लोकमतः शनिदेव की साढ़ेसाती ने सम्राट विक्रमादित्य को चम्पावती (चकल्दी) पहुंचाया

लोकमतः राजा विक्रमादित्य का शनि प्रकोप चम्पावती में शांत मध्यप्रदेश के शाजापुर और सीहोर जिलों के अवन्तिपुर बड़ोदिया, पगरावद, रनायल, कोटरी, दिवड़िया, तिलावद, ढावला राय गाँवों में विक्रमादित्य की प्रशंसा के गीत पुरातन का सतत अनुसंधान हमारी यात्राओं के मूल में रहा है आज भी हम यात्रिक बन ऐसे अतीत में झांकने निकले हैं ,जिसमें हमें सम्राट विक्रमादित्य संबंधी एक  दंतकथा के  मर्म की खोज करना है  ,एक ऐसा राजा जिसे लोक ने देवता स्वरूप पूजा परन्तु इतिहास के समक्ष वह चुनौती बन गया हम उसी सर्वशक्तिमान लोकात्मा की सर्वप्रभुता के यथार्थ दर्शन के लिए निकले थे  कतिपय सूत्रों से पता चला था  कि  रमपुरा …

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लोकधारणा : राजा विक्रमादित्य के पिता राजा गन्धर्वसेन की गन्धर्वपुरी, तालोद का सूरजकुंड विक्रमादित्य का षष्ठी पूजन स्थल

गांव की समग्रता, सीधी-सादी निश्छल ग्रामात्मा और लोक परंपराओं में निहित लोक तत्वों से साक्षात्कार बित्ते भर धूप के उछलने के साथ ही तारीख बदली और हेमंती कोहरे से पटे मध्यप्रदेश के इन्दौर भोपाल राजमार्ग SH 28  पर हमारी मोटर शनैः शनैः सरक रही थी, मार्ग में  खजुरी, कोलूखेड़ी, वेदखेड़ी,सीताखेड़ी, पगारिया राम, अगेरा, मेहतवाड़ा गांवों के संकेतक आते गए नेवज नदी को पार करने के उपरांत देवास जिले की सोनकच्छ तहसील के गांव गंधर्वपुरी लिखे संकेतक ने हमारा ध्यान आकृष्ट कर  लिया। ‘गंधर्वपुरी’ विस्फारित नेत्रों से पहले तो संकेतक पर दृष्टिपात किया, कुतूहल होना स्वाभाविक था, सूर्याग्नि की प्रतीकात्मक्ता लिए कलामर्मज्ञ गगनचारी इंद्र के अनुचर गन्धर्वों की नगरी, गंधर्वपुरी  का संकेतक …

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