मणिपुर की सुमंग लीला में थोइबी और खाम्बा का प्रेमाख्यानक

खम्बा और थोईबी की दन्तकथा वाले मोइरंग पर्ब का चमत्कारिक सम्मोहन उसके बाद के इतिहास में परिलक्षित होता है। लेकिन अन्य प्रदर्शन कारी कलाओं की तरह यह लोकनाट्य कला भी मर्यादित संस्कारजन्य मध्ययुगीन सरोकारों के साथ वर्तमान में टीवी और सिनेमा वाली संस्कृति के सामने विवश दिखती है। यह भी पता चला कि मेइतेई  संस्कृति-दर्शन का दर्पण रही इस प्रकार की सुमंग लीलाएं विवाहादि के उपलक्ष्य में, बच्चे के षष्ठी के कार्यक्रम में यहां तक ही श्राद्धकर्म और मृत्युपर्यन्त तेरहवें दिन भोज कार्यक्रम में आयोजित की जाती रही हैं। दिल्ली व मुंबई के रंगमहोत्सव, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के मंचोत्सव,आदि प्रतिष्ठित मंचों पर से अपनी सुंमागलीला से दर्शकों को आनंदित  करने वाली इस कलाकार मण्डली में वरिष्ठ कलाकार की सम्मिलित थे जिनकी झोली 100 से अधिक पुरस्कारों-सम्मानों से भरी हुई थी। इम्फाल की पीस मेकर आर्टिस्ट ऐसासियेशन संस्था अब तक 40 से अधिक नाटकों का मंचन करने की उपलब्धि अपने नाम अंकित करा चुकी है। जिसमें कुन्ती, रेस्ताफीन, लीकांग, थम्बल, गुसमाओगी, खुदोल, नुपीगी, थामोई, इत्रामा और मालएमगाम्बी प्रमुख हैं।

मणिपुर की अधिकांश आंचलिक फिल्मों में अपने अभिनय कौशल से वहां की जनता के हृदय में स्थान बनाने वाले सउरा (विदूषक) अथोपम संतोष , खम्बा- यूमनाम अरूण कुमार, नोंगबान-नाउरेम तपासना मीतई , सिंखूबा-हेनरी सरांगथेम, साउबा लाईइबोतुम्बी, थोंगलेन-सरोखाइबाम इबोहम्बी, मुइरांग निंगथऊ-नाउरेम जीतेन्द्र कुमार मीतई, फुबाला अहल-लिकमाबम विकी, टाइगर-लेइफ्राकपम सुरसांग, थोईबी-रोशन माइबम, कुंजालेंबी-युमनाम मिलन, ममातोन-सेंजम डिप्सन, खमनू-विशेष हुईरेम, निगंथऊ मनाई-इरेंगबम सनाजोबा, अंनबा-गुरूमयुम राजेश और अंनबा-नासेपम सुरेश संगीत निर्देशक-मुइरांगथेम रार्बट मीतई, संगीतकार लाइमोजम बिनोय, सेराम रोमाजीत, परिकल्पनाकार और निर्देशक नीलध्वज खुमन, सलाहकार मुक्ताबलि लीमा के सहयोग से निर्मित सुंमाग लीला अपनी सम्मोहक रचना धर्मिता के कारण मन में घर कर गयी। पारंपरिक कलाओं के उन्नयन और प्रसरण में ऐसे आयोजन की पुनरावृत्ति आवश्यक है।

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Comments

  1. राम जूनागढ़ says:

    આપ બહુત સુંદર કાર્ય કર રહે હૈ.લોક સંસ્કૃતિ કે વિધ વિધ મોતી સમાન કલા કો દ્રશ્ય શ્રાવ્ય રુપ મે પિરસકર અનઠા કાર્ય કર રહે હો.
    ધન્યવાદ

  2. Santosh Manipur says:

    Madam Disha Sharma I’m very thankful to you for your article promoting our Manipuri  folk theatre  Shumang Leela.