राजस्थान की लोकनाट्य कुचामणि ख्याल शैली और महाराष्ट्र का लावणी नृत्य

80 बसंत पार कर चुके बंशीलाल जी उर्फ बशीर मोहम्मद द्वारा निर्देशित लोक नाट्य की प्रस्तुति इसमें कोई संदेह नहीं मंगल भाव लिए हमारे लोकनाट्य हों याँ लोक नृत्य, सामाजिक स्थितियों और परंपराओं की उजास से परिपूर्ण क्षेत्र विशेष का दर्पण होते हैं। भोपाल स्थित जनजातीय संग्रहालय के सभागार में राजस्थान की लोकनाट्य कुचामणि ख्याल शैली और महाराष्ट्र की लावणी नृत्य परंपरा के दर्शी बने हम यही अनुभूत करते रहे। सभागार में अभिनयन श्रंखला के अन्तर्गत राजस्थान के नागौर जिले के डेगाना तहसील के चुयी गांव से पधारे बंशीलाल खिलाड़ी एंड पार्टी द्वारा जगदेव कंकाली की सराहनीय प्रस्तुति की गयी। कुचामणी ख्याल परंपरा में …

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लोकमतः राजा विक्रमादित्य का शनि प्रकोप चम्पावती (चकल्दी) में शांत

लोकमतः राजा विक्रमादित्य का शनि प्रकोप चम्पावती में शांत   शनि प्रकोप से प्रभावित राजा विक्रमादित्य के चम्पावती नगरी में प्रवेश संबंधी कथानक के सूत्र चकल्दी में उपलब्ध मध्यप्रदेश के  शाजापुर जिले के अवन्तिपुर बड़ोदिया और पगरवाद गांवों में तुर्रा और कलगी के अखाड़े ढफ बजाकर अपने खयालों के माध्यम से विक्रमादित्य को लगी साढ़े साती शनि दशा को गा कर सुना रहे थे, सुनकर हम निःस्तब्ध थे। 2100 वर्ष बाद शनि की साढ़े साती से संत्रस्त राजपुरूष विक्रमादित्य की लोककथा आधारित गीत विक्रमादित्य  काल की ऐतिहासिकता को उद्घाटित कर रहे थे, इसी से उस दिव्य पुरूष की चतुर्दिक दिव्यता के प्रसरण का सहजता से अनुमान लगाना …

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