लोकमतः शनिदेव की साढ़ेसाती ने सम्राट विक्रमादित्य को चम्पावती (चकल्दी) पहुंचाया

लोकमतः राजा विक्रमादित्य का शनि प्रकोप चम्पावती में शांत मध्यप्रदेश के शाजापुर और सीहोर जिलों के अवन्तिपुर बड़ोदिया, पगरावद, रनायल, कोटरी, दिवड़िया, तिलावद, ढावला राय गाँवों में विक्रमादित्य की प्रशंसा के गीत पुरातन का सतत अनुसंधान हमारी यात्राओं के मूल में रहा है आज भी हम यात्रिक बन ऐसे अतीत में झांकने निकले हैं ,जिसमें हमें सम्राट विक्रमादित्य संबंधी एक  दंतकथा के  मर्म की खोज करना है  ,एक ऐसा राजा जिसे लोक ने देवता स्वरूप पूजा परन्तु इतिहास के समक्ष वह चुनौती बन गया हम उसी सर्वशक्तिमान लोकात्मा की सर्वप्रभुता के यथार्थ दर्शन के लिए निकले थे  कतिपय सूत्रों से पता चला था  कि  रमपुरा …

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लोक धारणा : राजा विक्रमादित्य के पिता राजा गन्धर्वसेन की गन्धर्वपुरी

राजा विक्रमादित्य

९० वर्षीया केसर बाई के लोकगीतों में आज भी राजा गन्धर्वसेन के प्रति श्रद्धा भाव द्वादश ज्योतिर्लिगों में प्रतिष्ठित ओंकारेश्वर तीर्थ से दर्शन करके लौटते समय मध्यप्रदेश के इन्दौर भोपाल मार्ग SH 18 पर देवास जिले में सोनकच्छ से उत्तर पूर्व में बांए हाथ पर लगे एक संकेतक ने हमारा ध्यान आकृष्ट किया। ‘गंधर्वपुरी’ विस्फारित नेत्रों से पहले तो संकेतक पर दृष्टिपात किया उत्सुकता होनी स्वाभाविक थी सो हमने गाड़ी गंधर्वपुरी की ओर मोड़ दी। मार्ग में राहगीरों से पूछते पाछते हम काली सिंध नदी(प्राचीन नाम सिंधु जिसका कालिदास और वराहमिहिर ने भी स्मरण किया था) से आवृतित सागौन की …

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