष्ट्य ही है कि वह स्वयंप्रसूतता और स्वयंस्फूर्तता होता है जिसमें लोक गीत बादलों की भांति झरते हैं और घांस की तरह उपजते हैं। हाल ही में भोपाल स्थित जनजातीय संग्रहालय के प्रेक्षागृह में पंजाब की लोकनाट्य नक़ल चमोटा शैली  में लोक संस्कृति के मूल्यों से रंजित ‘हीर रांझा’के चमत्कारिक प्रदर्शन को देखने का अवसर मिला। पंजाब के मालवा अंचल की मलवई उपबोली में लोक कलम से लिखे गये लोकप्रेम की निश्छलता लिऐ ‘हीर रांझा’की विशुद्ध प्रेमकथा को ख़ुशी मोहम्मद,सलीम मोहम्मद,मंज़ूर अली, इखलाक मोहम्मद,शौक़त अली,इमरान,जगतार सिंह,भिन्दर सिंह और विभाजन का दंश झेल चुके ७४ …

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लोकरंजन में शिव – राजस्थानी कूचामणि ख्याल, बघेली गीत, निमाड़ी गणगौर नृत्य

लोकरंजन में शिव

बहुधा लोकसंस्कृति के संवाहक लोकगीतों और लोक अख्यायिकाओं में देवी-देवताओं के प्रति लोक मानस की अटूट आस्था परिलक्षित होती है। उसमें भी विशेष रूप से सृष्टि संहार के प्रणेता मंगलमय शिव तो पूर्ण श्रद्धा से विराजे दिखते हैं। प्राकृतिक प्रकोपों से रक्षणार्थ पूजित शिव आध्यात्मिक साधना करने वाले तत्वज्ञानी से लेकर जन-जन के परमाराध्य हैं उनके प्रति तीव्र आसक्ति लोक मन में उपजती है, लोक भावों के रूप में लोकधुनों में ढलकर लोकगायकों के कंठ से निस्रत होकर लोकरंजन का माध्यम बनती है। ऐसे ही आयोजन के दर्शक बनने का हमें सुअवसर मिला सोचा आपसे साझा करूं। भोपाल स्थित जनजातीय …

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